सदन की विशेष कार्यवाही: उत्तर प्रदेश की विधानसभा में आज ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा करने के लिए एक दिन का विशेष सत्र बुलाया गया था। सत्र की शुरुआत वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा रखे गए निंदा प्रस्ताव से हुई। इस दौरान सदन का वातावरण उस समय अत्यंत भावुक और नाटकीय हो गया जब उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक चर्चा के दौरान विपक्ष के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए।
हाथ जोड़कर भावुक अपील: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने हाथ जोड़कर विपक्ष से यह मार्मिक अपील की कि वे संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पास कराने में केंद्र सरकार की मदद करें। उन्होंने विपक्षी दलों से आग्रह किया कि वे इस महत्वपूर्ण विधेयक का विरोध करना बंद करें। पाठक ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए इस कानून का लागू होना अत्यंत आवश्यक है और इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए।
सपा पर तीखा प्रहार: चर्चा के दौरान ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के महिला हितैषी होने के दावों पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने सपा की पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान हुई घटनाओं को सिलसिलेवार ढंग से सदन के पटल पर रखा। उपमुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ हुए ‘गेस्ट हाउस कांड’ का जिक्र किया, जिसके बाद सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
पुरानी घटनाओं का उल्लेख: उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी के नेताओं द्वारा समय-समय पर महिलाओं के विरुद्ध दिए गए विवादित बयानों और पुरानी आपराधिक घटनाओं को याद दिलाया। उनके इन बयानों के कारण सदन में कई बार हंगामेपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि विपक्ष का इतिहास महिला विरोधी रहा है, इसलिए वे आज भी इस संशोधन बिल की राह में रोड़े अटका रहे हैं।
भाजपा की रणनीति: भारतीय जनता पार्टी संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन के गिरने के बाद से ही हमलावर है। भाजपा लगातार इसके लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहरा रही है और उन्हें सार्वजनिक मंचों पर महिला विरोधी बता रही है। इसी रणनीति के तहत गुरुवार को विधानसभा का यह विशेष सत्र आयोजित किया गया था ताकि जनता के बीच विपक्ष के दोहरे चरित्र को उजागर किया जा सके।
विपक्ष का पलटवार: दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने भी सदन के भीतर और बाहर भारतीय जनता पार्टी को महिला विरोधी करार दिया। सपा ने मांग की है कि इन्हीं सीटों के भीतर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। सदन में दोनों पक्षों के बीच भारी गहमागहमी देखने को मिली और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में और अधिक तूल पकड़ेगा।



































