कोलन कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसके शुरुआती संकेत कई बार पेट से जुड़ी आम समस्याओं जैसे दिखाई देते हैं। इसी वजह से लोग अक्सर इसके लक्षणों को सामान्य परेशानी मानकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि समय रहते इनकी पहचान करना जरूरी है। डबल बोर्ड प्रमाणित चिकित्सक और आंतरिक चिकित्सा तथा पाचन तंत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जोसेफ सलहब ने अपने सोशल मीडिया वीडियो के माध्यम से कोलन कैंसर के उन संकेतों के बारे में बताया है, जिन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। उनके अनुसार, शरीर में होने वाले कुछ बदलाव इस बीमारी की चेतावनी हो सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों का दिखाई देना अपने आप में कैंसर की पुष्टि नहीं करता, लेकिन इन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव: कोलन कैंसर के शुरुआती संकेतों में मल त्याग की आदतों में बदलाव शामिल हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार कब्ज रहने लगे, बार-बार दस्त होने लगें या शौच जाने का सामान्य तरीका बदल जाए, तो इस स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। खासकर जब ये परेशानियां एक सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहें, तो इन्हें केवल खानपान या सामान्य पेट की गड़बड़ी मानकर टालना ठीक नहीं है। पहले से नियमित रहने वाली मल त्याग की प्रक्रिया में अचानक बदलाव आना शरीर की ओर से मिलने वाला महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में समस्या की वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है, ताकि किसी गंभीर बीमारी की आशंका को समय रहते समझा जा सके।
मल में खून और पेट में लगातार दर्द होना: मल के साथ खून आना कोलन कैंसर का एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत हो सकता है। रक्त का रंग इस बात पर निर्भर कर सकता है कि कोलन के किस हिस्से से रक्तस्राव हो रहा है। यदि कैंसर कोलन के निचले हिस्से में हो, तो मल में ताजा खून दिखाई दे सकता है, जिसका रंग चमकीला लाल होता है। वहीं, कोलन के ऊपरी हिस्से से रक्तस्राव होने पर खून पाचन प्रक्रिया से गुजरने के कारण गहरे लाल रंग का दिखाई दे सकता है। इसके अलावा, पेट में लगातार दर्द या ऐंठन की शिकायत भी इस बीमारी से जुड़ा संकेत हो सकती है। ऐसी परेशानी समय के साथ ठीक होने के बजाय बढ़ती जा सकती है। इसलिए पेट में बार-बार या लगातार दर्द रहने और मल में खून दिखाई देने पर चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है।
शौच के बाद भी पेट साफ नहीं होने का एहसास: कोलन कैंसर की स्थिति में मलाशय में ट्यूमर या गांठ बनने से व्यक्ति को बार-बार शौच जाने की इच्छा हो सकती है। कई बार शौचालय से बाहर आने के तुरंत बाद भी ऐसा महसूस होता है कि पेट पूरी तरह साफ नहीं हुआ है और दोबारा शौच जाने की जरूरत है। यह एहसास तब भी बना रह सकता है, जब व्यक्ति अभी-अभी शौच करके आया हो। इस तरह की परेशानी को सामान्य कब्ज समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि बार-बार अधूरे शौच का एहसास हो रहा है या मल त्याग की प्रक्रिया में लगातार बदलाव बना हुआ है, तो इसकी वजह की जांच कराना आवश्यक है। खासतौर पर दूसरे लक्षणों के साथ यह परेशानी दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
बिना कोशिश वजन घटना और लगातार थकान रहना: कोलन कैंसर में भूख कम होने के साथ शरीर का वजन भी घटने लग सकता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी दिनचर्या में व्यायाम नहीं बढ़ा रहा है और न ही खानपान में कोई बदलाव कर रहा है, फिर भी उसका वजन लगातार कम हो रहा है, तो इस बदलाव को गंभीरता से लेना चाहिए। इसके अलावा, हर समय थकान महसूस होना, चक्कर आना और सांस लेने में परेशानी होना भी इस बीमारी से जुड़े संकेत हो सकते हैं। कोलन कैंसर में धीरे-धीरे होने वाला रक्तस्राव शरीर में आयरन की कमी पैदा कर सकता है। इससे आयरन की कमी वाला एनीमिया हो सकता है, जिसके कारण कमजोरी, थकावट, चक्कर और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। बिना स्पष्ट कारण वजन घटना और लगातार थकान बने रहना जांच की जरूरत का संकेत है।
एक बार खून आने पर भी कराएं जांच: डॉक्टर के अनुसार, कब्ज, दस्त, पेट दर्द, वजन कम होना या थकान जैसे लक्षण दिखाई देने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को कोलन कैंसर ही है। इन परेशानियों के पीछे दूसरी वजहें भी हो सकती हैं, लेकिन शरीर में होने वाले नए बदलावों और लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से मलाशय से बिना किसी स्पष्ट कारण के खून आने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है, भले ही ऐसा केवल एक बार ही क्यों न हुआ हो। समय पर जांच से समस्या की वास्तविक वजह का पता लगाने में मदद मिलती है। इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। स्वास्थ्य से जुड़ा कोई कार्यक्रम शुरू करने, खानपान में बदलाव करने या किसी बीमारी का उपचार अपनाने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
















































