उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता को बरसात के दौरान होने वाली प्राकृतिक दुर्घटनाओं से सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि वर्षा के समय आकाशीय बिजली गिरने की जानलेवा घटनाएं भी अक्सर होती हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम और भारी बारिश के समय अनावश्यक रूप से अपने घर से बाहर बिल्कुल न निकलें। इसके साथ ही उन्होंने तेज बारिश या आंधी के दौरान खुद को बचाने के लिए बड़े पेड़ों के नीचे खड़े न होने की सख्त हिदायत दी है। कई बार अतिवृष्टि के कारण नदियों एवं जलाशयों का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ जाता है जो जानमाल के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
जलाशयों के पास सावधानी और सरकारी इंतजाम मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को बारिश के दिनों में किसी भी जलाशय के करीब जाने को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की अहम सलाह दी है। उन्होंने साफ कहा है कि इस खतरनाक मौसम के दौरान नदियों एवं गहरे जलाशयों में स्नान करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। लोगों को केवल बहुत ज्यादा जरूरत पड़ने पर ही ऐसे जल स्रोतों के पास जाने की स्पष्ट हिदायत दी गई है। राज्य सरकार ने इन सब मौसमी चुनौतियों और आपदाओं से निपटने के लिए अपनी तरफ से पहले ही व्यापक और मजबूत तैयारियां कर रखी हैं। फिर भी मुख्यमंत्री ने जनता से विशेष अपील की है कि वे खुद भी सतर्क और सजग रहें ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
प्रकृति का नवसृजन और कृषि का महत्व सुरक्षा के सख्त निर्देशों के अलावा मुख्यमंत्री ने अपनी इस विशेष पाती में वर्षा ऋतु के प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व का भी बहुत सुंदर वर्णन किया है। उन्होंने लिखा है कि प्रकृति का प्रत्येक छोटा-बड़ा परिवर्तन मानव जीवन के लिए एक नया और अत्यंत सुखद संदेश लेकर आता है। वर्षा ऋतु को उन्होंने नवसृजन, संवर्धन और समाज में चारों तरफ फैलने वाली खुशहाली व समृद्धि का एक बड़ा प्रतीक माना है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि प्रधान प्रदेश के लिए यह बारिश जीवनदायिनी है क्योंकि हमारे अन्नदाताओं का श्रम ही देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है। बारिश की पहली फुहार की मनमोहक सुगंध किसानों के थके हुए जीवन में एक नई ऊर्जा का अद्भुत सृजन करने का काम करेगी।
पौधारोपण अभियान और पर्यावरण संरक्षण मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य के नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़ने का विशेष आग्रह किया है। उन्होंने इस बात पर बहुत जोर दिया है कि प्रदेश का प्रत्येक परिवार इस महाभियान के अंतर्गत कम से कम एक नया पौधा अवश्य लगाए। सिर्फ पौधा लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके बड़े होने तक उसके पूर्ण संरक्षण का एक दृढ़ संकल्प लेना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि यह पावन भूमि हमारी माता है और हम सभी इस विशाल भूमि के सच्चे पुत्र हैं। इसलिए हमारा यह परम कर्तव्य बनता है कि हम इस धरती मां को हमेशा हरा-भरा रखकर इसके प्रति अपने सभी दायित्वों का निष्ठा से निर्वहन करें।
स्वच्छता और जल निकासी प्रबंधन मानसूनी बीमारियों को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने जल निकासी और स्वच्छता के मुद्दे पर अपना सबसे अधिक और विशेष ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने आम जनता से स्पष्ट रूप से अपील की है कि वे अपने घर के आसपास गंदे पानी का कोई भी जल जमाव बिल्कुल न होने दें। मोहल्लों और सड़कों के किनारे खुले में कूड़े का ढेर न लगने देने की बात भी इस लंबी चिट्ठी में प्रमुखता से कही गई है। पानी की उचित निकासी के लिए बनी महत्वपूर्ण नालियां सिंगल यूज प्लास्टिक या अन्य कचरे से जाम न हों, इसका सभी को विशेष ध्यान रखना चाहिए। बरसात के मौसम में स्वच्छता बनाए रखने से ही हम सभी तरह के जलजनित और खतरनाक संक्रामक रोगों से अपना और परिवार का बचाव कर सकते हैं।
जल संचयन और जैविक खेती पर जोर अपनी चिट्ठी के अंतिम हिस्से में मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण और सुरक्षित कृषि विधियों को अपनाने पर बहुत ही गहराई से जोर दिया है। उन्होंने जनभागीदारी के माध्यम से पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कुओं, अमृत सरोवरों और पोखरों की स्वच्छता व संरक्षण को एक बड़ा अभियान बनाने को कहा है। मुख्यमंत्री ने घरों और विद्यालयों में वर्षा जल संचयन को अनिवार्य रूप से लागू करने की अपनी गहरी इच्छा भी इस पत्र में जाहिर की है। प्रकृति के प्रति अपनी सच्ची कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्होंने किसानों से जैविक खेती के तरीकों को अधिक से अधिक बढ़ावा देने की अपील की है। जैविक खेती अपनाने से न केवल हमारा प्रदेश पूरी तरह स्वस्थ होगा, बल्कि हमारी पूरी कृषि व्यवस्था को भी एक नई और टिकाऊ मजबूती मिलेगी।





































