शराब घोटले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) के ऐक्शन का सामना कर रही आम आदमी पार्टी (आप) को विपक्ष के कई दलों का साथ मिला है। बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव समेत 8 दलों के नेताओं ने पीएम मोदी को खत लिखकर सिसोदिया की गिरफ्तारी पर नाराजगी जाहिर की।
हालांकि, चर्चा इस बात की ज्यादा हो रही है कि मोदी सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाली मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस इस मुद्दे पर केजरीवाल का साथ क्यों नहीं दे रही है? कुछ नेताओं ने सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद मोदी सरकार पर निशाना जरूर साधा, लेकिन पार्टी केजरीवाल से सहानुभूति दिखाने से बच रही है।
कांग्रेस और ‘आप’ दोनों ही बीजेपी पर केंद्रीय जांच एजेसियों के दुरुपयोग करते हुए विपक्षी नेताओं को प्रताड़ित करने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन दोनों दल एक दूसरे का साथ देने से बचते हैं। कांग्रेस का साथ नहीं मिलने पर आप नेता आरोप लगाते हैं कि देश की सबसे पुरानी पार्टी की भाजपा के साथ मिलीभगत है। सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद भी कई नेताओं ने ऐसा ही कहा। हालांकि, कांग्रेस की ओर से भी यह याद दिलाने में देरी नहीं की गई कि जब राहुल गांधी, सोनिया गांधी समेत अन्य बड़े नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों ने ऐक्शन लिया तो केजरीवाल की पार्टी ने चुप्पी साध ली थी।
‘आप’ पर हमलावर कांग्रेस
‘आप’ का साथ देना तो दूर सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने दो राज्यों में उससे सत्ता छीन लेने वाली पार्टी पर आक्रामक तरीके से हमला शुरू कर दिया है। पार्टी ने मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी का स्वागत करते हुए घर-घर जाकर जनता को ‘आप के कारनामे’ बताने की बात कही है। दिल्ली यूनिट के नेता पार्टी के इस फैसले से बेहद खुश हैं और ‘आप’ पर जोरदार प्रहार शुरू कर दिए हैं। सोमवार को पार्टी दफ्तर के बार पोस्टर चिपके नजर आए, जिनमें सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को सलाखों के पीछे दिखाय गया। इस पर केजरीवाल के हवाले से लिखा गया है- जो भ्रष्टाचारी है, वही देशद्रोही है। कभी आप में रहीं कांग्रेस नेता अलका लांबा ने कहा, ‘कांग्रेस का मानना है कि बीजेपी 95 फीसदी केसों में एजेसियों का गलत इस्तेमाल करती है। 5 फीसदी केस सही होते हैं और इनमें से सिसोदिया का भी है।’ उन्होंने कहा, ‘सिर्फ इसलिए कि हम बीजेपी के साथ नहीं दिखना चाहते इसका मतलब नहीं कि हम करप्शन का समर्थन करेंगे।’
साथ ना मिलने से आहत AAP
कांग्रेस का साथ नहीं मिलने से ‘आप’ की उम्मीदों को झटका लगा है और केजरीवाल की पार्टी उस पर सवाल उठा रही है। आप के प्रवक्ता और केजरीवाल सरकार में मंत्री बनने जा रहे सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘मैं कांग्रेस के समर्थकों और नेताओं की याद दिलाना चाहता हूं कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी को भी सीबीआई-ईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया था। यह मौका आम आदमी पार्टी के पास था और संसाधन भी हैं कि हम कांग्रेस के पोस्टर हम गली गली लगाते। लेकिन हमने इसमें संयम रखा, यह जो मर्यादा कांग्रेस को रखनी थी वह उसने तोड़ दिया। इसके वजह से कांग्रेस के बहुत से समर्थक भी परेशान हैं कि आज एक मौका था कि अडानी के मामले में कांग्रेस बाकी दलों के साथ देती संसद में लेकिन उसने यह नहीं किया। कांग्रेस ने संसद चलने का समर्थन किया और सरकार को बचकर निकलने का मौका दिया। कांग्रेस के पास मौका था कि तमाम विपक्षी दलों के साथ खड़ी होती और कहती कि इन एजेंसियों का इस्तेमाल गलत हो रहा है। लेकिन कांग्रेस के प्रवक्ता कह रहे हैं कि 95 फीसदी गलत होते हैं और 5 फीसदी सही। यह कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है।’
क्या है दूरी की वजहें?
‘आप’ से दूरी की वजहों पर कांग्रेस ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तो नहीं दी है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक कई कारण गिनाते हैं। माना जाता है कि इसकी पहली वजह यह है कि सिसोदिया या सत्येंद्र जैन से पहले कांग्रेस पार्टी के भी कई दिग्गज नेताओं के खिलाफ सीबीआई और ईडी ऐक्शन ले चुकी है, लेकिन इन मौकों पर आप और इसके संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चुप्पी साधे रखी है। दूसरी वजह यह भी है कि दिल्ली, पंजाब से लेकर गुजरात तक ‘ ‘आप’ ने कांग्रेस को राजनीतिक रूप से बड़ी चोट पहुंचाई है। दिल्ली और पंजाब में जहां केजरीवाल ने कांग्रेस से सत्ता छीन ली तो गुजरात में वोटशेयर में बड़ी कटौती की। आने वाले दिनों में ‘आप’ छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों में भी चुनाव लड़ने जा रही है, जहां कांग्रेस की सरकारें हैं।
एक बार साथ देकर पछता रही कांग्रेस
पार्टी के कुछ नेता यह भी याद दिलाते हैं कि दिल्ली में केजरीवाल की पहली सरकार कांग्रेस के समर्थन से ही बनी थी। पार्टी के उस फैसले को ‘गलती’ बताते हुए पार्टी के कुछ नेता नाम गोपनीय रखने की शर्त पर कहते हैं कि उसका खामियाजा अब तक भुगतना पड़ रहा है। 2013 के बाद से पार्टी दिल्ली में अर्श से फर्श पर पहुंच चुकी है। गौरतलब है कि केंद्र में यूपीए-2 सरकार के दौरान ही केजरीवाल ने समाजसेवी अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चलाया था। कहा जाता है कि इसने कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।



































