असम में आगामी ईद-उल-अजहा के अवसर पर गो-वध न करने का निर्णय विभिन्न ईदगाह और कब्रिस्तान कमेटियों ने लिया है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया और इसे राज्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार यह सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी पहल है। राज्य सरकार ऐसे सभी प्रयासों का समर्थन करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है। समाज के सभी वर्गों ने इस निर्णय का सकारात्मक रूप से स्वागत किया है।
भावनाओं का सम्मान मुख्यमंत्री Sarma ने कहा कि मैं असम के बहुसंख्यक सनातन समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने के इस प्रयास का अभिनंदन करता हूं। ऐसे स्वैच्छिक कदम राज्य में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के माहौल को और मजबूत बनाने में सहायक होंगे। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की है कि प्रदेश की अन्य कमेटियां भी इसी तरह की अपील जारी करेंगी। उन्होंने सभी ईद कमेटियों से इस त्यौहार को गो-वध मुक्त बनाने का विशेष आह्वान किया है। सौहार्द ही राज्य की असली पहचान है।
कानूनी प्रावधान धुबरी टाउन ईदगाह कमेटी के आधिकारिक नोटिस में राज्य के पशु संरक्षण अधिनियम का स्पष्ट हवाला दिया गया है। कमेटी के अनुसार गाय की कुर्बानी देना कानूनी रूप से प्रतिबंधित है और इसका पालन करना आवश्यक है। कमेटी ने साफ कहा है कि यह प्रतिबंध किसी भी तरह से धार्मिक दायित्वों का उल्लंघन नहीं है। कानून के प्रावधानों के अंतर्गत गायों की कुर्बानी पूरी तरह से वर्जित कर दी गई है। सभी को कानून के दायरे में रहकर ही अपने त्यौहार मनाने चाहिए।
सख्त सजा का प्रावधान कमेटी ने नागरिकों को चेतावनी दी कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो गैर-जमानती आरोप लग सकते हैं। इसमें कम से कम तीन साल से लेकर अधिकतम सात साल तक की कैद हो सकती है। साथ ही दोषियों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान भी इस अधिनियम के तहत किया गया है। कमेटी ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं ताकि कोई भी नागरिक मुसीबत में न पड़े। अनुशासन ही समाज की मर्यादा को बनाए रखने का एकमात्र मार्ग है।
इस्लामी कानून धार्मिक पक्ष स्पष्ट करते हुए कमेटी ने कहा कि इस्लाम में गाय की कुर्बानी देना किसी भी तरह से अनिवार्य नहीं है। हालांकि असम में परिवारों के लिए गाय एक विकल्प के रूप में परंपरागत रूप से उपलब्ध रही है। इस्लामी कानून में वैकल्पिक हलाल जानवरों की कुर्बानी देने की पूरी छूट और अनुमति दी गई है। समुदाय को धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप वैकल्पिक विकल्पों को ही अपनाना चाहिए। यह निर्णय पूरी तरह से धार्मिक और कानूनी मापदंडों के भीतर लिया गया है।
शांतिपूर्ण ईद असम सरकार का मानना है कि गो-वध मुक्त ईद का आयोजन राज्य की एकता के लिए बहुत ही जरूरी है। प्रशासन इस मामले में लगातार कमेटियों के साथ संपर्क में है और निगरानी रखी जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि राज्य में इस बार बकरीद का त्यौहार पूरी गरिमा के साथ मनाया जाएगा। भाईचारा और सद्भाव बनाए रखना ही इस पवित्र त्यौहार का मुख्य उद्देश्य और मूल संदेश होना चाहिए। सभी लोग कानून का पालन करते हुए इस त्यौहार की खुशियों को आपस में बांटेंगे।





































