America के उपराष्ट्रपति JD Vance ने पिछले महीने कुछ बेहद ही सख्त टिप्पणियां की थीं। उन्होंने The New York Times को दिए इंटरव्यू और White House की विशेष ब्रीफिंग के दौरान अपनी बातें दुनिया के सामने रखी थीं। उनकी इन टिप्पणियों के बाद ही दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट की अटकलें तेज हो गई थीं। उन्होंने स्पष्ट रूप से इजरायल को अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता का सम्मान करने को कहा था। उपराष्ट्रपति का यह बयान कूटनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बन गया था।
सहयोगी पर हमले से बचें इजरायली नेताओं द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति की आलोचना करने पर उपराष्ट्रपति ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि इजरायल को अपने इकलौते शक्तिशाली सहयोगी देश की आलोचना करने से बचना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अगर वह इजरायली सरकार की कैबिनेट का हिस्सा होते तो ऐसा बिल्कुल नहीं करते। उनका मानना था कि संकट के समय दुनिया में बचे एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी पर हमला करना कोई समझदारी नहीं है। इसी बयान का अब इजरायली प्रधानमंत्री ने खुलकर और मजबूती के साथ विरोध किया है।
डोनाल्ड ट्रंप का किया बचाव अपने बयानों के दौरान उपराष्ट्रपति ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का भी जोरदार बचाव किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनके संदेश का सबसे पहला और अहम हिस्सा Donald Trump पर ही आधारित है। उन्होंने दावा किया कि Donald Trump दुनिया के एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं जो वर्तमान में इजरायल के प्रति सहानुभूति रखते हैं। इस तरह उन्होंने इजरायली कैबिनेट को यह याद दिलाने की कोशिश की कि अमेरिका का नेतृत्व उनके लिए कितना अहम है। यह टिप्पणी उन खबरों के जवाब में आई थी जिनमें इजरायली नेता अमेरिका-ईरान समझौते से नाखुश नजर आ रहे थे।
सुरक्षा रणनीति पर उठाए सवाल उपराष्ट्रपति ने इजरायल की दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति पर भी सीधे तौर पर सवालिया निशान लगा दिए थे। उन्होंने इजरायली नेताओं से पूछा था कि आखिर उनकी सुरक्षा को लेकर उनका सटीक और अंतिम प्रस्ताव क्या है। उन्होंने याद दिलाया कि इजरायल मात्र नब्बे लाख लोगों की आबादी वाला एक छोटा सा देश है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हर एक समस्या का समाधान सिर्फ लोगों को मारकर बिल्कुल नहीं निकाला जा सकता है। यह एक बहुत ही गंभीर चेतावनी थी जिसे इजरायली नेतृत्व ने कतई हल्के में नहीं लिया।
ईरान समझौते पर नाराजगी America और Iran के बीच हो रहे समझौते को लेकर इजरायली नेतृत्व लंबे समय से नाखुश चल रहा है। इस शांति समझौते की वजह से ही इजरायली नेताओं ने अमेरिका की सार्वजनिक तौर पर आलोचना शुरू कर दी थी। इन आलोचनाओं के कारण ही दोनों देशों के ऐतिहासिक रूप से मजबूत संबंधों में दरार दिखने लगी थी। उपराष्ट्रपति की टिप्पणियां इसी बढ़ती हुई कड़वाहट और तनाव को कम करने के इरादे से सामने आई थीं। हालांकि, ऐसा लगता है कि इन बयानों ने स्थिति को शांत करने के बजाय और भी ज्यादा उलझा दिया है।
इजरायल का पलटवार उपराष्ट्रपति की इन सभी बातों को इजरायली नेतृत्व ने अब पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इजरायली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल एक ही सहयोगी देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से India जैसे बड़े देशों का नाम लेकर अपनी मजबूत विदेश नीति का प्रदर्शन किया है। इससे यह साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच अभी भी सब कुछ पूरी तरह से सामान्य नहीं हुआ है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में इन दोनों देशों के संबंधों में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।





































