विषाक्त प्रसाद का मामला: उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से फूड प्वाइजनिंग का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला आधिकारिक तौर पर सामने आया है, जहां एक कथा का प्रसाद खाने से 62 लोग बीमार हो गए हैं। आयोजित धार्मिक कथा में शामिल होने आए ग्रामीणों को पूजा संपन्न होने के बाद पंचामृत और पंजीरी का प्रसाद वितरित किया गया था, जिसे खाने के बाद लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ा। प्रसाद ग्रहण करने के कुछ ही समय बाद वहां उपस्थित अधिकांश लोगों को अचानक गंभीर रूप से उल्टी, दस्त व पेट दर्द की तीव्र शिकायतें शुरू हो गईं। इस सामूहिक बीमारी की खबर मिलते ही गांव सहित पूरे ठठिया थाना क्षेत्र में अचानक अफरा-तफरी और चिंता का माहौल पूरी तरह से व्याप्त हो गया। सभी पीड़ितों को तुरंत एंबुलेंस और अन्य साधनों की मदद से नजदीकी चिकित्सालय पहुंचाया गया, जहां सभी का उपचार पूरी मुस्तैदी से किया जा रहा है।
शुक्रवार रात की घटना: स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त विवरण के अनुसार, यह पूरी दुखद घटना कन्नौज के ठठिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्थित सिमुआपुर गांव में घटित हुई है। सिमुआपुर गांव के निवासी मुन्ना लाल कश्यप के पैतृक घर में शुक्रवार की रात को सत्यनारायण कथा का एक विशेष पारिवारिक एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कथा के विधि-विधान से समापन होने के बाद वहां जुटे सभी भक्तों को प्रसाद के रूप में पंचामृत और पंजीरी बांटी गई थी। इस पंचामृत और पंजीरी के प्रसाद को खाने के बाद रात के समय ही अचानक एक-एक करके इन सभी लोगों की तबीयत काफी ज्यादा खराब होने लगी थी। परिजनों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए बिना समय गंवाए रात में ही मरीजों को लेकर अस्पताल की तरफ दौड़ लगा दी।
अस्पताल में मची अफरा-तफरी: धार्मिक कथा का कथित तौर पर विषाक्त प्रसाद खाने के बाद लोगों को थोड़ी ही देर में पेट दर्द, चक्कर आने, घबराहट और लगातार उल्टी की गंभीर शिकायतें होने लगी थीं। शुरुआत में मरीजों की बिगड़ती हालत को देखकर उनके परिजन उन्हें तुरंत पास ही के एक निजी चिकित्सक के पास ले गए ताकि प्राथमिक आराम मिल सके। लेकिन हालत और बिगड़ने पर निजी वाहनों तथा सरकारी एंबुलेंस की मदद से सभी पीड़ितों को आनन-फानन में कन्नौज के मुख्य जिला अस्पताल ले जाया गया। इस बड़ी घटना के कारण पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और अस्पताल में मरीजों के परिजनों की भारी भीड़ जमा हो गई। डॉक्टरों की आपातकालीन टीम ने बिना कोई समय गंवाए सभी बीमार ग्रामीणों को तुरंत भर्ती कर आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया शुरू कर दी।
तिर्वा मेडिकल कॉलेज रेफर: कन्नौज जिला अस्पताल की आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर आकांक्षा ने बताया कि शुक्रवार की रात 10:30 बजे तक अस्पताल में कुल 62 फूड प्वाइजनिंग के मरीज इलाज के लिए पहुंच चुके थे। उन्होंने आगे बताया कि इन कुल मरीजों में से 14 मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति अत्यधिक चिंताजनक और गंभीर होने के कारण उन्हें तुरंत तिर्वा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में भर्ती बाकी सभी सामान्य मरीजों को आवश्यक ड्रिप चढ़ाकर और उचित एंटीबायोटिक दवाएं देकर उनका इलाज सुचारू रूप से किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अनुसार, वर्तमान में उपचार ले रहे इन अधिकतर मरीजों की शारीरिक स्थिति पूरी तरह से स्थिर और खतरे से बाहर बनी हुई है।
अधिकारियों द्वारा निरीक्षण: सिमुआपुर गांव में हुए इस सामूहिक फूड प्वाइजनिंग की घटना की जानकारी मिलते ही जिले के जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे। उनके साथ मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर स्वदेश गुप्ता और अपर पुलिस अधीक्षक अजय कुमार भी इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत जिला अस्पताल के वार्डों में पहुंचे। इन सभी उच्च अधिकारियों ने अस्पताल के बेड पर भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से मिलकर उनकी स्थिति का जायजा लिया और ढांढस बंधाया। जिलाधिकारी ने अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को सभी पीड़ितों को मुफ्त और बेहतर इलाज प्रदान करने के कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
अतिरिक्त डॉक्टर तैनात: जिला प्रशासन ने आपातकालीन स्थिति को देखते हुए अस्पताल परिसर में तुरंत अतिरिक्त चिकित्सकों और अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों की ड्यूटी विशेष रूप से लगा दी है। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन ने मुन्ना लाल कश्यप के घर पर बने इस प्रसाद के विषाक्त होने के पूरे मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीमें इस बात का पता लगा रही हैं कि पंचामृत और पंजीरी बनाने में उपयोग की गई सामग्री में कोई खराबी तो नहीं थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।





































