टीसीएस के नासिक कार्यालय में धर्मांतरण और प्रताड़ना का मामला भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक स्थित बीपीओ ब्रांच इन दिनों एक बहुत ही संगीन विवाद के केंद्र में आ गई है। अप्रैल 2026 में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्यालय में सुनियोजित ढंग से जबरन धर्म परिवर्तन, मानसिक उत्पीड़न और महिलाओं के यौन शोषण का एक बड़ा खेल चल रहा था। हालात की नजाकत को समझते हुए और अपने स्टाफ की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए टीसीएस प्रशासन ने तुरंत एक अहम फैसला लिया। कंपनी ने अपनी नासिक इकाई के सभी 150 कर्मचारियों के लिए कार्यालय आकर काम करने पर रोक लगा दी है और उन्हें ‘वर्क फ्रॉम होम’ दे दिया है। अब इस बिल्डिंग परिसर से कंपनी का कोई भी काम नहीं होगा, बल्कि सभी कर्मचारी अपने-अपने घरों से सुरक्षित रहकर कंपनी का कामकाज संभालेंगे।
संगठित गिरोह का पर्दाफाश और पुलिस की सख्त कार्रवाई पुलिस की सघन जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस प्रतिष्ठित कंपनी के भीतर कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों और एचआर विभाग के अधिकारियों ने मिलकर एक संगठित गिरोह बना रखा था। इस धर्मांतरण और शोषण के रैकेट को मुख्य रूप से एचआर हेड निदा खान और तौसिफ अत्तर (तौसिफ अख्तर) चला रहे थे, जिन्हें इस पूरे कुचक्र का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। नासिक पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए अब तक एक असिस्टेंट जनरल मैनेजर (एजीएम) सहित कुल छह कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए लोगों में सात पुरुष और एक महिला शामिल हैं। हालांकि, इस रैकेट की मुख्य सूत्रधार मानी जा रही महिला अधिकारी निदा खान अभी भी फरार है और पुलिस की कई टीमें उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही हैं।
मजबूर महिलाओं को निशाना बनाने की साजिश और तौर-तरीके इस गिरोह के काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद ही शातिराना था। ये आरोपी खासतौर पर ऐसी महिला कर्मचारियों को अपना निशाना बनाते थे जो पैसों की तंगी से गुजर रही होती थीं या जिनके परिवार में कोई आर्थिक व भावनात्मक समस्या चल रही होती थी। कंपनी में ट्रेनिंग सेशन के दौरान जानबूझकर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया जाता था ताकि उनका ब्रेनवॉश किया जा सके। कर्मचारियों को झांसे में लेकर उन पर जबरदस्ती नमाज अदा करने और इस्लामी टोपी पहनने का दबाव डाला जाता था। महिलाओं का यौन शोषण करना और उन्हें शादी का प्रलोभन देकर धर्म बदलने के लिए मजबूर करना इस गिरोह का मुख्य हथियार था। जो भी कर्मचारी इनकी बातों में नहीं आता था, उसे उसकी नौकरी से बर्खास्त कर देने की धमकियां दी जाती थीं।
दर्ज हुई कई एफआईआर और एचआर अधिकारियों की लापरवाही इस पूरे प्रकरण में पीड़ित महिलाओं के सामने आने के बाद नासिक शहर पुलिस ने अब तक 9 संगीन एफआईआर दर्ज कर ली हैं। इन मामलों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, डरा-धमका कर जबरन धर्मांतरण और धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसी सख्त धाराएं लगाई गई हैं। इस मामले में कंपनी के मानव संसाधन (एचआर) विभाग का रवैया भी बेहद निराशाजनक और संदेह के घेरे में पाया गया है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ महिला एचआर अधिकारी ने एक पीड़िता की शिकायत को सुनने के बजाय उसे आगे की कार्रवाई करने से रोका। इस अधिकारी पर आरोप है कि उसने जानबूझकर इन गंभीर अपराधों पर पर्दा डालने की कोशिश की और शिकायतों को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में नहीं आने दिया, जिससे आरोपियों के हौसले और बुलंद हो गए।
एनआईए और एटीएस से जांच का पुलिस कमिश्नर का अनुरोध इस कॉर्पोरेट अपराध के तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका के चलते नासिक पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों की मदद मांगी है। नासिक के पुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक ने आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) और स्टेट इंटेलिजेंस को इस मामले की जांच में शामिल होने के लिए पत्र लिखा है। सीपी कर्णिक ने बताया कि सोशल मीडिया पर इन आरोपियों के किसी चरमपंथी संगठन से जुड़े होने और विदेशी फंडिंग मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं, जिसकी पूरी तरह से जांच की जा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अभी तक इन दावों को पुख्ता करने वाला कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन पुलिस ने आरोपियों के बैंक विवरण और व्हाट्सएप चैट्स खंगालने शुरू कर दिए हैं ताकि फंडिग के किसी भी संभावित सुराग का पता लगाया जा सके।
सर्वोच्च न्यायालय में अपील और टीसीएस द्वारा गठित जांच समिति देश के कॉर्पोरेट सेक्टर में सामने आए इस अभूतपूर्व मामले की गूंज अब अदालतों तक पहुंच चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने सीधे देश के सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर यह मांग की है कि इस प्रकार के ‘जबरन धर्मांतरण’ को ‘आतंकवादी कृत्य’ घोषित किया जाए और इसकी एक उच्च स्तरीय विशेष जांच हो। इस पूरे विवाद के बीच टीसीएस ने भी अपनी आंतरिक व्यवस्था को सुधारने और निष्पक्ष जांच के लिए एक बड़ी ओवरसाइट कमेटी का निर्माण किया है। इस अहम समिति की कमान कंपनी बोर्ड के स्वतंत्र निदेशक केकी मिस्त्री (Keki Mistry) के हाथों में दी गई है। इसके अलावा, कंपनी ने आगामी आदेशों तक नासिक की इस विवादित यूनिट में सभी नई भर्तियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।



































