मुरादाबाद से गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी हारिस से हुई 6 घंटे की पूछताछ ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। हारिस का मुख्य काम सोशल मीडिया के जरिए युवाओं, विशेषकर नाबालिगों को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़कर उन्हें ‘जंग-ए-जिहाद’ के लिए तैयार करना था।
पूछताछ के चौंकाने वाले खुलासे:
- नाबालिगों को निशाना क्यों?: हारिस ने कबूल किया कि 18 साल से कम उम्र के लड़कों को भड़काना आसान होता है क्योंकि उनकी सोच आक्रामक होती है। साथ ही, उन पर कानूनी कार्रवाई भी कम सख्त होती है।
- डिजिटल प्रोपेगेंडा: ये आतंकी टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और ‘सेशन’ (Session) जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल करते थे। ‘अल इत्तेहाद मीडिया फाउंडेशन’ के जरिए आईएसआईएस की मैगजीन, वीडियो और भड़काऊ स्पीच फैलाई जाती थी।
- विदेशी हैंडलर्स का नेटवर्क: दुबई में बैठा आकिब और पाकिस्तान-अफगानिस्तान के हैंडलर्स इस पूरे नेटवर्क को दिशा दे रहे थे। ये लोग गजवा-ए-हिंद और ओसामा बिन लादेन की विचारधारा से प्रेरित वीडियो दिखाकर युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहे थे।
- संडे ऑपरेशन (Sunday Operation): जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए ये आतंकी रविवार को सबसे ज्यादा एक्टिव होते थे, क्योंकि उस दिन सरकारी दफ्तरों और एजेंसियों में छुट्टी का माहौल रहता था।
यह खुलासा दर्शाता है कि कैसे डिजिटल युग में आतंकी संगठन घर बैठे युवाओं को गुमराह कर रहे हैं। एटीएस अब इन आरोपियों के मोबाइल से मिले पहलगाम हमले और दिल्ली ब्लास्ट के वीडियो के आधार पर आगे की कड़ियाँ जोड़ रही है।



































