राजा रघुवंशी हत्याकांड इन दिनों एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। इस बहुचर्चित मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को हाल ही में जमानत मिल गई है। मेघालय हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश जारी करते हुए आरोपी को यह जमानत दी है। हाई कोर्ट के इस अप्रत्याशित फैसले से असंतुष्ट होकर मेघालय सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने इस आदेश को रद्द करवाने के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
गुरुवार को हुआ मेंशन: मेघालय सरकार की तरफ से इस केस को गुरुवार के दिन सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। देश के जाने-माने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में इस मामले को प्रमुखता से मेंशन किया। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय की पीठ के सामने इस हत्याकांड की अत्यधिक गंभीरता को विस्तार से समझाया। सरकार की ओर से दलील दी गई कि ऐसे मामलों में जल्द सुनवाई होना बहुत जरूरी है। उनकी इस प्रभावपूर्ण दलील को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट भी मामले को देखने के लिए राजी हो गया है।
योजनाबद्ध तरीके से हत्या: सुनवाई के दौरान सरकार ने हत्याकांड के पूरे घटनाक्रम की जानकारी भी अदालत को दी। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि यह कोई साधारण हत्या नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। आरोपी महिला अपने पति को विश्वास में लेकर खुद मेघालय के इलाके में ले गई थी। वहां पहुंचकर उसने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया। हत्या करने के बाद सभी आरोपियों ने मृतक के शव को एक अनजान जगह पर फेंक दिया था।
टाइपिंग की गलती बनी आधार: आरोपी महिला को जिस आधार पर जमानत मिली है, उस पर सरकार ने कड़ा ऐतराज जताया है। हाई कोर्ट का तर्क है कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने गिरफ्तारी के पूरे आधार नहीं बताए थे। वहीं मेघालय सरकार ने साफ किया है कि पुलिस के दस्तावेजों में केवल एक धारा में मामूली टाइपिंग मिस्टेक थी। इसी छोटी सी मानवीय गलती को आधार बनाकर आरोपी को जमानत का बड़ा लाभ दे दिया गया। सरकार का तर्क है कि एक टाइपिंग गलती के कारण इतने गंभीर अपराध की अनदेखी नहीं की जा सकती।
आरोपी के भागने का डर: इस हत्याकांड में आरोपी महिला के खिलाफ पहले भी सख्त कानूनी कार्रवाई होती रही है। पूर्व में अदालतों ने दो बार इस महिला की जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया था। तब अदालतों ने यह स्पष्ट माना था कि इस आरोपी के देश से फरार होने की बहुत अधिक आशंका है। इसी आशंका के चलते उसे लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रखा गया था। अब जमानत मिलने के बाद सरकार को फिर से उसके तुरंत फरार होने का बड़ा डर सता रहा है।
तत्काल सुनवाई की मंजूरी: आरोपी के फरार होने की इसी बड़ी आशंका को देखते हुए सरकार ने तत्काल कदम उठाए हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में जल्द से जल्द दखल देने की गुजारिश की। उन्होंने कोर्ट से विशेष अनुरोध किया कि इस मामले की सुनवाई कल यानी शुक्रवार को ही की जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता और सरकार की चिंताओं को बहुत ही ध्यान से सुना। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण याचिका पर शुक्रवार को ही सुनवाई करने की आधिकारिक सहमति दे दी है।





































