ज्योतिषाचार्य पं.अविनाश मिश्र शास्त्री (चित्रकूटधाम)
प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इसलिए इसे त्रयोदशी व्रत भी कहते हैं। प्रदोष व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से शुरू किया जा सकता है। इस व्रत को कोई भी रख सकता है। मान्यता है प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं।
प्रत्येक महीने में दो प्रदोष व्रत पड़ते हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। मान्यता है इस व्रत को करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए भी ये व्रत बेहद फलदायी माना जाता है। इस दिन पार्थिव पूजन का बहुत महत्व है। घर में पार्थिव का शिवलिंग बनाकर रुद्राभिषेक करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत कैसे करें-प्रदोष व्रत दो तरीके से रखा जा सकता है। पहले तरीके के अनुसार व्रत वाले दिन के सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक उपवास कर सकते हैं। दूसरे तरीके के अनुसार सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक व्रत कर सकते हैं। आप अपनी सुविधा अनुसार किसी भी तरीके से प्रदोष व्रत रख सकते हैं। प्रदोष का मतलब सूर्यास्त के आसपास के समय से होता है इसलिए प्रदोष व्रत वाले दिन इस प्रदोष काल में शिव जी की पूजा जरूर करें।
प्रदोष व्रत की विधि-ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके पूजा में बैठना चाहिए।पूजन स्थल को साफ करें। इसके बाद रंगोली बनाएं।
फिर उत्तर पूर्व दिशा की तरफ मुख करके या जिधर आपके घर का वास्तु अनुरूप मंदिर है उसकी तरफ मुख करके भगवान शिव की पूजा करें।
•ॐ नमः शिवाय• मंत्र का जप करें और साथ में दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
सोम प्रदोष को रोग मुक्ति के लिए किसी शिव मंदिर में कुश और गंगा जल से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें इससे रोगों से मुक्ति मिलेगी।
पूरा दिन फलाहार का व्रत रखें और सायंकाल मंदिर अवश्य जाएं।
प्रदोष व्रत कितने करने चाहिए -अगर कोई मनोकामना है तो प्रदोष व्रत लगातार 11 या 26 त्रयोदशी तक रखें और इसके बाद इसका विधि विधान से उद्यापन कर दें। वहीं बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो प्रदोष व्रत कई सालों तक रखते हैं। अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं तो एक समय बाद इसका उद्यापन भी जरूर करें। आप चाहें तो उद्यापन के बाद फिर से प्रदोष व्रत शुरू कर सकते हैं।
प्रदोष व्रत कौन कर सकता है-प्रदोष व्रत कोई भी कर सकता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से व्यक्ति की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
प्रदोष व्रत के फायदे- प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
संतोष, स्वास्थ्य और धन की प्राप्ति होती है।
व्यक्ति को उसके सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है।
सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।
दिन के अनुसार प्रदोष व्रत का महत्व और उनसे मिलने वाले लाभ-दिन प्रदोष व्रत का नाम, दिन अनुसार प्रदोष व्रत के फायदे-रविवार भानु प्रदोष या रवि प्रदोष- रवि प्रदोष व्रत से व्यक्ति को सुख, शांति और लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है।
सोमवार सोम प्रदोष या चंद्र प्रदोष- सोम प्रदोष से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।
मंगलवार भौम प्रदोष- भौम प्रदोष व्रत से व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
बुधवार सौम्यवारा प्रदोष- बुधवार प्रदोष व्रत से शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलती है। व्यक्ति का ज्ञान बढ़ता है।
गुरुवार प्रदोष- गुरुवार प्रदोष व्रत से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है।
शुक्रवार भ्रुगुवारा प्रदोष- शुक्रवार प्रदोष व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
शनिवार शनि प्रदोष-शनि प्रदोष व्रत से नौकरी में सफलता या पदोन्नति मिलती है। संतान सुख की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत वाले दिन क्या दान करें-इस दिन अन्न और वस्त्र का दान करें। गरीबों में अन्न बाटें। अस्पतालों में गरीब मरीजों को फ़ल वितरण करें। इस दिन एक बेल का वृक्ष लगाने से कई जन्मों के पापों का नाश होकर बहुत पुण्य की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत के उपाय-संतान प्राप्ति के लिए रुद्राभिषेक कराएं। दुग्ध या शहद से अभिषेक कराएं।
संतान गोपाल का पाठ करें।
रोग से परेशान लोग महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
छात्र शिवमंदिर जाकर बेलपत्र और जलाभिषेक करें।
पवित्र नदी में स्नान कर भगवान शिव के सामने बैठकर श्री रामचरितमानस का पाठ करें।
प्रदोष व्रत की शुरुआत कब से करें-प्रदोष व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से प्रारंभ किया जा सकता है। इसके अलावा प्रदोष व्रत श्रावण और कार्तिक मास की त्रयोदशी से शुरू करना सबसे शुभ माना जाता है।
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