ईरान के दिवंगत नेता के सम्मान में हाल ही में एक बहुत ही भावुक शोक सभा का आयोजन किया गया। ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा जारी किए गए वीडियो में तेहरान स्थित खामेनेई परिसर की हुसैनिया का दृश्य दिखाया गया है। इस पवित्र और महत्वपूर्ण स्थान के पास आयोजित इस छोटे शोक समारोह में बहुत से करीबी लोग शामिल हुए। समारोह के दौरान अली खामेनेई का पार्थिव शरीर एक बड़े ताबूत में मंच पर पूरे सम्मान के साथ रखा गया था। वहां मौजूद सभी लोग अपने दिवंगत नेता को अंतिम विदाई देने के लिए बेहद दुखी और भावुक नजर आ रहे थे।
ताबूत की खास सजावट: अली खामेनेई के ताबूत और उसके आस-पास के स्थान को बहुत ही विशेष तरीके से सजाया गया था। अंतिम दर्शन के लिए रखे गए इस ताबूत के बिल्कुल सामने लाल रंग के ताजे ट्यूलिप के फूल सजाए गए थे। इसके साथ ही उस कक्ष की छत से सजावट के तौर पर कागज की खूबसूरत तितलियां भी लटकाई गई थीं। यह सजावट ईरान की पारंपरिक शोक संवेदनाओं और शहादत के गहरे सम्मान को बहुत स्पष्ट रूप से दर्शा रही थी। इस पूरी व्यवस्था को देखकर वहां मौजूद हर एक व्यक्ति की आंखें अपने नेता की याद में पूरी तरह से नम हो गईं।
शोक मनाने वालों की भीड़: इस महत्वपूर्ण शोक समारोह में शामिल होने वाले लोगों का भी एक विशेष और दर्दनाक इतिहास रहा है। सरकारी मीडिया के मुताबिक इस आयोजन में पूरी तरह से काले कपड़े पहने हुए कई शोकाकुल लोग शामिल हुए थे। इनमें वर्ष दो हजार पच्चीस के बारह दिन चले युद्ध में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के सदस्य मौजूद थे। इसके अलावा हालिया ईरान युद्ध में अपनों को खोने वाले पीड़ित परिवारों के लोग भी इस शोक सभा का हिस्सा बने। इन सभी लोगों ने एक साथ मिलकर अपने महान नेता और अपने खोए हुए परिजनों की शहादत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
धार्मिक झंडे का महत्व: समारोह में रखा गया अली खामेनेई का ताबूत एक बहुत ही पवित्र और ऐतिहासिक झंडे से ढका हुआ था। बाद में जारी की गई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि ताबूत पर एक लाल रंग का पवित्र झंडा रखा गया था। इस खास लाल झंडे पर बड़े और सफेद अक्षरों में स्पष्ट रूप से अरबी भाषा में ‘या हुसैन’ लिखा हुआ था। शिया समुदाय में यह वाक्य पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की महान शहादत की याद में इस्तेमाल किया जाता है। यह झंडा पहले इराक के करबला स्थित इमाम हुसैन की सुनहरे गुंबद वाली मशहूर दरगाह पर शान से फहरा रहा था।
श्रद्धांजलि की अनोखी परंपरा: शोक सभा के दौरान लोगों ने अपने नेता के प्रति असीम श्रद्धा व्यक्त करने के लिए पारंपरिक तरीकों का पालन किया। श्रद्धांजलि देने के दौरान वहां मौजूद लोगों ने अपने स्कार्फ और अन्य छोटे सामान ताबूत की ओर उछालने शुरू किए। इसके बाद वहां खड़े सहयोगियों ने उन उछाले गए सामानों को पकड़कर पूरी श्रद्धा के साथ ताबूत से स्पर्श कराया। ईरान की संस्कृति में इस विशेष प्रक्रिया को श्रद्धा व्यक्त करने की एक बहुत ही पारंपरिक और पवित्र धार्मिक परंपरा माना जाता है। लोगों का मानना है कि इस तरह ताबूत का स्पर्श पाने से उन वस्तुओं में भी पवित्रता और महानता का वास हो जाता है।
अंतिम संस्कार का कार्यक्रम: आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार आगामी शनिवार से अली खामेनेई का कई दिनों तक चलने वाला अंतिम संस्कार शुरू किया जाएगा। इस लंबी प्रक्रिया के दौरान उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए ईरान के विभिन्न प्रमुख शहरों में ले जाया जाएगा। इसके साथ ही उनके शव को दर्शन और सम्मान के लिए पड़ोसी देश इराक भी ले जाने की पूरी योजना बनाई गई है। इस विशाल अंतिम संस्कार कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत तेहरान शहर के प्रसिद्ध ग्रैंड मोसल्ला स्थान से की जाएगी। इस बड़े आयोजन के कारण प्रशासन ने कई सड़कों को बंद करने और सामान्य गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ने की संभावना जताई है।





































