समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विवाद को अपने राजनीतिक नारे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ जोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के कुशासन के कारण अब ‘पीड़ित’ ही PDA का हिस्सा बन रहे हैं।
उपभोक्ता बनाम उपभुगता (Consumer vs Sufferer): अखिलेश यादव ने शब्दों के खेल के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि भाजपा राज में अब जनता Consumer (उपभोक्ता) नहीं रह गई है, बल्कि ‘उपभुगता’ हो गई है। उनके अनुसार, जनता भाजपा सरकार की “हेराफेरी” और गलत नीतियों के दुष्परिणामों को भुगत रही है।
PDA का बढ़ता दायरा (Expanding PDA Base): सपा चीफ ने अपने पोस्ट में स्पष्ट किया कि उनकी रणनीति अब और व्यापक हो गई है:
“जो पीड़ित है, वही PDA है! अब इस समूह में ‘प्रीपेड पीड़ित’ भी जुड़ गए हैं। ये नए पीड़ित कह रहे हैं कि चिंता न करें, भाजपा के बुरे दिन जाने वाले हैं। जल्द ही ‘PDA की सरकार’ आएगी और सबको सस्ती व निर्बाध बिजली दिलवाएगी।”
निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश में बिजली की बढ़ती कीमतें और स्मार्ट मीटरों में आने वाली तकनीकी दिक्कतें एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनती दिख रही हैं। अखिलेश यादव ने ‘प्रीपेड पीड़ित’ का मुद्दा उठाकर सीधे तौर पर मध्यम वर्ग और शहरी मतदाताओं को साधने की कोशिश की है, जो स्मार्ट मीटरों की अनिश्चितता से परेशान हैं।
मुख्य आकर्षण (Key Highlights):
- New Terminology: अखिलेश यादव ने ‘प्रीपेड पीड़ित’ और ‘उपभुगता’ जैसे नए शब्दों से सरकार को घेरा।
- Technical Glitches: स्मार्ट मीटरों के कारण अचानक बिजली कटने और तकनीकी खराबी को मुख्य मुद्दा बनाया।
- Political Narrative: बिजली संकट को PDA की रणनीति से जोड़कर चुनावी माहौल तैयार किया।
- Advance Payment Issue: सवाल उठाया कि पैसा पहले लेने के बाद भी सेवा खराब क्यों है?



































