25 अक्टूबर 2026, रविवार को शरद पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस दिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 25 अक्टूबर को दिन में होने और रात्रि के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहने के कारण शरद पूर्णिमा का व्रत इसी दिन रखा जाएगा। इस दिन रेवती नक्षत्र शाम 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा। चंद्रमा भी शाम 7 बजकर 22 मिनट तक मीन राशि में रहेंगे और इसके बाद मेष राशि में प्रवेश करेंगे। वहीं, हर्षण योग शाम 5 बजकर 21 मिनट तक रहेगा, इसके बाद वज्र योग प्रारंभ होगा। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा के साथ माता लक्ष्मी की आराधना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसी वजह से चांदनी में खीर रखने की परंपरा भी प्रचलित है। इस दिन को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं रविवार का संपूर्ण पंचांग, तिथि-नक्षत्र का समय, शुभ-अशुभ मुहूर्त, सूर्योदय-सूर्यास्त, चंद्रोदय-चंद्रास्त, दिन और रात की चौघड़िया तथा देश के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों में राहुकाल का समय।
मुख्य पंचांग तत्व
दिन : रविवार
विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थी
शक संवत: 1948, पराभव
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: शरद ऋतु
संक्रांति: इस दिन किसी संक्रांति का विवरण उपलब्ध नहीं है
मास: आश्विन मास
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: चतुर्दशी सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक, इसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 42 मिनट तक
नक्षत्र: रेवती शाम 7 बजकर 22 मिनट तक, इसके बाद अश्विनी नक्षत्र
योग: हर्षण शाम 5 बजकर 21 मिनट तक, इसके बाद वज्र योग
सूर्य राशि: तुला राशि
चंद्र राशि: मीन राशि शाम 7 बजकर 22 मिनट तक, इसके बाद मेष राशि
विशेष पर्व: शरद पूर्णिमा व्रत, कोजागरी पूर्णिमा
दिशाशूल: पश्चिम दिशा यात्रा से पहले दलिया, घी या पान खाकर निकलें।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 56 मिनट से सुबह 5 बजकर 46 मिनट तक
प्रातः संध्या: सुबह 5 बजकर 21 मिनट से सुबह 6 बजकर 36 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 18 मिनट से दोपहर 3 बजकर 4 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6 बजकर 9 मिनट से शाम 6 बजकर 34 मिनट तक
सायाह्न संध्या: शाम 6 बजकर 9 मिनट से शाम 7 बजकर 24 मिनट तक
अमृत काल: शाम 5 बजकर 5 मिनट से शाम 6 बजकर 36 मिनट तक
निशिता मुहूर्त: 25 अक्टूबर की रात 11 बजकर 58 मिनट से 26 अक्टूबर को रात 12 बजकर 47 मिनट तक
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल (दिल्ली मानक): शाम 4 बजकर 18 मिनट से शाम 5 बजकर 42 मिनट तक
यमगण्ड काल: दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से दोपहर 1 बजकर 29 मिनट तक
गुलिक काल: दोपहर 3 बजे से शाम 4 बजकर 24 मिनट तक
दुर्मुहूर्त: शाम 4 बजकर 19 मिनट से शाम 5 बजकर 4 मिनट तक
दिशाशूल: पश्चिम दिशा
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय
सूर्योदय: सुबह 6 बजकर 28 मिनट
सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 42 मिनट
चन्द्रोदय: शाम 8:25 बजे
चन्द्रास्त: 26 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 30 मिनट
दिन की चौघड़िया
1. उद्वेग (अशुभ): सुबह 6 बजकर 28 मिनट से सुबह 7 बजकर 52 मिनट तक
2. चर (सामान्य): सुबह 7 बजकर 52 मिनट से सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक
3. लाभ (शुभ): सुबह 9 बजकर 16 मिनट से सुबह 10 बजकर 41 मिनट तक
4. अमृत (सर्वोत्तम): सुबह 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 5 मिनट तक
5. काल (अशुभ): दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से दोपहर 1 बजकर 29 मिनट तक
6. शुभ (शुभ): दोपहर 1 बजकर 29 मिनट से दोपहर 2 बजकर 53 मिनट तक
7. रोग (अशुभ): दोपहर 2 बजकर 53 मिनट से शाम 4 बजकर 18 मिनट तक
8. उद्वेग (अशुभ): शाम 4 बजकर 18 मिनट से शाम 5 बजकर 42 मिनट तक
रात्रि की चौघड़िया
1. शुभ (शुभ): शाम 5 बजकर 42 मिनट से शाम 7 बजकर 17 मिनट तक
2. अमृत (सर्वोत्तम): शाम 7 बजकर 17 मिनट से रात 8 बजकर 53 मिनट तक
3. चर (सामान्य): रात 8 बजकर 53 मिनट से रात 10 बजकर 29 मिनट तक
4. रोग (अशुभ): रात 10 बजकर 29 मिनट से 26 अक्टूबर को रात 12 बजकर 5 मिनट तक
5. काल (अशुभ): 26 अक्टूबर को रात 12 बजकर 5 मिनट से रात 1 बजकर 41 मिनट तक
6. लाभ (शुभ): 26 अक्टूबर को रात 1 बजकर 41 मिनट से रात 3 बजकर 17 मिनट तक
7. उद्वेग (अशुभ): 26 अक्टूबर को रात 3 बजकर 17 मिनट से सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक
8. शुभ (शुभ): 26 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 52 मिनट से सुबह 6 बजकर 28 मिनट तक
राज्यवार राहुकाल
25 अक्टूबर 2026 को विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों में राहुकाल का समय नीचे दिया गया है।
| क्रमांक | राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | राजधानी/शहर | राहुकाल का समय |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | शाम 4:05 से 5:30 बजे तक |
| 2 | दिल्ली (एनसीआर) | नई दिल्ली | शाम 4:18 से 5:42 बजे तक |
| 3 | जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर/जम्मू | शाम 4:22 से 5:45 बजे तक |
| 4 | बिहार | पटना | शाम 3:48 से 5:13 बजे तक |
| 5 | मध्य प्रदेश | भोपाल | शाम 4:18 से 5:43 बजे तक |
| 6 | राजस्थान | जयपुर | शाम 4:25 से 5:50 बजे तक |
| 7 | महाराष्ट्र | मुंबई | शाम 4:42 से 6:10 बजे तक |
| 8 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | दोपहर 3:26 से शाम 4:50 बजे तक |
| 9 | गुजरात | गांधीनगर | शाम 4:44 से 6:10 बजे तक |
| 10 | पंजाब | चंडीगढ़ | शाम 4:20 से 5:43 बजे तक |
| 11 | हरियाणा | चंडीगढ़ | शाम 4:20 से 5:44 बजे तक |
| 12 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | शाम 4:18 से 5:41 बजे तक |
| 13 | उत्तराखंड | देहरादून | शाम 4:15 से 5:39 बजे तक |
| 14 | झारखंड | रांची | शाम 3:48 से 5:13 बजे तक |
| 15 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | शाम 4:02 से 5:27 बजे तक |
| 16 | ओडिशा | भुवनेश्वर | शाम 3:49 से 5:14 बजे तक |
| 17 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | शाम 4:15 से 5:42 बजे तक |
| 18 | तेलंगाना | हैदराबाद | शाम 4:18 से 5:44 बजे तक |
| 19 | कर्नाटक | बेंगलुरु | शाम 4:30 से 5:58 बजे तक |
| 20 | तमिलनाडु | चेन्नई | शाम 4:20 से 5:49 बजे तक |
| 21 | केरल | तिरुवनंतपुरम | शाम 4:36 से 6:06 बजे तक |
| 22 | गोवा | पणजी | शाम 4:44 से 6:11 बजे तक |
| 23 | असम | दिसपुर | दोपहर 3:13 से शाम 4:37 बजे तक |
| 24 | अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | दोपहर 3:07 से शाम 4:31 बजे तक |
| 25 | नागालैंड | कोहिमा | दोपहर 3:10 से शाम 4:34 बजे तक |
| 26 | मणिपुर | इंफाल | दोपहर 3:12 से शाम 4:36 बजे तक |
| 27 | मिजोरम | आइजोल | दोपहर 3:15 से शाम 4:39 बजे तक |
| 28 | त्रिपुरा | अगरतला | दोपहर 3:20 से शाम 4:44 बजे तक |
| 29 | मेघालय | शिलांग | दोपहर 3:15 से शाम 4:39 बजे तक |
| 30 | सिक्किम | गंगटोक | दोपहर 3:26 से शाम 4:50 बजे तक |
शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी चांदनी को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी मान्यता के चलते शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा है। मान्यता है कि चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर विशेष पुण्यदायी होती है।
इस दिन चंद्रमा की पूजा करने के साथ माता लक्ष्मी की आराधना भी की जाती है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्राप्ति होती है। भक्त व्रत रखकर चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं। चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है, इसलिए इस पर्व पर चंद्र उपासना का भी विशेष महत्व बताया गया है। शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालु रात्रि में चंद्र दर्शन करते हैं, माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार खीर का भोग लगाते हैं।

















































