केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज चार जुलाई दो हजार छब्बीस को देश की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। मंत्रालय की ओर से एक विस्तृत गजट नोटिफिकेशन जारी करके देश के दुश्मनों पर एक बहुत बड़ी और कड़ी कार्रवाई की गई है। भारत सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए कुल तेईस लोगों को आधिकारिक रूप से देश का दुश्मन और आतंकवादी घोषित कर दिया है। सरकार की तरफ से यह बड़ी दंडात्मक कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के कड़े नियमों के तहत की गई है। इस नोटिफिकेशन के जरिए आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने की दिशा में एक बहुत मजबूत संदेश दिया गया है।
आतंकी गतिविधियों का कच्चा चिट्ठा: भारत सरकार द्वारा घोषित इन आतंकवादियों की सूची में पाकिस्तान में बैठकर साजिश रचने वाले कई चेहरे मौजूद हैं। इस लिस्ट में मुख्य रूप से जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे कुख्यात संगठनों से जुड़े आतंकवादियों के नाम शामिल किए गए हैं। सरकार के अनुसार ये सभी व्यक्ति आतंकी संगठनों में युवाओं की भर्ती करने और उन्हें प्रशिक्षण देने के काम में शामिल रहे हैं। इसके साथ ही ये आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग जुटाने और हथियारों की सीमा पार से आपूर्ति करने का काम भी करते थे। भारतीय सीमा में आतंकियों की घुसपैठ और आतंकी हमलों को अंजाम दिलाने में भी इनकी बहुत ही बड़ी और सक्रिय भूमिका रही है।
सुनजवां आर्मी कैंप हमले के साजिशकर्ता: गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई तेईस आतंकियों की इस सूची में सुनजवां आर्मी कैंप हमले से जुड़े आतंकी भी शामिल हैं। साल दो हजार बाईस के सुनजवां हमले की खौफनाक साजिश रचने वाले मसूद इलियास कश्मीरी को भी आतंकवादी घोषित किया गया है। इसके अलावा इसी हमले से जुड़े एक अन्य खूंखार अपराधी मोहम्मद मुसद्दिक पर भी सरकार ने पूरी तरह से शिकंजा कसा है। मोहम्मद मुसद्दिक पर सुनजवां हमले में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने और पूरे आतंकी ऑपरेशन के समन्वय का गंभीर आरोप लगाया गया है। जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ये दोनों आतंकी भारतीय सेना के खिलाफ रची गई इस बड़ी साजिश के अहम मोहरे माने जाते हैं।
नागरोटा हमले के नेटवर्क का भंडाफोड़: साल दो हजार सोलह में हुए नागरोटा आर्मी कैंप हमले के साजिशकर्ताओं को भी इस नई सूची में जगह दी गई है। मुफ्ती मोहम्मद असगर खान नामक आतंकी इस लिस्ट में है, जिसे घुसपैठ नेटवर्क का प्रमुख और मुख्य संचालक बताया जाता है। इसी नागरोटा हमले से जुड़े एक अन्य आतंकी हाफिज अब्दुल शकूर को भी सरकार ने इस सूची में आतंकवादी घोषित किया है। हाफिज अब्दुल शकूर के ऊपर हमले से पहले स्थानीय नेटवर्क से संपर्क स्थापित करने और आतंकियों की घुसपैठ कराने का आरोप है। इन आतंकियों ने सीमा पार से घुसपैठ करके भारतीय सेना के शिविर पर हमले की पूरी साजिश को अंजाम तक पहुंचाया था।
लॉजिस्टिक और कैंप चलाने वाले नामजद: आतंकियों की मदद करने वाले अब्दुल्ला जेहादी ऊर्फ शाह नवाज या अल हिजामा को भी सरकार ने आतंकी घोषित किया है। अब्दुल्ला जेहादी पर नागरोटा हमले में शामिल आतंकियों की मदद करने और जैश-ए-मोहम्मद के कई कैंप संचालित करने का आरोप है। वहीं, फिरदौस अहमद भट को लश्कर-ए-तैयबा का लॉन्चिंग कमांडर बताते हुए घुसपैठ और लॉजिस्टिक सपोर्ट से सीधा जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त, बिलाल अहमद मीर उर्फ अहमद भाई को भी आतंकवादी घोषित करके इस तेईस लोगों की लिस्ट में शामिल किया गया है। बिलाल पर लश्कर और टीआरएफ के लिए सीमा पार आतंकी गतिविधियों का संचालन तथा हथियारों की सप्लाई कराने का गंभीर आरोप है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और यूएपीए: भारत सरकार ने इन तमाम आतंकी गतिविधियों से जुड़े तेईस लोगों के नाम गजट नोटिफिकेशन में शामिल करके बड़ा प्रहार किया है। इन सभी दुश्मनों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए कानून की अपार शक्तियों का इस्तेमाल करके आतंकवादी घोषित किया गया है। यह यूएपीए कानून असल में भारत का एक बहुत ही सख्त और असरदार आतंकवाद-विरोधी कानून माना जाता है। इस कड़े कानून का प्रमुख मकसद भारत की संप्रभुता और अखंडता के विरुद्ध होने वाली गैरकानूनी तथा आतंकवादी गतिविधियों को रोकना है। इसी कानून के तहत अब इन घोषित आतंकवादियों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।





































