मध्य प्रदेश की आगर मालवा पुलिस ने कुछ समय पहले ड्रग्स के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया था। पुलिस विभाग ने तब अपनी इस कार्रवाई को एक बहुत ही शानदार कामयाबी के रूप में पेश किया था। लेकिन अब इसी ड्रग्स रैकेट के भांडाफोड़ को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में न्यायालय के कड़े हस्तक्षेप के बाद पूरी कहानी ने एक बहुत ही अलग मोड़ ले लिया है। अब खुद खाकी वर्दी पहनने वाले पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी इस मामले में पूरी तरह से संदिग्ध हो गई है।
राजस्थान के झालावाड़ में मामला दर्ज यह विवादित छापेमारी राजस्थान राज्य के झालावाड़ जिले के डग पुलिस स्टेशन इलाके में की गई थी। इलाके में आने वाले घटाखेड़ी गांव में जनवरी दो हजार छब्बीस में पुलिस ने यह बड़ी रेड मारी थी। इसी रेड की प्रक्रिया और कानूनी वैधता पर न्यायालय ने कुछ समय पहले गंभीर सवालिया निशान लगाए हैं। चौमहला कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तेरह जून को एक सख्त आदेश जारी किया था। इसी आदेश के अनुपालन में सोमवार को डग पुलिस स्टेशन में यह नया आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है।
सौ लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर अदालत के सख्त निर्देश के बाद पुलिस ने इस मामले में एक विस्तृत एफआईआर दर्ज की है। इस एफआईआर में लगभग सौ से अधिक ज्ञात और अज्ञात लोगों को सीधे तौर पर आरोपी बनाया गया है। हैरानी की बात यह है कि इन आरोपियों की लंबी सूची में मध्य प्रदेश पुलिस के कई अधिकारी भी शामिल हैं। एफआईआर में मध्य प्रदेश के दो स्टेशन हाउस ऑफिसर का नाम भी स्पष्ट रूप से लिखा गया है। इस बड़ी कानूनी कार्रवाई से पुलिस महकमे में जबरदस्त हड़कंप और खलबली मच गई है।
एफआईआर में कई पुलिस अधिकारियों के नाम इस एफआईआर में जिन पुलिस वालों के नाम शामिल हैं, उनकी पूरी सूची जांच एजेंसियों को सौंप दी गई है। इनमें आगर कोतवाली के एसएचओ शशि उपाध्याय और बड़ोद के एसएचओ रूप सिंह का नाम मुख्य रूप से शामिल है। इसके अलावा सब इंस्पेक्टर राखी गुर्जर और असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर अजय जाट को भी इस मामले में नामजद किया गया है। पुलिस कॉन्स्टेबल राहुल विश्वकर्मा और कॉन्स्टेबल शुभम सहित कई अन्य लोगों के नाम भी इस रिपोर्ट में दर्ज किए गए हैं। इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर इस अवैध छापेमारी से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
जनवरी की रेड में हुई थी गड़बड़ी घटाखेड़ी गांव में जनवरी दो हजार छब्बीस में हुई उस रेड के दौरान नियमों की अनदेखी की बात सामने आई है। पुलिस ने अपनी कामयाबी दिखाने के चक्कर में कथित तौर पर कई आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था। कोर्ट में जब इस पूरे मामले की सुनवाई हुई तो पुलिस की कई भारी कमियां और खामियां उजागर हो गईं। इसी वजह से न्यायालय ने पुलिस की उस पूरी कार्रवाई को ही कटघरे में खड़ा करते हुए सख्त निर्देश दिए। यह मामला अब कानून के रखवालों के ही कटघरे में खड़े होने का एक बहुत बड़ा उदाहरण बन चुका है।
अन्य आरोपियों की भी होगी जांच इस एफआईआर के दर्ज होने के बाद अब पूरे मामले की एक नई सिरे से निष्पक्ष जांच शुरू की जाएगी। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि जांच के दौरान हर छोटी-बड़ी बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इस जांच प्रक्रिया में अन्य अज्ञात आरोपियों और संदिग्ध लोगों की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जाएगी। जो भी व्यक्ति या अधिकारी इस मामले में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल इस मामले की जांच का इंतजार है, जिसके बाद ही सच्चाई पूरी तरह से देश के सामने आ पाएगी।





































