प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चिट्ठी में सभी अमरनाथ यात्रियों से पांच महत्वपूर्ण संकल्प लेने का विशेष आग्रह किया है। उनका पहला और सबसे अहम संकल्प यात्रा के दौरान साफ-सफाई और स्वच्छता के नियमों का पालन करने से जुड़ा है। उन्होंने सभी यात्रियों से अपील की है कि वे पूरे यात्रा मार्ग में स्वच्छता बनाए रखने में अपना पूरा योगदान दें। पहाड़ों और पवित्र रास्तों पर गंदगी न फैलाना भगवान शिव और प्रकृति के प्रति हमारी सच्ची और बड़ी श्रद्धा होगी। यह कदम उस पूरे दुर्गम इलाके के पर्यावरण को सुरक्षित और स्वच्छ रखने में बहुत ज्यादा मददगार साबित होगा।
सुरक्षा नियमों का पालन: प्रधानमंत्री का दूसरा संकल्प यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालुओं की अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा और हिफाजत को लेकर है। उन्होंने प्रशासन के सभी आदेशों, यातायात के नियमों और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करने को कहा है। पहाड़ों पर यात्रा के दौरान बारिश की वजह से होने वाली फिसलन और कड़ाके की ठंड का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है। सुरक्षित यात्रा ही सफल यात्रा का सबसे बड़ा आधार है, इसलिए नियमों की अनदेखी बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए। यात्रियों को अपनी सेहत और सुरक्षा के प्रति हमेशा सतर्क रहने के लिए विशेष तौर पर प्रेरित और जागरूक किया गया है।
वोकल फॉर लोकल का संदेश: देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री ने तीसरा संकल्प ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना पर केंद्रित किया है। उन्होंने आग्रह किया है कि यात्री अपने कुल यात्रा खर्च का कम से कम दस प्रतिशत स्थानीय उत्पादों को खरीदने में जरूर उपयोग करें। इस एक छोटे से कदम से जम्मू-कश्मीर के हजारों परिवारों और वहां के स्थानीय युवाओं की आजीविका को बहुत बड़ा बल मिलेगा। वहां के छोटे कारीगरों और दुकानदारों को सीधा फायदा पहुंचने से पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में भी काफी सुधार होगा। यह पर्यटन के माध्यम से स्थानीय लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का एक बहुत ही शानदार और कारगर प्रयास है।
पर्यावरण संरक्षण का संकल्प: पर्यावरण को हरा-भरा रखने के लिए प्रधानमंत्री ने चौथा संकल्प पेड़ लगाने और प्रकृति को बचाने से जोड़ा है। उन्होंने बाबा अमरनाथ यात्रा के समापन दिवस अर्थात रक्षाबंधन के अवसर पर एक बहुत ही खास शुरुआत करने को कहा है। उन्होंने सभी यात्रियों से अपने भाई या बहन को एक नया पौधा भेंट करने की बहुत ही सुंदर अपील की है। इसके माध्यम से देशभर में चलाए जा रहे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को और भी ज्यादा गति और ताकत मिलेगी। यह संकल्प प्रकृति के प्रति हमारे कर्तव्य और पर्यावरण संरक्षण की हमारी जिम्मेदारी को बहुत गहराई से दर्शाता है।
राष्ट्र निर्माण और कर्तव्य: प्रधानमंत्री का पांचवां और अंतिम संकल्प देश की प्रगति और राष्ट्र निर्माण के महान कर्तव्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी यात्रियों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ पूरे वर्ष अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से पालन करने को कहा है। एक विकसित भारत के निर्माण में अपना सक्रिय और महत्वपूर्ण योगदान देना हर एक देशवासी का परम कर्तव्य होना चाहिए। यात्रा से मिलने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा को देश के विकास और समाज की भलाई के कामों में लगाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि बाबा बर्फानी हम सभी को अपने कर्तव्यों के प्रति और भी अधिक समर्पित और जिम्मेदार बनाएंगे।
आध्यात्मिक ऊर्जा की कामना: पत्र के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी यात्रियों की सुरक्षित और मंगलमय यात्रा की अपनी तरफ से हार्दिक कामना की है। उन्होंने कहा कि यह दर्शन यात्रा हमारी सनातन धर्म की आस्था और भारत की सांस्कृतिक एकता का एक बहुत बड़ा महोत्सव है। उनकी यह कामना है कि बाबा अमरनाथ की असीम कृपा हम सभी पर इसी तरह हमेशा के लिए बनी रहे। यह यात्रा भक्तों के जीवन में एक नई ऊर्जा, नई चेतना और एक नई आध्यात्मिक शक्ति का निरंतर संचार करती रहे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हम सभी देशवासी मिलकर एक दिन विकसित भारत के बड़े और महान संकल्प को जरूर सिद्ध करेंगे।





































