28 सितंबर को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और सोमवार का दिन है। पितृपक्ष की इस द्वितीया तिथि पर उन पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाएगा, जिनका निधन किसी भी माह के किसी भी पक्ष की द्वितीया तिथि को हुआ था। इसी दिन दांपत्य जीवन में सुख-शांति और सौहार्द की कामना से अशून्य शयन व्रत भी रखा जाएगा। सोमवार को ध्रुव योग का संयोग बन रहा है, जबकि दिन में तिथि, नक्षत्र और चंद्र राशि में भी परिवर्तन होगा। जानिए 28 सितंबर का पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, चौघड़िया तथा सूर्योदय और सूर्यास्त का समय।
प्रमुख पंचांग विवरण
वार: सोमवार
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी संवत्सर)
शक संवत: 1948
मास: आश्विन मास, कृष्ण पक्ष
तिथि: द्वितीया तिथि शाम 07:14 बजे तक, इसके बाद तृतीया तिथि
नक्षत्र: रेवती नक्षत्र सुबह 10:16 बजे तक, इसके बाद अश्विनी नक्षत्र
योग: ध्रुव योग सुबह 08:53 बजे तक, इसके बाद व्याघात योग
सूर्य राशि: कन्या राशि
चंद्र राशि: मीन राशि में सुबह 10:16 बजे तक, इसके बाद मेष राशि
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04:53 ए एम से 05:41 ए एम
प्रातः सन्ध्या: 05:17 ए एम से 06:28 ए एम
अभिजित मुहूर्त: 12:05 पी एम से 12:53 पी एम
विजय मुहूर्त: 02:29 पी एम से 03:17 पी एम
गोधूलि मुहूर्त: 06:30 पी एम से 06:54 पी एम
सायाह्न सन्ध्या: 06:30 पी एम से 07:41 पी एम
अमृत काल: सुबह 07:57 बजे से 09:29 बजे तक तथा रात्रि में 02:12 बजे से 03:43 बजे तक
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: दिल्ली मानक समय के अनुसार सुबह 07:42 बजे से 09:12 बजे तक
यमगण्ड काल: सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:12 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 01:41 बजे से 03:11 बजे तक
दिशाशूल: पूर्व दिशा
सूर्य और चंद्रमा के उदय-अस्त का समय
सूर्योदय: सुबह 06:12 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:11 बजे
चन्द्रोदय: शाम 07:13 बजे
चन्द्रास्त: अगले दिन सुबह 08:41 बजे
दिन की चौघड़िया
अमृत: सुबह 06:12 से 07:42 बजे तक
काल: सुबह 07:42 से 09:12 बजे तक
शुभ: सुबह 09:12 से 10:41 बजे तक
रोग: सुबह 10:41 से दोपहर 12:11 बजे तक
उद्वेग: दोपहर 12:11 से 01:41 बजे तक
चर: दोपहर 01:41 से 03:11 बजे तक
लाभ: दोपहर 03:11 से 04:41 बजे तक
अमृत: शाम 04:41 से 06:10 बजे तक
रात्रि की चौघड़िया
चर: शाम 06:10 से रात 07:41 बजे तक
रोग: रात 07:41 से 09:11 बजे तक
काल: रात 09:11 से 10:41 बजे तक
लाभ: रात 10:41 से 12:11 बजे तक
उद्वेग: मध्यरात्रि 12:11 से रात 01:42 बजे तक
शुभ: रात 01:42 से 03:12 बजे तक
अमृत: रात 03:12 से सुबह 04:42 बजे तक
चर: सुबह 04:42 से 06:12 बजे तक
राज्यवार राहुकाल
| क्रमांक | राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | राजधानी / प्रमुख शहर | राहुकाल समय (28.09.2026) |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | सुबह 07:28 से 08:58 बजे तक |
| 2 | दिल्ली (केंद्र शासित) | नई दिल्ली | सुबह 07:42 से 09:12 बजे तक |
| 3 | जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित) | श्रीनगर / जम्मू | सुबह 07:51 से 09:22 बजे तक |
| 4 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | सुबह 07:34 से 09:04 बजे तक |
| 5 | अरुणाचल प्रदेश | इटानगर | सुबह 06:33 से 08:02 बजे तक |
| 6 | असम | दिसपुर | सुबह 06:44 से 08:14 बजे तक |
| 7 | बिहार | पटना | सुबह 07:09 से 08:39 बजे तक |
| 8 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | सुबह 07:29 से 08:59 बजे तक |
| 9 | गोवा | पणजी | सुबह 07:58 से 09:28 बजे तक |
| 10 | गुजरात | गांधीनगर / अहमदाबाद | सुबह 08:03 से 09:33 बजे तक |
| 11 | हरियाणा | चंडीगढ़ (गुरुग्राम) | सुबह 07:43 से 09:13 बजे तक |
| 12 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | सुबह 07:43 से 09:13 बजे तक |
| 13 | झारखंड | रांची | सुबह 07:13 से 08:43 बजे तक |
| 14 | कर्नाटक | बेंगलुरु | सुबह 07:42 से 09:12 बजे तक |
| 15 | केरल | तिरुवनंतपुरम | सुबह 07:44 से 09:14 बजे तक |
| 16 | मध्य प्रदेश | भोपाल | सुबह 07:44 से 09:14 बजे तक |
| 17 | महाराष्ट्र | मुंबई | सुबह 07:59 से 09:29 बजे तक |
| 18 | मणिपुर | इंफाल | सुबह 06:33 से 08:03 बजे तक |
| 19 | मेघालय | शिलॉन्ग | सुबह 06:45 से 08:15 बजे तक |
| 20 | मिजोरम | आइजोल | सुबह 06:37 से 08:07 बजे तक |
| 21 | नागालैंड | कोहिमा | सुबह 06:31 से 08:01 बजे तक |
| 22 | ओडिशा | भुवनेश्वर | सुबह 07:16 से 08:46 बजे तक |
| 23 | पंजाब | चंडीगढ़ | सुबह 07:45 से 09:15 बजे तक |
| 24 | राजस्थान | जयपुर | सुबह 07:52 से 09:22 बजे तक |
| 25 | सिक्किम | गंगटोक | सुबह 06:53 से 08:23 बजे तक |
| 26 | तमिलनाडु | चेन्नई | सुबह 07:28 से 08:58 बजे तक |
| 27 | तेलंगाना | हैदराबाद | सुबह 07:37 से 09:07 बजे तक |
| 28 | त्रिपुरा | अगरतला | सुबह 06:42 से 08:12 बजे तक |
| 29 | उत्तराखंड | देहरादून | सुबह 07:40 से 09:10 बजे तक |
| 30 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | सुबह 06:58 से 08:28 बजे तक |
द्वितीया श्राद्ध और अशून्य शयन व्रत: पितृपक्ष की द्वितीया तिथि पर उन पितरों के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है, जिनका निधन किसी भी माह और किसी भी पक्ष की द्वितीया तिथि को हुआ हो। मान्यता के अनुसार इस दिन विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। 28 सितंबर को द्वितीया श्राद्ध के साथ अशून्य शयन व्रत भी रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से दांपत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और स्थिरता बनाए रखने की कामना से किया जाता है और इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि इसका पालन पुरुषों द्वारा किया जाता है।












































