कागजी शेर का संबोधन: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका की सैन्य शक्ति को चुनौती देते हुए पश्चिम एशिया के अमेरिकी बेस को ‘कागजी शेर’ की संज्ञा दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों में लिखा कि ये ठिकाने सुरक्षा प्रदान करने के नाम पर केवल एक दिखावा हैं। खामेनेई के अनुसार, अमेरिका की यह सैन्य उपस्थिति स्वयं को सुरक्षित रखने में भी संघर्ष कर रही है, जिससे उनकी क्षेत्रीय प्रासंगिकता खत्म हो रही है।
तनावपूर्ण वैश्विक माहौल: खामेनेई का यह तीखा बयान ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते त्रिकोणीय तनाव के बीच आया है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन सुप्रीम लीडर के इस हमले ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने विशेष रूप से उन देशों को आगाह किया है जो सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं, यह कहते हुए कि अमेरिका उनकी रक्षा करने में सक्षम नहीं है।
सभ्यता और अर्थव्यवस्था: फारस की खाड़ी के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए मोजतबा खामेनेई ने इसे अपनी पहचान और सभ्यता का केंद्र बिंदु बताया है। उन्होंने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा करार दिया जो दुनिया भर के बाजारों को जोड़ती है। उनके अनुसार, यह क्षेत्र केवल भौगोलिक जलक्षेत्र नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय देशों के साझा भविष्य और तरक्की का एक शक्तिशाली माध्यम भी है।
अमेरिकी विदाई की भविष्यवाणी: ‘पर्शियन गल्फ डे’ के संदेश में खामेनेई ने भविष्य की एक तस्वीर पेश की जहां यह क्षेत्र अमेरिकी सेना की मौजूदगी से पूरी तरह आजाद होगा। उन्होंने विदेशी शक्तियों के हस्तक्षेप को क्षेत्र की खुशहाली में सबसे बड़ी बाधा माना। सुप्रीम लीडर ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यहाँ केवल स्थानीय देशों का वर्चस्व होगा, जिससे क्षेत्र में नई तरक्की और शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।
सुरक्षा और पश्चिमी हस्तक्षेप: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर अपनी संप्रभुता का दावा करते हुए ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है। खामेनेई ने पश्चिमी देशों की सैन्य उपस्थिति की आलोचना करते हुए इसे अस्थिरता का मुख्य कारण बताया। उनका कहना है कि हालिया घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि बाहरी ताकतें इस संवेदनशील क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही हैं।
पाकिस्तान के जरिए प्रस्ताव: क्षेत्र में शांति की बहाली के लिए ईरान ने एक कूटनीतिक रास्ता अपनाते हुए पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव प्रेषित किया है। इस बात की जानकारी ईरान की आधिकारिक एजेंसी IRNA ने दी है। हालांकि, कूटनीतिक गलियारों में इस प्रस्ताव की सफलता पर संशय बना हुआ है, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे स्वीकार करने के प्रति कोई उत्साह नहीं दिखाया है और इसे खारिज करने के संकेत दिए हैं।



































