Ayodhya के भव्य Ram Mandir में दान और चढ़ावे की कथित चोरी का मामला जांच एजेंसियों के पास पहुंच चुका है। जांच एजेंसियों को शक है कि नकदी के साथ-साथ सोने और चांदी के आभूषणों में भी भारी हेराफेरी की गई है। सूत्रों के मुताबिक, इस गड़बड़ी की आशंका महाकुंभ के समय से ही लगातार जताई जा रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तेरह जून को एक विशेष टीम का गठन किया गया था। इस विशेष टीम ने पंद्रह जून से अपनी औपचारिक जांच की प्रक्रिया को विधिवत रूप से शुरू कर दिया है।
एसआईटी की सघन पूछताछ: इस घटनाक्रम को पूरी तरह सुलझाने के लिए पिछले पांच दिनों से एसआईटी लगातार सघन जांच कर रही है। जांच टीम ने अब तक सौ से भी अधिक लोगों को बुलाकर उनसे मामले में कड़ी पूछताछ की है। मंदिर ट्रस्ट के कामकाज से जुड़े कई लोगों को भी इस पूछताछ के दायरे में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी भरोसा दिया है कि एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी के पास पुख्ता सबूत हैं, तो वे जांच टीम को जरूर सौंपें।
दानपात्रों की व्यवस्था: Ram Mandir परिसर में भक्तों द्वारा दिए जाने वाले दान की निगरानी के लिए एक विशेष व्यवस्था बनाई गई है। पूरे मंदिर परिसर में अलग-अलग स्थानों पर कुल चालीस दानपात्र स्थापित किए गए हैं। इन सभी दानपात्रों में जमा होने वाली पूरी राशि को कड़ी सुरक्षा के बीच काउंटिंग रूम में लाया जाता है। दान की गिनती के लिए चौबीस कर्मचारियों की एक विशेष टीम वहां हमेशा मौजूद रहती है। इस पूरी प्रक्रिया में सेवादारों, बैंक अधिकारियों और ट्रस्ट के कर्मचारियों की भी बराबर भागीदारी होती है।
गिनती करने वाली टीम: काउंटिंग रूम में काम करने वाले चौबीस कर्मचारियों की टीम को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। इस टीम में बारह कर्मचारी सीधे तौर पर मंदिर ट्रस्ट की तरफ से शामिल किए जाते हैं। ट्रस्ट के कर्मचारियों के अलावा, गिनती के काम के लिए बैंक से जुड़े छह विशेष कर्मचारी भी वहां मौजूद रहते हैं। इन सभी के साथ-साथ TCS कंपनी के छह कर्मचारी भी इस पूरी गिनती प्रक्रिया का अहम हिस्सा होते हैं। यह पूरी टीम मिलकर हर दिन मंदिर में आने वाले चढ़ावे का हिसाब रखती है।
सीसीटीवी की निगरानी: दान की गिनती के बाद हर दिन का एक विस्तृत दैनिक रिकॉर्ड बड़ी ही सावधानी से तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान नकदी और सोने-चांदी के गहनों को पूरी तरह से अलग-अलग कर दिया जाता है। नकदी अलग करने के बाद नोटों को व्यवस्थित करके उनके बंडल बनाने का काम किया जाता है। गिनती का यह पूरा काम काउंटिंग रूम में लगे सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी में संपन्न होता है। यह सारी सतर्कता इसलिए बरती जाती है ताकि चढ़ावे में किसी भी प्रकार की कोई भी चूक न हो सके।
बैंक खाते में जमा राशि: सीसीटीवी की निगरानी में दान की गिनती पूरी होने के बाद अंतिम प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है। ट्रस्ट और बैंक के नियुक्त वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में गिनी गई नकदी को सुरक्षित बक्सों में रखा जाता है। बक्सों में सुरक्षित रखने के बाद इस पूरी राशि को मंदिर ट्रस्ट के आधिकारिक बैंक खाते में जमा करा दिया जाता है। सात जून को इस कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चढ़ावे में कथित चोरी की बात सामने आने से विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद Samajwadi Party नेता Akhilesh Yadav ने नौ जून को सवाल उठाकर इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया।





































