हिंदूकुश इलाके में सुबह-सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। इस भूकंप का केंद्र जमीन से मात्र 10 किलोमीटर की गहराई पर था। केंद्र सतह के बेहद करीब होने के कारण इसके आसपास के इलाकों में झटके काफी तेज महसूस किए गए। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप के कारण किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि, कम गहराई पर आए भूकंप के चलते केंद्र के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कंपन ज्यादा स्पष्ट रूप से महसूस हुआ। इस घटना ने हिंदूकुश क्षेत्र में होने वाली लगातार भूकंपीय गतिविधियों को फिर चर्चा में ला दिया है। यह क्षेत्र पहले से ही भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है और यहां अलग-अलग गहराई पर समय-समय पर भूकंप दर्ज किए जाते रहे हैं।
सिर्फ 10 किलोमीटर गहराई पर था केंद्र: मौजूदा भूकंप में सबसे ध्यान देने वाली बात इसकी गहराई रही। भूकंप का केंद्र जमीन के भीतर केवल 10 किलोमीटर नीचे था। सतह के करीब आने वाले भूकंपों में केंद्र के आसपास कंपन अधिक जोरदार महसूस हो सकता है, जबकि उसी तीव्रता का अधिक गहराई पर आने वाला भूकंप सतह पर तुलनात्मक रूप से अलग प्रभाव पैदा कर सकता है। इसी वजह से हिंदूकुश में आए इस भूकंप के झटके केंद्र के आसपास के इलाकों में तेज महसूस किए गए। कम गहराई के कारण भूकंप की ऊर्जा सतह तक अपेक्षाकृत कम दूरी तय करके पहुंची। हालांकि, शुरुआती जानकारी में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है। इसके बावजूद घटना ने इस क्षेत्र में भूकंप की संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर किया है।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के आसपास संवेदनशील इलाका: हिंदूकुश इलाका अफगानिस्तान और पाकिस्तान के आसपास के उन क्षेत्रों में आता है जहां भूकंप के झटके लगातार महसूस किए जाते रहे हैं। हिंदूकुश-पामीर का बड़ा क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता है। यहां भूकंप अलग-अलग गहराई पर आ सकते हैं और कुछ घटनाएं पहाड़ों के नीचे होने वाली जटिल भूगर्भीय गतिविधियों से जुड़ी होती हैं। इस क्षेत्र की संरचना और लगातार जारी भूगर्भीय हलचल के कारण यहां समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। कभी इनकी गहराई कम होती है तो कभी भूकंप धरती के भीतर ज्यादा गहराई पर आते हैं। मौजूदा घटना में केंद्र केवल 10 किलोमीटर नीचे होने के कारण आसपास के क्षेत्रों में झटकों का असर ज्यादा महसूस किया गया।
प्लेटों की टक्कर से लगातार बनता दबाव: हिंदूकुश, हिमालय और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में भूकंप आने की एक बड़ी वजह भारतीय और यूरेशियाई प्लेटों के बीच लगातार जारी टक्कर है। यह क्षेत्र उन भूगर्भीय पट्टियों में आता है जहां दोनों प्लेटों की गतिविधियों के कारण धरती के भीतर लगातार दबाव और हलचल बनी रहती है। प्लेटों के बीच होने वाली इस टक्कर का असर व्यापक पहाड़ी क्षेत्र पर दिखाई देता है। हिंदूकुश और हिमालय समेत आसपास के इलाकों में इसी कारण भूकंपीय गतिविधियां बार-बार सामने आती हैं। हिंदूकुश-पामीर क्षेत्र में आने वाले भूकंपों की गहराई भी एक जैसी नहीं होती। कुछ भूकंप कम गहराई पर आते हैं, जबकि कुछ मध्यम या अधिक गहराई में दर्ज होते हैं। इस क्षेत्र में मौजूदा भूकंप का केंद्र भी सतह से बहुत कम दूरी पर था।
हाल के वर्षों में कई भूकंप हुए दर्ज: हिंदूकुश क्षेत्र में हाल के वर्षों के दौरान कई भूकंप रिकॉर्ड किए गए हैं। इन घटनाओं में मध्यम गहराई वाले भूकंपों के साथ-साथ ज्यादा गहराई पर आने वाले भूकंप भी शामिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर भूकंप को दर्ज करने वाली एजेंसियों ने इन घटनाओं की निगरानी और रिकॉर्डिंग की है। इससे पता चलता है कि इस पूरे क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। हिंदूकुश-पामीर क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति के कारण यहां अलग-अलग गहराई पर भूकंप आना आम भूकंपीय गतिविधि का हिस्सा रहा है। मौजूदा भूकंप भी इसी संवेदनशील क्षेत्र में आया है और इसकी कम गहराई के कारण केंद्र के आसपास झटके ज्यादा तेज महसूस किए गए।
फिलहाल नुकसान की कोई खबर नहीं: हिंदूकुश में आए ताजा भूकंप के बाद शुरुआती जानकारी में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि, भूकंप का केंद्र केवल 10 किलोमीटर की गहराई पर होने के कारण आसपास के इलाकों में झटके तेज महसूस किए गए। इस घटना की खासियत इसकी कम गहराई रही, क्योंकि सतह के करीब आने वाले भूकंप अपने केंद्र के आसपास अधिक जोरदार कंपन पैदा कर सकते हैं। हिंदूकुश क्षेत्र में पहले भी मध्यम और अधिक गहराई वाले भूकंप दर्ज किए जाते रहे हैं। भारतीय और यूरेशियाई प्लेटों के बीच लगातार होने वाली टक्कर के कारण हिंदूकुश, हिमालय और आसपास के पहाड़ी इलाके भूकंपीय गतिविधियों वाले क्षेत्र बने हुए हैं। मौजूदा घटना में फिलहाल नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन कम गहराई पर आए भूकंप के कारण केंद्र के आसपास के इलाकों में इसके झटके काफी स्पष्ट रूप से महसूस किए गए।














































