मौजूदा समय में Iran और America के बीच एक महत्वपूर्ण पीस डील करीब-करीब अपने आखिरी चरण में है। लेकिन इसी बीच देश के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस्तीफा देकर सबको बुरी तरह से चौंका दिया है। पीस डील के इस नाजुक वक्त में राष्ट्रपति का यह कदम कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। उन्होंने देश के Supreme Leader Mojtaba Khamenei को अपना यह गंभीर इस्तीफा भेजा है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से यह इस्तीफा इस समय एक बहुत बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
सेना और सरकार में तनाव: पिछले कई महीनों से देश की चुनी हुई सरकार और सेना के बीच अंदर ही अंदर भारी तनाव चल रहा था। यह आंतरिक तनाव अब खुलकर जनता और पूरी दुनिया के सामने पूरी तरह से आ चुका है। IRGC ने धीरे-धीरे करके राष्ट्रपति पद के कई अहम और बड़े अधिकारों को पूरी तरह छीन लिया है। राष्ट्रपति की शक्तियों को इस तरह से कम किए जाने से सरकार का काम करना काफी मुश्किल हो गया था। इसी वजह से Masoud Pezeshkian ने पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा देना ज्यादा उचित समझा।
कार्यकारी गतिरोध का संकट: राष्ट्रपति के अधिकारों में हो रही लगातार कटौती के कारण पूरी सरकार एक बड़े संकट में फंस गई है। Masoud Pezeshkian की सरकार एक बहुत ही गहरे कार्यकारी और राजनीतिक गतिरोध में बुरी तरह से फंस चुकी है। अधिकारों के अभाव में सरकार अपनी मर्जी से कोई भी बड़ा और स्वतंत्र फैसला नहीं ले पा रही है। यहां तक कि सरकार अपनी पसंद से कैबिनेट के ढांचे में भी कोई बदलाव लागू नहीं कर पा रही थी। इसी गतिरोध और लाचारी को अपने इस्तीफे का सबसे प्रमुख कारण बताया गया है।
अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर असर: इस राजनीतिक और कार्यकारी गतिरोध का सीधा असर देश के अहम अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर भी पड़ रहा है। शक्तियों के अभाव की वजह से सरकार America के साथ चल रही किसी भी डील को आगे नहीं बढ़ा पा रही है। विदेशी मामलों में भी IRGC के बढ़ते नियंत्रण ने चुनी हुई सरकार की भूमिका को लगभग खत्म कर दिया है। सरकार केवल नाम की रह गई है और असल फैसले सैन्य कमांडरों द्वारा ही लिए जा रहे हैं। इसी कारण से शांति प्रक्रिया और विदेश नीति से जुड़े सभी अहम फैसले पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं।
प्रशासन पर सैन्य कमांडरों का नियंत्रण: राष्ट्रपति ने इस्तीफा देते समय Supreme Leader को लिखी चिट्ठी में कई बेहद गंभीर खुलासे किए हैं। उन्होंने साफ आरोप लगाया है कि देश के प्रशासनिक तंत्र पर अब IRGC के कमांडरों का सीधा और पूरा कंट्रोल हो चुका है। सरकार को इन कमांडरों की वजह से देश के बड़े और अहम फैसलों से लगभग बाहर कर दिया गया है। चरमपंथी गुटों ने देश की पूरी नीतिगत व्यवस्था और दिशा को अपने ही हाथों में ले लिया है। देश का शासन अब पूरी तरह से अपने आधिकारिक और कानूनी रास्तों से भटक गया है।
राजनीतिक भूचाल और अनिश्चितता: Masoud Pezeshkian द्वारा अचानक उठाए गए इस कदम से देश में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। इस समय देश की पूरी राजनीतिक व्यवस्था भारी असमंजस और भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है और यह साफ नहीं हुआ है कि इस्तीफा मंजूर हुआ या नहीं। सब कुछ अब केवल Mojtaba Khamenei के अंतिम फैसले पर ही पूरी तरह से निर्भर करता है। जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक देश में यह भारी राजनीतिक अस्थिरता लगातार बनी रहेगी।





































