लखनऊ। आईसीएआर-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (आईसीएआर-एनबीएफजीआर) के निदेशक डॉ. काजल चक्रबर्ती को कृषि और संबद्ध विज्ञान में नवाचार और प्रौद्योगिकी श्रेणी में प्रतिष्ठित “राष्ट्रीय कृषि विज्ञान पुरस्कार 2025” से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार भारतीय कृषि विज्ञान में सर्वोच्च सम्मानों में से एक है, जिसे केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री, शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 97वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान प्रदान किया। डॉ. चक्रवर्ती को यह राष्ट्रीय सम्मान आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान, कोच्चि में अपने कार्यकाल के दौरान किए गए उत्कृष्ट अनुसंधान योगदानों के लिए मिला है। समुद्री प्राकृतिक उत्पादों, कार्यात्मक न्यूट्रास्यूटिकल्स और समुद्री जीवों से बायोएक्टिव यौगिकों के क्षेत्र में उनके अग्रणी कार्य ने भारत में समुद्री जैव प्रौद्योगिकी और मूल्य वर्धित मत्स्य अनुसंधान की सीमाओं को काफी आगे बढ़ाया है। डॉ. चक्रबर्ती के पर्यावरण अनुकूल बायोएक्टिव्स, रोगाणुरोधी एजेंटों और न्यूट्रास्यूटिकल फॉर्मूलेशन विकसित करने में नवाचारों ने न केवल समुद्री मत्स्य पालन की स्थिरता और लाभप्रदता को बढ़ाने में योगदान दिया है, बल्कि अनुवादात्मक अनुसंधान और व्यावसायिक अनुप्रयोगों के लिए नए रास्ते भी खोले हैं। उनके अनुसंधान को इसकी वैज्ञानिक सटीकता, मौलिकता और सामाजिक प्रभाव के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। वर्तमान में आईसीएआर-एनबीएफजीआर का नेतृत्व करते हुए, डॉ. चक्रबर्ती भारत के जलीय आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, चरित्रीकरण और सतत उपयोग में दृष्टि नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं। इस राष्ट्रीय पुरस्कार के माध्यम से उनकी मान्यता उनकी वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता और कृषि अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में उनके निरंतर योगदान का प्रमाण है।
आईसीएआर परिवार और मत्स्य पालन व संबद्ध क्षेत्रों के हितधारक इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर डॉ. चक्रबर्ती को हार्दिक बधाई देने के साथ उनके वैज्ञानिक नेतृत्व और राष्ट्रीय सेवा में उनकी खोजके लिए उन्हें निरंतर सफलता की शुभकामनाएं देते हैं।


































