भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार की शाम को केंद्रीय नौकरशाही के साथ एक बड़ी बैठक करने वाले हैं। यह उच्च स्तरीय बैठक शाम करीब 4 बजे बुलाई गई है, जिसमें कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत सरकार के सभी केंद्रीय मंत्रालयों के सचिव अनिवार्य रूप से शामिल होंगे। यह विशेष आयोजन प्रधानमंत्री के सेशेल्स दौरे से स्वदेश लौटने के तुरंत बाद किया जा रहा है। सरकार के शीर्ष स्तर पर हो रही इस चर्चा को नीतिगत दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।
सुधारों पर रहेगा विशेष जोर इस बैठक का मुख्य एजेंडा सरकार द्वारा किए जा रहे प्रमुख सुधारों की विस्तृत रूप से समीक्षा करना है। इस दौरान ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक और जरूरी कदमों पर विचार किया जाएगा। देश के आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ के मुद्दों पर भी चर्चा होगी। आत्मनिर्भर भारत अभियान को देश में और अधिक मजबूत करने के विभिन्न तरीकों पर भी मंथन किया जाएगा। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि इन सभी क्षेत्रों में तेजी से और प्रभावी तरीके से काम हो।
विभागों की प्रगति की समीक्षा इस दौरान सभी सचिव प्रधानमंत्री को अपने-अपने विभागों की वर्तमान प्रगति की जानकारी देंगे। वे उन सभी नई योजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे जो उनके मंत्रालयों द्वारा वर्तमान में चलाई जा रही हैं। सरकार के कामकाज को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के नए तरीकों पर भी विशेष रूप से जोर दिया जाएगा। नीतिगत सुधारों को बिना किसी बड़ी बाधा के आगे बढ़ाने के लिए नई रणनीतियों पर बातचीत होने की पूरी संभावना है। इसके अलावा मौजूदा प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आम लोगों के लिए आसान और सरल करने पर भी चर्चा की जाएगी।
अधिकारियों का विस्तृत रोडमैप मीटिंग में अधिकारियों से अपने विभागों के कामकाज का पूरा लेखा-जोखा ईमानदारी से पेश करने की उम्मीद है। वे विस्तार से बताएंगे कि उनके मंत्रालयों ने हाल के दिनों में क्या-क्या नए और बड़े सुधार लागू किए हैं। अधिकारी भविष्य में लागू की जाने वाली महत्वपूर्ण योजनाओं का एक स्पष्ट और सटीक रोडमैप भी सामने रखेंगे। इस रोडमैप के आधार पर प्रधानमंत्री भविष्य की नीतियों के लिए अधिकारियों को अपना उचित मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। योजनाओं को सही समय पर सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए विभागों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
लगातार हो रही हैं ऐसी बैठकें यह बात गौर करने वाली है कि मात्र दो महीने के भीतर यह दूसरी बार है जब ऐसी बड़ी बैठक हो रही है। इससे ठीक पहले 21 मई को प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद और सचिवों की महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक ली थी। शीर्ष नौकरशाही के साथ इतनी जल्दी दूसरी बैठक होना सरकार की कार्यशैली और सक्रियता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। पिछली बैठक में प्रधानमंत्री ने कम समय में कामकाज की अधिकतम उत्पादकता बढ़ाने पर अपना विशेष जोर दिया था। उन्होंने शासन व्यवस्था को पहले से ज्यादा सरल, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया था।
कमजोर प्रदर्शन पर मिली थी चेतावनी गौरतलब है कि 21 मई की पिछली समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री ने कई सख्त और अहम निर्देश भी जारी किए थे। जिन मंत्रालयों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर पाया गया था, उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार करने को कहा गया था। ऐसे सभी कमजोर मंत्रालयों को भविष्य में बेहतर और सटीक परिणाम देने के लिए सख्त निर्देश दिए गए थे। प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा था कि ‘विकसित भारत 2047’ सिर्फ एक साधारण नारा नहीं बल्कि एक मजबूत संकल्प है। उन्होंने मंत्रालयों को संरचनात्मक सुधारों पर ज्यादा ध्यान देने और पूरी तरह से जनता के हित में काम करने की सलाह दी थी।





































