सुपौल नगर परिषद क्षेत्र के कृष्णापुरी वार्ड-4 से एक बेहद ही दर्दनाक और सनसनीखेज अपराध सामने आया है। यहां एक छोटी सी नाबालिग बच्ची को अपराधियों ने करीब एक साल तक एक अंधेरे कमरे में कैद करके रखा था। इस खौफनाक घटना ने पूरे इलाके के लोगों को झकझोर कर रख दिया है और हर कोई हैरान है। पुलिस प्रशासन ने भारी मशक्कत के बाद इस मासूम बच्ची को उस कैद से सुरक्षित रिहा करा लिया है। बच्ची की बरामदगी के बाद से इलाके में हड़कंप है और लोग अपराधियों के खिलाफ सख्त गुस्से में हैं।
मां को बेचने का सनसनीखेज खुलासा: रिहा होने के बाद पीड़ित बच्ची ने अपने बयान में कई दिल दहला देने वाले और गंभीर खुलासे किए हैं। बच्ची का आरोप है कि उसे पूरे एक साल तक उस अनजान कमरे में बंद कर लगातार बेरहमी से पीटा गया। पिटाई के साथ-साथ उसने यह भी बताया कि आरोपियों ने उसकी सगी मां को किसी अन्य जगह बेच दिया है। इस खौफनाक बयान को सुनकर मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी और परिजन पूरी तरह से सन्न रह गए। पुलिस अब बच्ची के इन बयानों की सत्यता जांचने के लिए मामले की बहुत ही गहराई से छानबीन कर रही है।
लापता परिवार की अनसुनी कहानी: पीड़ित बच्चियों के पिता मनीष कुमार यादव ने बताया कि उनका यह दुख पिछले साल ही शुरू हो गया था। उन्होंने बताया कि जुलाई 2025 में उनकी पत्नी और दोनों बेटियां एक दिन अचानक घर से लापता हो गई थीं। पिता ने बिना देरी किए स्थानीय पुलिस से अपनी पत्नी और बच्चियों के गायब होने की शिकायत भी की थी। लेकिन पिता का सीधा आरोप है कि पुलिस ने उनकी इस महत्वपूर्ण शिकायत पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। पुलिस की उस वक्त की इसी घोर लापरवाही के कारण आज उनके परिवार को यह भयंकर दिन देखना पड़ा है।
बड़ी बहन के साहस से खुला राज: इस पूरे खौफनाक रहस्य से पर्दा तब उठा जब अगवा की गई बड़ी बहन किसी तरह दरिंदों के चंगुल से भाग निकली। बड़ी बहन अपनी जान जोखिम में डालकर उस कैदखाने से निकलकर सीधा अपने पिता के पास घर पहुंच गई। घर पहुंचकर उसने अपने परिजनों को अपनी छोटी बहन के भी वहां बंधक होने की खौफनाक सच्चाई बता दी। बड़ी बहन की इसी सटीक सूचना के आधार पर मंगलवार 30 जून की शाम परिजनों ने खोजबीन शुरू कर दी। आखिरकार उन्होंने कृष्णापुरी के वार्ड-4 में उस कमरे को ढूंढ निकाला और अपनी छोटी बेटी को बरामद कर लिया।
संदिग्ध महिला से पुलिस की पूछताछ: घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने मामले में तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने इस मामले में संदेह के आधार पर एक महिला को अपनी हिरासत में ले लिया है और पूछताछ कर रही है। पुलिस दोनों बच्चियों के आधिकारिक बयान दर्ज कर रही है ताकि कोर्ट में मजबूत सुबूत पेश किए जा सकें। बच्चियों के बयान और घटनास्थल से मिले सभी सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी रणनीति तय की जाएगी। जांच अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और न्याय दिलाना इस वक्त उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
थानाध्यक्ष की अपील और लोगों का गुस्सा: सदर थानाध्यक्ष रामसेवक रावत ने इस पूरी घटना को लेकर आम जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि जब तक पूरी जांच न हो जाए, तब तक लोग किसी भी नतीजे पर न पहुंचें। उन्होंने साफ किया कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और इसके हर छोटे-बड़े पहलू की गहन जांच जारी है। दूसरी तरफ, इस अमानवीय घटना को लेकर पूरे स्थानीय समाज में भारी गुस्सा और आक्रोश पनप रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर सभी असली दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की जोरदार मांग की है।





































