अफ्रीकी महाद्वीप के देश कांगो से इस वक्त बेहद परेशान करने वाली स्वास्थ्य संबंधी खबर सामने आ रही है। यहां के पूर्वी हिस्से में स्थित इतुरी प्रांत में इबोला वायरस का भयानक प्रकोप देखने को मिल रहा है। इस खतरनाक इन्फेक्शन की चपेट में आने से अब तक लगभग 80 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में सामने आ रहे संदिग्ध मामलों ने स्वास्थ्य अधिकारियों को गहरी चिंता में डाल दिया है। दुनिया भर में हंतावायरस को लेकर बढ़ती टेंशन के बीच इस वायरस ने कोहराम मचाया है।
बचाव कार्य तेज: स्थानीय प्रशासन और फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मी इस जानलेवा संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और लोगों की सघन स्क्रीनिंग का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। संदिग्ध रूप से बीमार हर व्यक्ति की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि समय पर इलाज मिल सके। स्वास्थ्य टीमों का मुख्य उद्देश्य इस वायरस को महामारी का रूप लेने से रोकना है। प्रशासन लोगों से इस जांच अभियान में पूरा सहयोग करने की अपील कर रहा है।
वायरस का इतिहास: कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय ने लैब टेस्ट के बाद इस वायरस के बारे में विस्तृत विवरण पेश किया है। संदिग्ध मरीजों के सैंपलों की गहन जांच में बुंदीबुग्यो वायरस की पुष्टि हुई है जो कि काफी खतरनाक है। यह बुंदीबुग्यो वायरस वास्तव में इबोला का एक अत्यंत दुर्लभ वैरिएंट है जिसके बारे में विशेषज्ञ शोध कर रहे हैं। कांगो देश के लिए इबोला वायरस की यह त्रासदी कोई नई बात नहीं है। आंकड़ों के अनुसार साल 1976 के बाद से कांगो में यह इबोला वायरस का 17वां बड़ा प्रकोप दर्ज किया गया है।
जनता में खौफ: इतुरी प्रांत की प्रांतीय राजधानी बुनिया में इस वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण स्थितियां बेकाबू होती दिख रही हैं। बुनिया के एक स्थानीय निवासी जीन मार्क असिम्वे ने बताया कि आम लोगों के बीच इस समय भयंकर डर का माहौल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इस घातक वायरल इन्फेक्शन को लेकर चारों तरफ अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। हालात इतने बदतर हैं कि रोजाना कई घरों से अपनों को खोने की खबरें आ रही हैं। अब तो हालत यह है कि एक ही दिन में दो-तीन अंतिम संस्कार देखना सामान्य बात हो गई है।
नर्स से फैला वायरस: कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल-रोजर काम्बा ने संक्रमण फैलने की कड़ियों को जोड़ते हुए अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस पूरे इन्फेक्शन का पहला संदिग्ध मामला चिकित्सा सेवा से जुड़ी एक नर्स से संबंधित था। इस नर्स की मौत इसी साल अप्रैल के आखिर में बुनिया के एक स्थानीय हॉस्पिटल में हुई थी। माना जा रहा है कि वहीं से यह संक्रमण धीरे-धीरे आम आबादी में फैलना शुरू हुआ। इस घटना के बाद से ही स्वास्थ्य विभाग अस्पताल के संपर्क में आए लोगों की निगरानी कर रहा है।
फैलने के कारण: इबोला वायरस से सुरक्षित रहने के लिए इसके फैलने के तरीकों और लक्षणों को समझना बेहद जरूरी है। यह वायरस किसी भी संक्रमित मरीज की उल्टी, खून, पसीने या अन्य शारीरिक द्रव्यों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इसके लक्षणों में मरीज को तेज बुखार, कमजोरी, सिरदर्द, मांसपेशियों में असहनीय दर्द, दस्त और लगातार उल्टी होती है। कुछ अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में मरीज के शरीर के अंगों से अंदरूनी या बाहरी रक्तस्राव भी होने लगता है। स्थानीय सरकार ने सभी को अलर्ट रहने और संक्रमितों से उचित दूरी बनाए रखने को कहा है।





































