UP राज्य में अचानक आई आंधी, अतिवृष्टि और आकाशीय बिजली ने भारी तबाही मचाते हुए लोगों का बहुत नुकसान किया है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा के कारण प्रदेश भर में बड़ी जनहानि हुई है और खेतों में खड़ी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बड़े संकट के समय संवेदनशीलता दिखाते हुए सभी प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत देने का फैसला किया है। उन्होंने सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत प्रभावित परिवारों के बीच जाकर व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करें। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि इस बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण समय में सरकार आम जनता के साथ पूरी मजबूती से खड़ी हुई है।
राहत आयुक्त की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग: राहत आयुक्त डॉ० हृषिकेश भास्कर यशोद ने आपदा से सख्ती से निपटने के लिए जिलाधिकारियों के साथ एक अहम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की है। उन्होंने खराब मौसम के कारण प्राकृतिक आपदा से हुई विभिन्न प्रकार की क्षतियों की बहुत ही बारीकी से और विस्तारपूर्वक समीक्षा की है। डॉ० यशोद ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्वयं मौके पर जाकर प्रभावित लोगों को हर जरूरी मदद उपलब्ध कराएं। राहत आयुक्त कार्यालय में पहले से स्थापित कंट्रोल रूम के माध्यम से इन राहत कार्यों की चौबीसों घंटे और लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री के आदेशानुसार प्रभावित परिवारों को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सहायता राशि का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित कराया जा रहा है।
करोड़ों चेतावनी संदेश हुए जारी: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा लगातार खराब मौसम की चेतावनी जारी की जा रही थी ताकि होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इसके बाद राहत आयुक्त कार्यालय स्थित कंट्रोल रूम ने सचेत पोर्टल के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का एक बहुत बड़ा काम किया। इस सचेत पोर्टल के जरिए आम जनमानस के मोबाइल नंबरों पर कुल 34 करोड़ 64 लाख रेड एवं ऑरेंज चेतावनी संदेश तत्काल भेजे गए। इसके साथ ही राहत आपदा हेल्प लाइन नम्बर 1070 को भी प्रभावितों की त्वरित मदद के लिए पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है। इस टोल-फ्री हेल्प लाइन पर कॉल आते ही पीड़ित परिवारों को प्रशासन की ओर से तत्काल राहत और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
मृतकों और किसानों को मुआवजा: मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्राकृतिक आपदा में जनहानि होने पर पीड़ित परिजनों को तत्काल चार लाख रुपये की एकमुश्त आर्थिक मदद देने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त जिन किसानों की फसल का 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है, उन्हें भी नियमानुसार उचित सरकारी मुआवजा प्रदान किया जाएगा। वर्षा सिंचित क्षेत्र के लिए 8500 रुपये और सुनिश्चित सिंचित क्षेत्र के लिए 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की विशेष मुआवजा राशि तय की गई है। कृषि वानिकी और बारह माही फसलों के नुकसान पर 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की अधिकतम सहायता राशि सीधे तौर पर किसानों को मिलेगी।
सर्वे कार्य में तेजी लाने के निर्देश: सरकार की ओर से दी जाने वाली यह फसल सहायता केवल उन किसानों को दी जाएगी जिनके पास अधिकतम दो हेक्टेयर तक की कृषि भूमि है। अतिवृष्टि के कारण बहुत से किसानों के खेतों में बारिश के पानी के साथ गाद और मलबा भी भारी मात्रा में आकर जमा हो गया है। इस जमा हुए मलबे को खेतों से हटाने के लिए भी सरकार ने 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक की आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। इस अतिरिक्त सरकारी मदद से किसान अपने खेतों की सफाई कराकर बिना किसी रुकावट के दोबारा से अपनी खेती का काम शुरू कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को नुकसान के सर्वे का काम पूरी पारदर्शिता और तेजी के साथ समय पर पूरा करने के अत्यंत सख्त निर्देश जारी किए हैं।
पशुपालकों के लिए बड़ी राहत: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन के अहम महत्व को देखते हुए सरकार ने पशुपालकों के लिए भी व्यापक सहायता योजना लागू कर दी है। प्राकृतिक आपदा में गाय और भैंस जैसे दुधारू पशुओं की मृत्यु होने पर पशुपालकों को 37,500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। बैल और घोड़े जैसे गैर दुधारू पशुओं के दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से मारे जाने पर सरकार की ओर से 32 हजार रुपये का मुआवजा तय किया गया है। इसके अलावा बछड़ा, गधा, खच्चर और टट्टू के नुकसान पर प्रभावित पशुपालक को 20 हजार रुपये की सहायता राशि तुरंत दी जाएगी। भेड़, बकरी और सुअर जैसे छोटे पशुओं की प्राकृतिक आपदा में मौत होने पर भी 4 हजार रुपये प्रति पशु की दर से आर्थिक मदद मिलेगी।





































