विजया एकादशी का महत्व
विजया एकादशी का व्रत व्यक्ति को मोक्ष की ओर ले जाता है. यदि आप शत्रुओं से परेशान हैं तो आपको विधिवत विजया एकादशी का व्रत रखना चाहिए.
इससे शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिलती है. भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इस व्रत का महत्व युधिष्ठिर को बताया था, इसके बाद ही पाण्डवों ने कौरवों पर विजय प्राप्त की थी.
Vijaya Ekadashi 2023: विजया एकादशी पारण का समय
विजया एकादशी पारणा मुहूर्त :08:03:55 से 09:13:09 तक 17, फरवरी को
अवधि :1 घंटे 9 मिनट
हरि वासर समाप्त होने का समय :08:03:55 पर 17, फरवरी को
विजया एकादशी पूजा के बाद इन बातों का रखें ध्यान
पूजा के बाद कुछ बातों का खास ध्यान रखा जाता है और भक्त पूरी श्रद्धा से पालन भी करते हैं. विजया एकादशी के दिन सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है. इस दिन चावल और भारी खाद्य पदार्थों के सेवन से खासा परहेज किया जाता है. रात में पूजा करना अच्छा होता है. साथ ही इस दिन लड़ाई-झगड़े, अपशब्द कहने और किसी के साथ बुरा बर्ताव या रवैया अपनाने से परहेज करना चाहिए. अच्छा आचरण ही भगवान विष्णु को भाता है.
विजया एकादशी का महत्व
Vijaya Ekadashi 2023: विजया एकादशी पूजा विधि
- एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान के सामने व्रत का संकल्प लें. दिन भर व्रत रखें.
- भगवान नारायण को पीला चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प, तुलसी, प्रसाद, वस्त्र, दक्षिणा आदि अर्पित करें.
- व्रत कथा पढ़ें या सुनें और आरती करें.
- व्रत निर्जल रखें यदि निर्जला व्रत रखना संभव न हो तो फलाहार और जल ले सकते हैं.
- एकादशी की रात में जागरण करके भगवान के भजन और ध्यान करें.
- द्वादशी को ब्राह्मण को भोजन कराकर उसे दान दक्षिणा दें.
- दान करने के बाद ही अपने व्रत का पारण करें.
Vijaya Ekadashi 2023 Shubh Muhurat: विजया एकादशी शुभ मुहूर्त
विजया एकादशी तिथि प्रारंभ – फरवरी 16, 2023 को 05:32 AM
एकादशी तिथि समाप्त – फरवरी 17, 2023 को 02:49 AM
विजया एकादशी गुरुवार, फरवरी 16, 2023 को
17 फरवरी को पारण का समय – 08:01 AM से 09:13 AM
Vijaya Ekadashi Vrat Niyam: एकादशी व्रत के नियम
- एकादशी का व्रत काफी कठिन माना गया है क्योंकि इसके नियम दशमी की शाम को सूर्यास्त के बाद से ही लागू हो जाते हैं और द्वादशी की सुबह व्रत पारण तक मान्य होते हैं.
- विजया एकादशी व्रत कर रहे हैं तो 26 फरवरी की शाम को सूर्यास्त के बाद सात्विक भोजन करें.
- द्वादशी के दिन तक ब्रह्मचर्य का पालन करें.
Vijaya Ekadashi Vrat Katha: विजया एकादशी पूजा के दौरान कथा जरूर पढ़ें
विजया एकादशी कथा के अनुसार त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र तट पर पहुंचे, तब राम ने समुद्र देवता से मार्ग देने की प्रार्थना की परन्तु समुद्र देव ने भगवान राम को लंका जाने का मार्ग नहीं दिया, तब भगवान राम ने वकदालभ्य मुनि की आज्ञा के अनुसार विजय एकादशी का व्रत विधि पूर्वक किया जिसके प्रभाव से समुद्र ने मार्ग प्रदान किया. इसके साथ ही विजया एकादशी का व्रत रावण पर विजय प्रदान कराने में सहायक सिद्ध हुआ और तभी से इस तिथि को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है.
Vijaya Ekadashi के दिन इन बातों का रखें ध्यान
अगर उपवास रखें तो बहुत उत्तम होगा, नहीं तो एक वेला सात्विक भोजन ग्रहण करें. एकादशी के दिन चावल और भारी खाद्य का सेवन न करें. रात्रि के समय पूजा उपासना का विशेष महत्व होता है. क्रोध न करें, कम बोलें और आचरण पर नियंत्रण रखें.






























