सुबह उठने पर आंखों के कोनों में थोड़ी मात्रा में कीचड़ या चिपचिपा पदार्थ दिखाई देना आम बात हो सकती है। रातभर सोने के दौरान आंखों की सतह से निकलने वाला म्यूकस, तेल, त्वचा की मृत कोशिकाएं और छोटे-छोटे कण एक जगह जमा हो जाते हैं, जिससे सुबह हल्की परत या डिस्चार्ज नजर आता है। यह आंखों की सतह को चिकना बनाए रखने और बाहरी कणों को बाहर निकालने की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। इसलिए केवल थोड़ी मात्रा में कीचड़ दिखने पर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर इसकी मात्रा अचानक बढ़ जाए, रंग बदलने लगे या इसके साथ लालिमा, दर्द, सूजन, रोशनी से परेशानी या नजर धुंधली होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सफेद और पतले डिस्चार्ज के कारण: आंखों के कोनों में पतला सफेद डिस्चार्ज या हल्की चिपचिपी परत कई बार आंखों में सूखेपन या जलन से जुड़ी हो सकती है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने, पंखे या वातानुकूलित हवा के सीधे संपर्क और आंखों पर लगातार पड़ने वाले दबाव से सूखापन बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में डिस्चार्ज आमतौर पर हल्का होता है और सफाई करने पर आसानी से निकल जाता है। आंखों को पर्याप्त आराम देना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह से चिकनाई देने वाली आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल मददगार हो सकता है। अगर सफेद डिस्चार्ज लगातार बना रहे, बार-बार लौटे या इसके साथ नजर धुंधली होने लगे, तो आंखों की जांच कराना बेहतर है। आंखों को बार-बार रगड़ने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे जलन बढ़ सकती है।
पानी और चिपचिपे डिस्चार्ज का संकेत: अगर आंखों से लगातार पानी आने के साथ हल्का चिपचिपा पदार्थ निकल रहा है, तो इसके पीछे एलर्जी या वायरल कंजंक्टिवाइटिस जैसी वजह हो सकती है। एलर्जी की स्थिति में आमतौर पर खुजली, पानी आना और लालिमा प्रमुख लक्षण होते हैं, जबकि वायरल संक्रमण में आंखों में किरकिरापन, लालिमा और पानी आने की शिकायत हो सकती है। राहत के लिए साफ ठंडी पट्टी का इस्तेमाल किया जा सकता है और आंखों को रगड़ने से बचना चाहिए। संक्रमण की आशंका होने पर हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और तौलिया या रुमाल जैसी व्यक्तिगत चीजें दूसरों के साथ साझा न करें, क्योंकि कुछ प्रकार का कंजंक्टिवाइटिस फैल सकता है।
पीला या हरा डिस्चार्ज क्यों गंभीर हो सकता है: सुबह पलकों पर मोटा पीला पदार्थ जमना और आंखों का चिपक जाना कंजंक्टिवाइटिस, खासकर बैक्टीरियल संक्रमण से जुड़ा हो सकता है। इसके साथ लालिमा, जलन, सूजन और असहजता भी हो सकती है। आंखों से हरा या बहुत अधिक गाढ़ा डिस्चार्ज निकलना भी संक्रमण की ओर संकेत कर सकता है और इसे केवल सामान्य सुबह का कीचड़ मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। बैक्टीरियल संक्रमण में डॉक्टर जांच के बाद जरूरत के अनुसार उपचार तय करते हैं। हर तरह के डिस्चार्ज में एंटीबायोटिक दवा जरूरी नहीं होती, क्योंकि वायरल या एलर्जी से होने वाली समस्या में एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं होती। खास तौर पर कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले व्यक्ति में लालिमा, दर्द, डिस्चार्ज या नजर कम होने जैसे लक्षण अधिक गंभीर संक्रमण से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे में लेंस तुरंत निकाल दें और आंखों की जांच जल्द कराएं।
पलकों पर पपड़ी और घर पर सफाई: अगर सुबह पलकों के किनारे या पलकों के बालों की जड़ों पर मोटी, तैलीय या पपड़ी जैसी परत दिखाई देती है और साथ में जलन, चुभन या आंखों में रेत जैसा एहसास होता है, तो यह ब्लेफराइटिस से जुड़ा हो सकता है। इसमें पलकों के किनारे लाल या सूजे हुए दिखाई दे सकते हैं और सुबह आंखें अधिक चिपचिपी महसूस हो सकती हैं। हल्की समस्या में हाथ अच्छी तरह धोकर साफ गुनगुने पानी में भिगोए कपड़े या साफ कपास से पलकों पर जमी परत को धीरे-धीरे नरम करके साफ किया जा सकता है। दोनों आंखों के लिए अलग साफ कपड़ा या कपास इस्तेमाल करना संक्रमण फैलने के जोखिम को कम करने में मदद करता है। आंखों को रगड़ने से बचें और धूल, धुएं तथा जलन पैदा करने वाली चीजों से दूरी रखें। पलकों की पपड़ी बार-बार बनने लगे या समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो आंखों के विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
दर्द और धुंधली नजर में तुरंत जांच जरूरी: आंखों में कीचड़ के साथ तेज दर्द, बहुत ज्यादा लालिमा, रोशनी देखने में परेशानी, नजर धुंधली होना या दिखाई देने में बदलाव जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। ये लक्षण आंख की सतह या कॉर्निया से जुड़ी गंभीर समस्या की ओर संकेत कर सकते हैं और ऐसी स्थिति में जल्द चिकित्सकीय जांच जरूरी है। यदि समस्या 24 से 48 घंटे में ठीक नहीं होती, बार-बार लौटती है या आंख सूजने, चिपकने और लगातार डिस्चार्ज जैसी शिकायत बनी रहती है, तो नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को लालिमा, दर्द, डिस्चार्ज या नजर में कमी होने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और चिकित्सकीय सलाह मिलने तक लेंस दोबारा नहीं पहनना चाहिए। अचानक नजर कम होना, तेज दर्द या रोशनी देखने में बहुत परेशानी जैसे लक्षण होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।














































