ईंधन की कीमतों में उछाल: मध्य पूर्व के देशों में चल रहे संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमानन टर्बाइन ईंधन की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। इस वैश्विक संकट का सीधा असर भारत के हज तीर्थयात्रियों पर पड़ा है, जिसके कारण विमानन कंपनियों ने हवाई किराये में वृद्धि कर दी है। सरकार के इस कदम से तीर्थयात्रियों के बजट पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और उनकी वित्तीय योजना गड़बड़ा गई है।
सांसद का आधिकारिक विरोध: हवाई किराये में हुई इस औचक बढ़ोतरी के खिलाफ नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। आजाद समाज पार्टी के प्रमुख ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि हज यात्रा 2026 के नियमों और शुल्कों में किए गए इस बदलाव को तुरंत वापस लिया जाए ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।
प्रति यात्री 10,000 रुपये का बोझ: चंद्रशेखर आजाद ने अपने पत्र में डेटा साझा करते हुए बताया कि प्रत्येक हज यात्री पर 10,000 रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार डाला गया है। उन्होंने तर्क दिया कि जब यात्री पहले ही अपना संपूर्ण यात्रा शुल्क जमा कर चुके हों, तो उसके बाद अतिरिक्त मांग करना न्यायसंगत नहीं है। यह उन यात्रियों के लिए अधिक कठिन है जो पहले ही यात्रा के लिए प्रस्थान कर चुके हैं।
कमजोर वर्ग की चिंता: सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि हज यात्रियों का एक बड़ा हिस्सा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों से आता है। इन लोगों ने वर्षों तक पाई-पाई जोड़कर इस पवित्र यात्रा का सपना संजोया था। यात्रा के दौरान अचानक अतिरिक्त शुल्क की मांग करना इन तीर्थयात्रियों के लिए एक गंभीर आर्थिक संकट का कारण बन गया है, जिससे उनकी धार्मिक यात्रा के उत्साह पर भी असर पड़ा है।
सरकार से हस्तक्षेप की अपील: केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र में चंद्रशेखर आजाद ने मांग की है कि बढ़े हुए किराये को सरकार अपने कोष से वहन करे। उन्होंने इस फैसले की उच्च स्तरीय जांच और समीक्षा की आवश्यकता बताई है। सांसद ने स्पष्ट किया कि यदि ईंधन की कीमतें बढ़ी भी हैं, तो उसका खामियाजा उन यात्रियों को नहीं भुगतना चाहिए जिन्होंने अपनी बुकिंग बहुत पहले ही सुनिश्चित कर ली थी।
पारदर्शिता की आवश्यकता: चंद्रशेखर आजाद ने पत्र के माध्यम से भविष्य के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था की मांग की है। उन्होंने कहा कि यात्रा से संबंधित सभी वित्तीय निर्णय यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व ही घोषित होने चाहिए ताकि यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि किरेन रिजिजू इस विषय की गंभीरता को समझेंगे और हज यात्रियों के हित में सकारात्मक निर्णय लेंगे।



































