उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय समाजवादी पार्टी और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के बीच एक अभूतपूर्व सोशल मीडिया वॉर छिड़ गया है। दोनों ही तरफ के बड़े नेता एक-दूसरे पर बेहद गंभीर और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप लगाने में जुटे हुए हैं। कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा के शीर्ष नेतृत्व को घेरने के लिए अब उनके पुराने शासनकाल के मामलों को उखाड़ना शुरू कर दिया है। राजभर ने साफ कर दिया है कि वे विपक्ष के किसी भी हमले का जवाब पूरी ताकत और सबूतों के साथ देने के लिए तैयार बैठे हैं। इस बयानबाजी से दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में भी भारी तनाव देखा जा रहा है।
डिंपल और रामगोपाल का जिक्र – सुभासपा चीफ ओम प्रकाश राजभर ने अपने ताजा बयान में समाजवादी पार्टी के सबसे रसूखदार सैफई परिवार पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा कि सपा सरकार के समय हुए खनन और गोमती रिवर फ्रंट घोटाले का पैसा कहां इस्तेमाल किया जा रहा है, इसकी पूरी जानकारी उनके पास है। राजभर ने इस वित्तीय गबन के मामले में अखिलेश यादव के साथ-साथ सांसद डिंपल यादव और वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव का नाम भी घसीटा है। उन्होंने दावा किया कि इस गुप्त पैसे को ठिकाने लगाने की हकीकत इन तीनों के अलावा केवल वे ही जानते हैं।
कांपने और फोन मिलाने का तंज – अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पर हमला जारी रखते हुए राजभर ने अखिलेश यादव की मानसिक स्थिति पर भी बड़ा तंज कसा है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सीधे अखिलेश को संबोधित करते हुए पूछा कि आखिर वे इस समय डर से कांप क्यों रहे हैं। राजभर ने दावा किया कि उनके पास मौजूद दस्तावेजों के डर से अखिलेश यादव इस कदर परेशान हैं कि उन्होंने सुबह सोकर उठते ही सीधे बलिया में अपने करीबियों को फोन मिला दिया। राजभर के इस दावे ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में यह कूटनीतिक लड़ाई और ज्यादा आक्रामक रूप ले सकती है।
घोटाले के आरोपों की पृष्ठभूमि – इस पूरे सियासी घमासान की पृष्ठभूमि को देखें तो दोनों नेताओं के बीच पिछले कई दिनों से लगातार विवाद चल रहा है। इस विवाद को हवा तब मिली जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राजभर के पंचायती राज विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने का मुद्दा सोशल मीडिया पर उठाया। अखिलेश यादव ने बकायदा एक विस्तृत पोस्ट लिखकर राजभर की कार्यशैली और उनकी राजनीतिक साख पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद से ही दोनों नेताओं के बीच मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए एक-दूसरे के खिलाफ तीखे बयानों की बौछार की जा रही है।
सीटों के नाम पर अफवाह – पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में राजभर के उस दावे की भी हवा निकालने की कोशिश की थी जिसमें वे अपनी पार्टी के लिए तीस सीटों की मांग कर रहे थे। अखिलेश ने तंज कसते हुए लिखा था कि जो लोग राजभर को एडवांस पैसा दे चुके थे, अब उन्हें समझ आ गया है कि सीटों की बात पूरी तरह अफवाह थी। सपा प्रमुख के अनुसार वर्तमान सरकार में राजभर की हैसियत लगातार कम हो रही है और उन्हें आगामी चुनावों में ले-देकर भी कोई फायदा नहीं होने वाला है क्योंकि जनता उनका असली चेहरा पहचान चुकी है।
काली कमाई पर बड़ा हमला – अखिलेश यादव ने अपने तीखे आरोपों को समाप्त करते हुए राजभर की आर्थिक गतिविधियों पर भी बहुत करारा प्रहार किया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा था कि राजभर के जो बड़े-बड़े बोल आज मीडिया में सुनाई दे रहे हैं, वे केवल उनकी काली कमाई के पैसे के बल पर ही निकल रहे हैं। सपा चीफ ने दावा किया था कि ट्रांसफर-पोस्टिंग और सरकारी ठेकों के नाम पर जो एडवांस लिया गया है, अब वही पैसा इस मंत्री के पतन का कारण बनेगा। इस तरह दोनों ही तरफ से लगे भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को पूरी तरह से गरमा दिया है।
































