ईरान ने हाल ही में अमेरिका के उन सभी दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं जिनमें द्विपक्षीय बातचीत की उम्मीद जताई गई थी। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से उन तमाम मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है जिनमें कतर में बैठक होने की बात कही गई थी। यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि कतर की राजधानी दोहा में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात के लिए है। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी फार्स न्यूज के अनुसार विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगई ने इस बात का पूरी तरह से खंडन किया है। उन्होंने अपनी प्रेस वार्ता में कड़े शब्दों में कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिकी पक्ष के साथ किसी भी स्तर पर हमारी कोई बातचीत तय नहीं है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का दौरा ईरान के इस स्पष्ट इनकार के बावजूद व्हाइट हाउस अपनी तरफ से बातचीत होने का लगातार दावा कर रहा है। व्हाइट हाउस के अनुसार अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जारेड कुशनर मंगलवार को दोहा के लिए उड़ान भरेंगे। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ये दोनों शीर्ष अधिकारी वहां जाकर सीधे तौर पर ईरान के साथ महत्वपूर्ण बातचीत करेंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने फॉक्स न्यूज को दिए गए एक खास इंटरव्यू में इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया तनाव के बाद यह प्रस्तावित बैठक खुद ईरान के ही अनुरोध पर आयोजित की जा रही है।
ईरानी विदेश मंत्रालय का जवाब अमेरिकी दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए इस्माइल बगई ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधियों की कतर यात्रा का ईरानी दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के अधिकारियों की एक ही समय में कतर में मौजूदगी महज एक संयोग हो सकती है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का अपना एक अलग और पूर्व निर्धारित एजेंडा है जिसे पूरा करने के लिए वे कतर पहुंचे हैं। यह दल मुख्य रूप से दोनों देशों के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन के प्रावधानों की कड़ी समीक्षा करने के लिए गया है। प्रतिनिधिमंडल का विशेष ध्यान अनुच्छेद-11 के क्रियान्वयन को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने की रणनीति पर केंद्रित रहेगा।
एमओयू के प्रावधानों पर जोर प्रवक्ता ने आगे स्पष्ट किया कि फिलहाल अंतिम और व्यापक समझौते को लेकर किसी भी तरह की औपचारिक बातचीत शुरू नहीं की गई है। उन्होंने याद दिलाया कि 14 सूत्रीय एमओयू के अनुच्छेद-13 में अंतिम समझौते की बातचीत के लिए स्पष्ट शर्तें पहले से ही निर्धारित हैं। इन शर्तों के मुताबिक बातचीत तभी शुरू हो सकती है जब अनुच्छेद 1, 4, 5, 10 और 11 के तहत तय किए गए उपायों का क्रियान्वयन शुरू हो। इन उपायों का सिर्फ शुरू होना ही काफी नहीं है, बल्कि इनका निर्बाध रूप से लगातार जारी रहना भी उतना ही आवश्यक है। विदेश मंत्रालय के अनुसार ये सभी प्रावधान दोनों पक्षों के बीच आपसी विश्वास बहाली के लिए सबसे बुनियादी और जरूरी कदम हैं।
अनुच्छेद ग्यारह की प्रमुखता समझौते के तहत ईरान ने अपनी रुकी हुई संपत्तियों की वापसी को अपनी सबसे बड़ी और प्रमुख शर्त बनाया है। बगई ने बताया कि अनुच्छेद-11 के तहत अमेरिका को ईरान की फ्रीज की गई या प्रतिबंधित संपत्तियों को बिना किसी देरी के उपलब्ध कराना होगा। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए दोनों पक्षों की आपसी सहमति से तय की गई एक पारदर्शी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। इसके साथ ही अमेरिका को आवश्यक वित्तीय लाइसेंस और धन हस्तांतरण से जुड़ी अन्य सभी अनुमतियां भी तुरंत जारी करनी होंगी। इन अनुमतियों के मिलने के बाद ही यह सुनिश्चित हो सकेगा कि ईरान अपने फंसे हुए पैसे का स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल कर सकता है।
अंतिम समझौते का इंतजार ईरान ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि वह वर्तमान में अंतिम समझौते के लिए औपचारिक बातचीत के चरण में प्रवेश नहीं कर पाया है। जब तक शुरुआती एमओयू की सभी शर्तें अमेरिका द्वारा पूरी ईमानदारी से लागू नहीं की जातीं, तब तक कोई बड़ी प्रगति संभव नहीं है। ईरान का साफ रुख है कि अनुच्छेद-13 के मुताबिक पहले 5 प्रमुख प्रावधानों का क्रियान्वयन पूरी तरह से शुरू होना चाहिए। इन प्रावधानों के लागू होने और उनके लगातार जारी रहने के बाद ही विश्वास का वह माहौल बनेगा जो आगे की बातचीत के लिए जरूरी है। इसी विश्वास बहाली के बाद ही अंतिम और व्यापक समझौते पर किसी भी प्रकार की सार्थक बातचीत आगे बढ़ सकेगी।





































