राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विशेष अदालत ने इस्लामिक स्टेट की भारत-केंद्रित प्रचार गतिविधियों से जुड़े ‘वॉइस ऑफ हिंद’ आतंकी साजिश मामले में चार दोषियों को कठोर कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने उमर निसार उर्फ कासिम खुरासानी, रमीज अहमद लोन और तनवीर अहमद भट को छह साल की कठोर कैद दी है, जबकि अफशान परवेज जराबी को पांच साल जेल की सजा सुनाई गई। चारों पर अदालत ने अलग-अलग जुर्माना भी लगाया। यह फैसला राउज एवेन्यू जिला अदालत परिसर में स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विशेष अदालत संख्या एक ने सोमवार को सुनाया। सभी दोषियों को मिली सजा एक साथ चलाने का आदेश दिया गया है।
17 सितंबर को दोष सिद्ध हुआ था: चारों आरोपियों के खिलाफ मामले में अदालत ने इससे पहले 17 सितंबर को अपना फैसला सुनाते हुए उन्हें दोषी करार दिया था। उन्हें आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया। सोमवार को अदालत ने दोषसिद्धि के बाद सजा की अवधि और आर्थिक दंड निर्धारित किया। उमर निसार पर 36 हजार रुपये, रमीज अहमद लोन पर 31 हजार रुपये, तनवीर अहमद भट पर 23 हजार रुपये और अफशान परवेज जराबी पर नौ हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस तरह चारों दोषियों को जेल की सजा के साथ अलग-अलग आर्थिक दंड भी भुगतना होगा।
भारत में युवाओं की भर्ती की कथित योजना: जांच के मुताबिक पूरा मामला इस्लामिक स्टेट के उस कथित नेटवर्क से जुड़ा था, जो भारत में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और हिंसक गतिविधियों के लिए संगठन में भर्ती करने की कोशिश कर रहा था। इसके लिए संगठन से जुड़े लोगों ने भारत में मौजूद अपने नेटवर्क के साथ मिलकर ऑनलाइन प्रचार का सहारा लिया। जांच एजेंसी के अनुसार नेटवर्क के सदस्य अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए नकली ऑनलाइन पहचान का इस्तेमाल करते थे और इस माध्यम से इस्लामिक स्टेट की विचारधारा तथा प्रचार सामग्री फैलाते थे। नेटवर्क पर जमीन पर आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए धन उपलब्ध कराने की गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया।
प्रचार पत्रिका के माध्यम से विचारधारा फैलाने का आरोप: जांच में आरोप लगाया गया कि चारों दोषी इस्लामिक स्टेट की भारत-केंद्रित प्रचार पत्रिका ‘सौत-अल-हिंद’ यानी ‘वॉइस ऑफ हिंद’ से जुड़ी गतिविधियों में अलग-अलग स्तर पर शामिल थे। इस सामग्री को तैयार करने, संपादित करने, प्रकाशित करने और इंटरनेट के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की गतिविधियों का उल्लेख जांच में किया गया। एजेंसी के अनुसार इस प्रचार तंत्र का मकसद भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और उन्हें इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए प्रेरित करना था। इसके तहत उन्हें सीरिया, इराक, अफगानिस्तान और दूसरे संघर्ष वाले क्षेत्रों में संगठन से जुड़ने के लिए भेजने की कोशिश की जा रही थी।
आरोपियों की भूमिका के आधार पर दोषसिद्धि: जांच में उमर निसार उर्फ कासिम खुरासानी की भूमिका को विशेष रूप से ‘वॉइस ऑफ हिंद’ की सामग्री और इस्लामिक स्टेट के प्रचार से जोड़ा गया। उसके बारे में आरोप था कि वह पत्रिका, टेलीग्राम और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से प्रचार सामग्री फैलाने के साथ युवाओं को कट्टरपंथी बनाने तथा भर्ती करने की गतिविधियों में शामिल था। रमीज अहमद लोन और तनवीर अहमद भट को संगठन की विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को उसमें शामिल होने के लिए प्रेरित करने का दोषी पाया गया। अफशान परवेज जराबी पर टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से ‘वॉइस ऑफ हिंद’ के लेख प्रकाशित और प्रसारित करने तथा इस्लामिक स्टेट की विचारधारा का प्रचार करने में शामिल होने की बात सामने आई।
छापेमारी में मिले कई अहम सबूत: जांच के दौरान एजेंसी ने बड़ी मात्रा में डिजिटल सामग्री और दस्तावेज बरामद किए। जब्त सामग्री में ‘वॉइस ऑफ हिंद’ की पीडीएफ फाइलें, मारे गए आतंकियों के पोस्टर, कट्टरपंथी साहित्य, इस्लामिक स्टेट के प्रचार से जुड़े इंटरनेट लिंक, संगठन के झंडे वाली टी-शर्ट, हथियार खरीदने से संबंधित बातचीत और आवाज की रिकॉर्डिंग शामिल थीं। जांच के दौरान मीडिया, विचारधारा और मनोवैज्ञानिक युद्ध से जुड़ी सामग्री के साथ संगठन के बैनर और झंडे भी बरामद किए गए। इस मामले में कुल आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और चार पूरक आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं। चार दोषियों को अब सजा मिल चुकी है, जबकि बाकी आरोपियों के खिलाफ अदालत में कार्यवाही जारी है।














































