पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान ने एक बार फिर से भारत की मोदी सरकार की तारीफ की है। उन्होंने लाहौर में कहा कि भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीद के महंगाई दर को 7.5 फीसदी से घटाकर 5.5 प्रतिशत कर लिया है, जबकि पाकिस्तान में यह 12 फीसदी से बढ़कर 30 पर्सेंट तक हो गई है।
उन्होंने इसके लिए पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को जिम्मेदार ठहराया है, जो बीते साल नवंबर में ही रिटायर हुए हैं। उन्होंने कहा कि मैंने बाजवा से कहा था कि भारत के अमेरिका से अच्छे संबंध हैं। इसके बाद भी वह यूक्रेन की जंग पर न्यूट्रल है। इसलिए पाकिस्तान को भी इस जंग से दूर ही रहना चाहिए।
इमरान खान ने कहा कि मैं जब रूस गया था तो बाजवा ने इस पर आपत्ति जताई थी। फिर मैं जब रूस में जाकर वहां से गेहूं की सप्लाई के लिए डील करके और सस्ते तेल की खरीद पर बात करके लौटा तो उन्होंने मुझ पर दबाव डाला कि मैं पुतिन की निंदा करूं। मैंने देश के हित में ऐसा नहीं किया। फिर एक सेमिनार में बाजवा ने खुद ही रूस की आलोचना कर दी। इस तरह उन्होंने अमेरिका को खुश करने के लिए अपनी अर्थव्यवस्था का भट्ठा बैठा दिया। उन्होंने कहा कि आज देश में तेल का संकट और गेहूं का संकट है। इसकी वजह इस तरह की पॉलिसी ही है।
पीटीआई के नेता ने कहा कि मेरे से पहले के शासकों ने देश की संप्रभुता से समझौता किया था। वे देश को लूटते रहे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से लूट चल रही है, उसमें कोई भी विकास नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि सिंगापुर को ही देखें तो वहां भ्रष्ट मंत्रियों पर ऐक्शन लेकर प्रति व्यक्ति आय को 60 हजार डॉलर तक बढ़ा दिया है। इमरान खान ने कहा कि दूसरी तरफ पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय 2,000 डॉलर ही रह गई है। इसकी वजह यह है कि यहां शासकों ने ही लूट मचाई है। इमरान खान ने कहा कि हमारी मांग है कि खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब में तत्काल चुनाव होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सरकार चुनाव से डर रही है क्योंकि उन्हें हार का खतरा लग रहा है।





























