23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को आश्विन शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। आज दोपहर 2 बजकर 36 मिनट तक द्वादशी तिथि रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ हो जाएगी। शुक्रवार को ध्रुव योग रात 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगा, जबकि पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र रात 9 बजकर 3 मिनट तक है। इसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र शुरू होगा। आज शुक्र प्रदोष व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। आइए जानते हैं शुक्रवार का पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, चौघड़िया और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
मुख्य पंचांग विवरण
दिन: शुक्रवार
विक्रम संवत: 2083, रौद्र संवत्सर
शक संवत: 1948, पराभव संवत्सर
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: हेमंत
मास: आश्विन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: द्वादशी दोपहर 2 बजकर 36 मिनट तक, इसके बाद त्रयोदशी
नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद रात 9 बजकर 3 मिनट तक, इसके बाद उत्तराभाद्रपद
योग: ध्रुव रात 10 बजकर 9 मिनट तक, इसके बाद व्याघात
करण: बालव दोपहर 2 बजकर 36 मिनट तक, इसके बाद कौलव
सूर्य राशि: तुला
चंद्र राशि: कुंभ दोपहर 3 बजकर 3 मिनट तक, इसके बाद मीन
विशेष: शुक्र प्रदोष व्रत
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:45 बजे से 5:36 बजे तक
प्रातः संध्या: प्रातः 5:10 बजे से 6:27 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:58 बजे से 2:43 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 12:58 बजे से 2:35 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:44 बजे से 6:09 बजे तक
सायाह्न संध्या: शाम 5:44 बजे से शाम 7:00 बजे तक
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल (दिल्ली): सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक
यमगण्ड काल: सुबह 7:51 बजे से 9:16 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 7:51 बजे से 9:16 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह 10:12 बजे से 10:57 बजे तक
दिशाशूल: पश्चिम दिशा
दिशाशूल संबंधी मान्यता: शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करना अशुभ माना जाता है। आवश्यक यात्रा के लिए परंपरागत उपाय के रूप में जौ या राई खाकर यात्रा शुरू करने की मान्यता है।
सूर्योदय, सूर्यास्त, चन्द्रोदय और चन्द्रास्त
सूर्योदय: सुबह 6:27 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:44 बजे
चन्द्रोदय: रात 8:25 बजे
चन्द्रास्त: अगले दिन, 24 अक्टूबर को सुबह 6:35 बजे
दिन की चौघड़िया
सूर्योदय से सूर्यास्त: सुबह 6:27 बजे से शाम 5:44 बजे तक
चर (सामान्य): सुबह 6:27 बजे से 7:52 बजे तक
लाभ (शुभ): सुबह 7:52 बजे से 9:16 बजे तक
अमृत (सर्वोत्तम): सुबह 9:16 बजे से 10:41 बजे तक
काल (अशुभ): सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक
शुभ (शुभ): दोपहर 12:06 बजे से 1:30 बजे तक
रोग (अशुभ): दोपहर 1:30 बजे से 2:55 बजे तक
उद्वेग (अशुभ): दोपहर 2:55 बजे से शाम 4:20 बजे तक
चर (सामान्य): शाम 4:20 बजे से 5:44 बजे तक
रात्रि की चौघड़िया
सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय: शाम 5:44 बजे से 24 अक्टूबर को सुबह 6:28 बजे तक
रोग (अशुभ): शाम 5:44 बजे से 7:20 बजे तक
काल (अशुभ): शाम 7:20 बजे से 8:55 बजे तक
लाभ (शुभ): रात 8:55 बजे से 10:31 बजे तक
उद्वेग (अशुभ): रात 10:31 बजे से 12:06 बजे तक
शुभ (शुभ): रात 12:06 बजे से 1:42 बजे तक
अमृत (सर्वोत्तम): रात 1:42 बजे से 3:17 बजे तक
चर (सामान्य): सुबह 3:17 बजे से 4:53 बजे तक
रोग (अशुभ): सुबह 4:53 बजे से 6:28 बजे तक
राज्यवार राहुकाल
| क्रमांक | राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | राजधानी | राहुकाल समय |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | सुबह 10:25 से 11:50 बजे तक |
| 2 | दिल्ली (एनसीआर) | नई दिल्ली | सुबह 10:41 से दोपहर 12:05 बजे तक |
| 3 | जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर | सुबह 10:50 से दोपहर 12:12 बजे तक |
| 4 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | सुबह 10:28 से 11:55 बजे तक |
| 5 | अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | सुबह 9:25 से 10:50 बजे तक |
| 6 | असम | दिसपुर | सुबह 9:35 से 11:00 बजे तक |
| 7 | बिहार | पटना | सुबह 10:05 से 11:30 बजे तक |
| 8 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | सुबह 10:20 से 11:45 बजे तक |
| 9 | गोवा | पणजी | सुबह 10:50 से दोपहर 12:18 बजे तक |
| 10 | गुजरात | गांधीनगर | सुबह 11:00 से दोपहर 12:25 बजे तक |
| 11 | हरियाणा | चंडीगढ़ | सुबह 10:43 से दोपहर 12:07 बजे तक |
| 12 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | सुबह 10:42 से दोपहर 12:06 बजे तक |
| 13 | झारखंड | रांची | सुबह 10:10 से 11:35 बजे तक |
| 14 | कर्नाटक | बेंगलुरु | सुबह 10:40 से दोपहर 12:07 बजे तक |
| 15 | केरल | तिरुवनंतपुरम | सुबह 10:43 से दोपहर 12:12 बजे तक |
| 16 | मध्य प्रदेश | भोपाल | सुबह 10:40 से दोपहर 12:05 बजे तक |
| 17 | महाराष्ट्र | मुंबई | सुबह 10:55 से दोपहर 12:22 बजे तक |
| 18 | मणिपुर | इंफाल | सुबह 9:23 से 10:48 बजे तक |
| 19 | मेघालय | शिलांग | सुबह 9:36 से 11:01 बजे तक |
| 20 | मिजोरम | आइजोल | सुबह 9:27 से 10:52 बजे तक |
| 21 | नागालैंड | कोहिमा | सुबह 9:22 से 10:47 बजे तक |
| 22 | ओडिशा | भुवनेश्वर | सुबह 10:06 से 11:32 बजे तक |
| 23 | पंजाब | चंडीगढ़ | सुबह 10:43 से दोपहर 12:07 बजे तक |
| 24 | राजस्थान | जयपुर | सुबह 10:50 से दोपहर 12:15 बजे तक |
| 25 | सिक्किम | गंगटोक | सुबह 9:47 से 11:12 बजे तक |
| 26 | तमिलनाडु | चेन्नई | सुबह 10:30 से 11:57 बजे तक |
| 27 | तेलंगाना | हैदराबाद | सुबह 10:33 से दोपहर 12:00 बजे तक |
| 28 | त्रिपुरा | अगरतला | सुबह 9:33 से 10:58 बजे तक |
| 29 | उत्तराखंड | देहरादून | सुबह 10:38 से दोपहर 12:02 बजे तक |
| 30 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | सुबह 9:51 से 11:16 बजे तक |
शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व और पूजा विधि
23 अक्टूबर 2026 शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद भगवान शिव की आराधना करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, पुष्प अर्पित करें और धूप-दीप जलाकर भोग लगाएं। इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें।
प्रदोष व्रत में सूर्यास्त के आसपास का समय विशेष माना जाता है। सूर्यास्त के बाद रात्रि के प्रारंभिक समय को प्रदोष काल कहा जाता है। इसलिए सुबह पूजा करने के साथ शाम को प्रदोष काल में भी भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की आराधना करने से जीवन में सुख-शांति आती है तथा कष्टों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।














































