आयुर्वेद में ऋतुचर्या यानी मौसम के अनुसार खान-पान का विशेष महत्व बताया गया है। महर्षि चरक द्वारा रचित ‘चरक संहिता’ में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है:
“शरद्ग्रीष्मवसन्तेषु प्रायशो दधि गर्हितम्।”
इसका अर्थ है कि शरद (सितंबर-अक्टूबर), ग्रीष्म (मई-जून) और वसंत (मार्च-अप्रैल) ऋतुओं में दही का सेवन मुख्य रूप से निषेध माना गया है। आम धारणा के विपरीत दही की तासीर गर्म होती है। हालांकि, जब इसे मट्ठा (छाछ) बनाकर या इसमें पानी मिलाकर पिया जाता है, तो यह पेट को अंदर से ठंडक पहुंचाता है। दही को पतला करके खाने से एसिडिटी नहीं होती और शरीर का डिहाइड्रेशन दूर होता है, इसलिए गर्मियों में इसका सेवन बहुत लाभदायक माना जाता है। लेकिन सवाल यह है कि मानसून (बारिश) के मौसम में दही का सेवन हानिकारक क्यों हो जाता है? आइए, इस विषय पर आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा से विस्तार से जानते हैं।
क्या बारिश के मौसम में दही नहीं खानी चाहिए?
आशा आयुर्वेदा की डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, मानसून के दौरान हमारे शरीर की पाचन शक्ति (मंदाग्नि) काफी कमजोर हो जाती है। इसका सीधा सा अर्थ है कि पचने में भारी और बहुत अधिक ठंडा दही खाने से शरीर में गैस और कफ दोष बढ़ने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
दही की प्रकृति अम्लीय (Acidic) होती है। इस मौसम में सादे दही का अत्यधिक सेवन आपके खून को भी दूषित कर सकता है। अगर आप रात के समय दही खाने के शौकीन हैं, तो आपको तुरंत रुक जाना चाहिए। रात में दही खाने से गले में खराश हो सकती है और शरीर में तेजी से बलगम (Mucus) बन सकता है।
दही खाने के प्रमुख फायदे
यद्यपि कुछ मौसमों में दही से परहेज बताया गया है, लेकिन सही समय पर इसके सेवन के कई लाभ हैं:
- मजबूत पाचन: यह हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त और मजबूत बनाता है।
- बेहतर इम्युनिटी: इसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया (Probiotics) इम्यून सिस्टम को बेहतर करते हैं।
- मजबूत हड्डियां: कैल्शियम से भरपूर होने के कारण यह हड्डियों को स्वस्थ रखता है।
- वजन नियंत्रण: संतुलित मात्रा में दही का सेवन वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है।
मानसून में दही सेवन के मुख्य नुकसान
बरसात के दिनों में अत्यधिक दही खाने से पेट और शरीर से जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं:
- पाचन क्रिया की कमजोरी: बारिश में पाचन पहले से ही धीमा होता है, और दही भारी होने के कारण इसे पचाने में मुश्किल होती है जिससे अपच (Indigestion) हो सकता है।
- त्वचा संबंधी रोग: दही की तासीर एसिडिक होने के कारण इस मौसम में त्वचा से जुड़ी कुछ समस्याएं या इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।
- वात और कफ का असंतुलन: शरीर में कफ और वात दोष बढ़ सकते हैं।
मानसून में दही खाने का सही तरीका
आयुर्वेद में दही को देर से पचने वाला आहार (गुरु आहार) माना जाता है। फिर भी, यदि आप मानसून के मौसम में दही खाना चाहते हैं, तो इसे सीमित मात्रा में और सही तरीके (संयोग) से खाएं ताकि इसके नुकसान कम हो सकें:
- मसाले मिलाएं: सादा दही खाने के बजाय, उसमें थोड़ा सा भुना हुआ जीरा पाउडर और काला नमक डालकर खाएं। इससे यह आसानी से पच जाता है।
- मीठा या अन्य चीजें मिलाएं: आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार, गर्मी और मानसून के मौसम में दही में थोड़ी चीनी, देसी घी, या आंवला मिलाकर खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इससे इसकी तासीर बहुत गर्म नहीं रहती।
- तापमान का ध्यान रखें: दही को सीधे फ्रिज से निकालकर एकदम से न खाएं। इसे सामान्य तापमान (Room Temperature) पर आने के बाद ही ग्रहण करें।
- अपच के रोगी रहें दूर: जो लोग पहले से ही गैस, अपच या एसिडिटी की समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें बरसात के मौसम में दही से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। इस मौसम में हमेशा हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन ही करना चाहिए।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।)





































