25 अक्टूबर 2026, रविवार को शरद पूर्णिमा और कोजागरी पूजा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी। पंचांग के अनुसार, हर्षण योग शाम लगभग 5 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इसके बाद वज्र योग शुरू होगा, जो 26 अक्टूबर को दोपहर लगभग 2 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा और माता लक्ष्मी की आराधना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। वैदिक ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा से जुड़े उपाय करने से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और समृद्धि की कामना की जाती है। आइए जानते हैं हर्षण योग और वज्र योग का समय, किन राशियों के लिए दिन अनुकूल रहेगा, किन्हें सावधानी रखनी चाहिए और शरद पूर्णिमा पर चंद्र दोष से राहत पाने के लिए कौन-से पाँच उपाय किए जाते हैं।
25 अक्टूबर 2026 को हर्षण योग कब से कब तक रहेगा?
पंचांग के अनुसार, 25 अक्टूबर को हर्षण योग शाम लगभग 5 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इसके बाद वज्र योग प्रारंभ होगा। हर्षण योग को पारंपरिक ज्योतिष में उत्साह, प्रसन्नता और सकारात्मक प्रयासों से जोड़कर देखा जाता है। इस अवधि में योजनाबद्ध तरीके से काम करना, अधूरे कार्य पूरे करना और महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत करना अनुकूल माना जाता है।
योग का नाम: हर्षण योग
शुरुआत: 24 अक्टूबर 2026, शनिवार, रात लगभग 8 बजकर 1 मिनट
समाप्ति: 25 अक्टूबर 2026, रविवार, शाम लगभग 5 बजकर 22 मिनट
इसके बाद बनने वाला योग: वज्र योग
वज्र योग की समाप्ति: 26 अक्टूबर 2026, सोमवार, दोपहर लगभग 2 बजकर 17 मिनट
हर्षण योग किन राशियों के लिए रहेगा अनुकूल?
मेष राशि: नई योजनाओं पर काम आगे बढ़ाने और रुके हुए कार्य पूरे करने पर ध्यान दें। दूर स्थान से मिलने वाला संपर्क लाभदायक रहेगा। बड़े निवेश में जल्दबाजी न करें।
वृषभ राशि: पुराने भुगतान वापस मिलने और व्यापारिक संपर्क मजबूत होने से लाभ मिलेगा। नौकरी में पदोन्नति से जुड़ी खुशखबरी मिल सकती है। खर्चों पर नियंत्रण बनाए रखें।
मिथुन राशि: कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां पूरी करने और नए संपर्क बनाने के लिए समय अनुकूल रहेगा। आय के नए स्रोत विकसित होंगे, लेकिन शेयर बाजार में सोच-समझकर निवेश करें।
कर्क राशि: साझेदारी के कारोबार में लाभ और कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। लंबित काम पूरे होने से राहत मिलेगी। महत्वपूर्ण फैसलों में अनुभवी लोगों की सलाह लें।
तुला राशि: नौकरी और व्यापार में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। सूर्य, बुध और शुक्र की युति को पारंपरिक ज्योतिष में आकर्षण और सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है। आर्थिक योजनाओं पर ध्यान दें।
धनु राशि: पुराने संपर्कों से लाभ मिलेगा और पारिवारिक योजनाओं में प्रगति होगी। सामाजिक कार्यों से सम्मान मिल सकता है। मनोरंजन और सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ने से बचाएं।
कुंभ राशि: नए व्यापारिक अवसर सामने आएंगे और मित्रों का सहयोग मिलेगा। राजनीति, समाज सेवा या सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। निवेश से पहले अनुभवी व्यक्ति की सलाह लें।
हर्षण योग में किन राशियों को रखनी चाहिए सावधानी?
सिंह राशि: कार्यक्षेत्र में बातचीत के दौरान संयम रखें। अहंकार और जल्दबाजी से बचें। बड़े आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें और विरोधियों के साथ अनावश्यक विवाद न करें।
कन्या राशि: शेयर बाजार और जोखिम वाले सौदों में सतर्क रहें। अनावश्यक बहस से दूर रहकर अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान दें। कार्यक्षेत्र में मिलने वाली नई जानकारी का उपयोग समझदारी से करें।
वृश्चिक राशि: चिंता में आकर कोई बड़ा फैसला न लें। वाहन या संपत्ति खरीदने से पहले बजट का आकलन करें। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों का सहयोग लेकर काम पूरे करें।
मकर राशि: सरकारी और कार्यालय संबंधी काम करते समय दस्तावेजों की जांच करें। जल्दबाजी में गलतियां हो सकती हैं। आर्थिक योजनाओं में सावधानी बरतें और काम को व्यवस्थित तरीके से पूरा करें।
मीन राशि: पारंपरिक ज्योतिष में मीन राशि में शनि और चंद्रमा की युति को विषयोग कहा जाता है। इस मान्यता के अनुसार, मानसिक दबाव और उलझन से बचने के लिए संयम रखना जरूरी है। विवाद, जोखिम भरे सौदे और जल्दबाजी वाले निर्णय टालें।
हर्षण योग के दौरान राशि के अनुसार क्या करें उपाय?
मेष राशि: सूर्यदेव को जल अर्पित करें और जरूरतमंद को लाल फल दान करें।
वृषभ राशि: गाय को हरा चारा खिलाएं या पहली रोटी गाय को दें।
मिथुन राशि: पक्षियों को दाना डालें और विवादों से दूरी बनाए रखें।
कर्क राशि: भगवान शिव की पूजा करें और जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें।
सिंह राशि: सूर्यदेव को जल अर्पित करें और जरूरतमंद को गुड़ का दान करें।
कन्या राशि: गाय को रोटी खिलाएं और बातचीत में संयम रखें।
तुला राशि: जरूरतमंद को सफेद या मीठी वस्तु दान करें और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
वृश्चिक राशि: हनुमानजी का ध्यान करें और सुंदरकांड का पाठ करें।
धनु राशि: पीली वस्तु का दान करें और बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
मकर राशि: शनिदेव के मंत्रों का जप करें और जरूरतमंद को काले तिल दान करें।
कुंभ राशि: पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और जरूरतमंद की सहायता करें।
मीन राशि: सूर्यदेव को जल अर्पित करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
हर्षण योग समाप्त होने के बाद वज्र योग का प्रभाव
25 अक्टूबर को शाम लगभग 5 बजकर 22 मिनट पर हर्षण योग समाप्त होने के बाद वज्र योग शुरू होगा। पारंपरिक ज्योतिष में वज्र योग को सावधानी और संयम बरतने वाला समय माना जाता है। इस दौरान किसी भी विवाद को बढ़ाने, जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने या बिना जांच-पड़ताल के आर्थिक जोखिम उठाने से बचना उचित माना जाता है। वज्र योग 26 अक्टूबर को दोपहर लगभग 2 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।
वज्र योग के दौरान उपाय: वाणी पर संयम रखें, महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले तथ्यों की जांच करें और अनावश्यक विवादों से दूरी बनाए रखें। अपनी आस्था के अनुसार ईश्वर का स्मरण करें और जरूरतमंदों की सहायता करें।
शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व क्या है?
हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा को विशेष महत्व दिया जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी चांदनी को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसी मान्यता के चलते शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा प्रचलित है। मान्यता है कि चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर का सेवन करना शुभ होता है।
इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना पूरी होती है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं, चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है। इसी कारण शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा, मंत्र जप और दान-पुण्य को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि, चंद्र दोष और उसके प्रभाव से संबंधित बातें ज्योतिषीय मान्यताओं का हिस्सा हैं; इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
चंद्र दोष क्या होता है?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जन्मकुंडली में चंद्रमा की स्थिति अशुभ मानी जाए या चंद्रमा पर शनि, राहु अथवा केतु जैसे ग्रहों का प्रभाव हो, तो इसे चंद्र दोष से जोड़कर देखा जाता है। कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में वृश्चिक राशि में चंद्रमा की स्थिति और कुंडली में केमद्रुम योग को भी चंद्रमा से जुड़ी प्रतिकूल परिस्थितियों के रूप में समझाया जाता है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, चंद्र दोष के कारण व्यक्ति को मानसिक बेचैनी, निर्णय लेने में उलझन, पारिवारिक संबंधों में तनाव और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इन समस्याओं के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। मानसिक परेशानी लगातार बनी रहे तो केवल ज्योतिषीय उपायों पर निर्भर रहने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित है।
शरद पूर्णिमा पर चंद्र दोष से राहत के लिए करें ये पाँच उपाय
1. चंद्रमा के मंत्रों का जप करें
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा के दर्शन करके श्रद्धापूर्वक चंद्र मंत्रों का जप किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मंत्र जप करने से मानसिक शांति और सकारात्मकता की कामना की जाती है।
मंत्र: ॐ सोम सोमाय नमः।
वैकल्पिक मंत्र: ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः।
अपनी सुविधा के अनुसार शांत स्थान पर बैठकर मंत्र का जप करें। इसे आस्था और ध्यान से जुड़ी धार्मिक साधना के रूप में अपनाया जा सकता है।
2. घर में चंद्र यंत्र स्थापित करें
कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में चंद्र यंत्र की स्थापना को शुभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा पर विधि-विधान से चंद्र यंत्र स्थापित करने और उसकी पूजा करने की मान्यता प्रचलित है। इसे मन की शांति और घर में सकारात्मक वातावरण की कामना से जोड़ा जाता है। यंत्र स्थापित करने से पहले उसकी पूजा-विधि के बारे में जान लें और अपनी श्रद्धा के अनुसार ही इसका पालन करें।
3. चंद्रमा से संबंधित सफेद वस्तुओं का दान करें
शरद पूर्णिमा पर चावल, दूध, चीनी और सफेद वस्त्र जैसी वस्तुओं का दान करना पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन वस्तुओं का दान चंद्रमा से संबंधित प्रतिकूल प्रभावों को शांत करने की कामना से किया जाता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को इन वस्तुओं का दान करें।
4. चंद्रमा को जल और दूध मिलाकर अर्घ्य दें
शरद पूर्णिमा की रात एक पात्र में स्वच्छ जल लेकर उसमें थोड़ा दूध और अक्षत यानी साबुत चावल मिलाएं। इसके बाद चंद्रमा के दर्शन करके श्रद्धापूर्वक अर्घ्य दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन की शांति और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है। अर्घ्य देते समय मन को शांत रखें और अपने परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।
5. भगवान शिव की पूजा और मंत्र जप करें
धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा का भगवान शिव से विशेष संबंध माना गया है। भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं, इसलिए शरद पूर्णिमा की रात शिवजी की पूजा करना और उनके मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है। इस दिन शिवलिंग के दर्शन करें, श्रद्धानुसार पूजा करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
शरद पूर्णिमा पर इन बातों का रखें ध्यान
शरद पूर्णिमा पर पूजा-पाठ, मंत्र जप और दान-पुण्य अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करें। किसी भी धार्मिक उपाय को लेकर भयभीत होने या अनावश्यक खर्च करने की जरूरत नहीं है। चंद्र दोष से जुड़े उपाय पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं; इनके प्रभाव की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। जीवन में मानसिक शांति और पारिवारिक सुख बनाए रखने के लिए संतुलित दिनचर्या, शांत संवाद और जिम्मेदार आर्थिक निर्णय भी महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष: 25 अक्टूबर 2026 को शरद पूर्णिमा के अवसर पर हर्षण योग शाम लगभग 5 बजकर 22 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद वज्र योग शुरू होगा। इस दिन चंद्रमा और माता लक्ष्मी की पूजा, मंत्र जप तथा दान-पुण्य का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना करके सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की कामना कर सकते हैं।
















































