नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में विपक्षी दलों की बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर साझा रणनीति बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर एकजुट होकर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं। बैठक में कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी मौजूद रहे, जबकि गठबंधन के अन्य प्रमुख नेताओं में ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्लाह शामिल हुए। विपक्षी खेमे में इस बैठक को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें केवल चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर चर्चा नहीं हो रही, बल्कि इन मुद्दों को लेकर बड़े आंदोलन की रूपरेखा और संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव आगे बढ़ाने की तैयारी भी एजेंडे में है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग: बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव पर विपक्षी दलों के बीच चर्चा जारी है और महाभियोग प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों में लाने की तैयारी को बैठक के प्रमुख एजेंडे में रखा गया है। विपक्ष का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और इसी के साथ कथित वोट चोरी का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। इन आरोपों को लेकर विपक्षी दल अब अलग-अलग स्तर पर बयान देने के बजाय साझा राजनीतिक कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े इन मुद्दों को किस तरह व्यापक आंदोलन का रूप दिया जाए और संसद में इसे किस रणनीति के साथ उठाया जाए।
अखिलेश समेत कई नेताओं की गैरमौजूदगी: विपक्षी एकता की इस बैठक में कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी के साथ कुछ बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं हुए और उनकी जगह पार्टी के दो सांसदों को भेजा गया। यह गैरमौजूदगी ऐसे समय हुई है जब कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर तनाव की बात सामने आ रही है। आम आदमी पार्टी ने भी बैठक से दूरी बनाई, जबकि डीएमके की ओर से भी इसमें भागीदारी नहीं हुई। अरविंद केजरीवाल और एमके स्टालिन बैठक में शामिल नहीं हुए। दूसरी ओर हेमंत सोरेन और उद्धव ठाकरे वर्चुअली बैठक से जुड़े। इस स्थिति ने विपक्षी गठबंधन में शामिल दलों की मौजूदा स्थिति और आपसी तालमेल को लेकर राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है।
अखिलेश ने बताई अपनी बात: बैठक से दूर रहने के बावजूद अखिलेश यादव ने विपक्षी एकजुटता को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा का सबसे बड़ा दुख यह है कि इंडिया गठबंधन कमर कसकर एकजुट है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी बैठक के संदर्भ में विपक्षी दलों की एकता पर जोर दिया। उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार गुट, शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट, राष्ट्रीय जनता दल, वाम दलों, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और अन्य दलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पार्टियां केंद्र सरकार के लगातार हमलों के खिलाफ संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के जरिए कथित वोट चोरी की चाल के खिलाफ भी विपक्षी एकजुटता की बात कही। वहीं आम आदमी पार्टी और डीएमके के बैठक से बाहर रहने के कारण गठबंधन की वास्तविक भागीदारी को लेकर अलग बहस शुरू हो गई है।
भाजपा ने साधा निशाना: विपक्ष की बैठक शुरू होते ही भाजपा की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि इंडी गठबंधन जैसी कोई चीज नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस गठबंधन के पास न कोई कार्यालय है, न अध्यक्ष और न संयोजक, जबकि स्पष्ट नीति, नेता और नेतृत्व की भी कमी है। उन्होंने बैठक दर बैठक विपक्षी दलों की संख्या घटने का दावा करते हुए आम आदमी पार्टी और डीएमके को लेकर भी निशाना साधा। दूसरी तरफ शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विपक्षी गठबंधन के नेताओं को राहुल गांधी का नेतृत्व पसंद नहीं है, इसलिए बड़े नेता बैठक से दूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता भी राहुल गांधी को पसंद नहीं करते। भाजपा नेताओं के इन बयानों के बाद विपक्षी बैठक को लेकर राजनीतिक टकराव और बयानबाजी और तेज हो गई है।
आंदोलन से संसद तक बढ़ेगा मुद्दा: विपक्षी दलों की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की तैयारी के साथ-साथ बड़े आंदोलन की रणनीति पर भी चर्चा हो रही है। विपक्ष कथित वोट चोरी और विशेष गहन पुनरीक्षण में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर साझा अभियान चलाने की तैयारी में है। बैठक में यह तय करने की कोशिश की जा रही है कि इस मुद्दे को संसद के दोनों सदनों में किस तरह उठाया जाए और इसके बाद राजनीतिक आंदोलन को किस रूप में आगे बढ़ाया जाए। एक ओर खरगे के प्रस्ताव के जरिए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को औपचारिक रूप से चर्चा के केंद्र में रखा गया है, वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल और एमके स्टालिन की गैरमौजूदगी तथा आम आदमी पार्टी और डीएमके की बैठक से दूरी ने विपक्षी रणनीति की तस्वीर को जटिल बना दिया है। अब बैठक में होने वाली अंतिम चर्चा और फैसलों पर नजर रहेगी, क्योंकि इन्हीं के आधार पर विपक्ष आगे की संसदीय और आंदोलनात्मक कार्रवाई की दिशा तय करेगा।














































