ओडिशा में पाठ्यपुस्तकों की गलतियों को लेकर अब राजनीतिक विवाद पूरी तरह से गहरा गया है। मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल ने सरकार के इस फैसले पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पार्टी ने मांग की है कि इन सभी त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए। इसके साथ ही छात्रों को बिना किसी देरी के नई और त्रुटि रहित किताबें उपलब्ध कराने की मांग की गई है। विपक्ष का मानना है कि गलत किताबों से बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है।
प्रवक्ता का दावा बीजू जनता दल के मुख्य प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने सरकार पर कई बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं। मोहंती ने दावा किया कि सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा के छात्रों को ये खराब किताबें बांटी गईं। उनके अनुसार राज्य भर में वितरित की गई इन पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,760 गलतियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने खुद गलतियां मानने के बावजूद उन किताबों को वापस नहीं लेने का अड़ियल रुख अपनाया है। प्रवक्ता ने इस पूरी व्यवस्था को राज्य के शिक्षा तंत्र के लिए एक बहुत बड़ी विफलता करार दिया है।
परीक्षा पर असर विपक्षी दल ने इन किताबों के कारण छात्रों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को लेकर चिंता जताई है। प्रवक्ता मोहंती ने आरोप लगाया कि पाठ्यपुस्तकों में इतनी बड़ी संख्या में गलतियों की वजह से छात्रों में भ्रम पैदा हो सकता है। गलत जानकारी पढ़ने से आगामी परीक्षाओं में छात्रों के समग्र प्रदर्शन पर बहुत ही बुरा असर पड़ सकता है। छात्रों के मन में सही और गलत तथ्यों को लेकर संशय की स्थिति लगातार बनी रहेगी। पार्टी का कहना है कि शिक्षकों द्वारा कक्षा में सुधार करवाना इस बड़ी समस्या का कोई स्थायी और सही समाधान नहीं है।
मुख्यमंत्री का आदेश इस पूरे विवाद और बढ़ते हंगामे के बीच राज्य के मुखिया ने इस मामले में सीधा दखल दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। उनके आदेश के ठीक एक दिन बाद ही सरकार ने इस पूरे प्रकरण की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की जल्द से जल्द पहचान की जाए। सरकार यह जानना चाहती है कि किताबों की छपाई और जांच के दौरान इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हुई।
उच्च स्तरीय समिति मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बाद सरकार ने खामियों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। एक सरकारी अधिसूचना के मुताबिक विकास आयुक्त सह अपर मुख्य सचिव देव रंजन कुमार सिंह इस समिति के अध्यक्ष होंगे। ओडिया भाषा, साहित्य और संस्कृति विभाग के सचिव विजय केतन उपाध्याय को भी इसका सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा उप सचिव सामान्य प्रशासन स्मिता पाणी भी इस महत्वपूर्ण जांच समिति की एक सक्रिय सदस्य होंगी। यह पूरी समिति मिलकर इस बात की गहराई से जांच करेगी कि किताबों में इतनी गलतियां कैसे रह गईं।
रिपोर्ट का समय राज्य सरकार ने इस उच्च स्तरीय समिति के लिए अपना काम पूरा करने की एक सख्त समय सीमा तय की है। इस जांच समिति को मात्र सात दिनों के भीतर अपनी पूरी जांच पड़ताल संपन्न करने को कहा गया है। सात दिन पूरे होने पर समिति को अपनी एक विस्तृत और अंतिम जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे मामले में आगे की सख्त विभागीय और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। तब तक पूरे राज्य की नजरें इस जांच समिति की आने वाली रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर टिकी रहेंगी।





































