आजकल बहुत ही कम उम्र में युवाओं को पेट फूलना, एसिडिटी और कब्ज जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्याओं का मुख्य कारण युवाओं की लगातार खराब हो रही लाइफस्टाइल से जुड़ा हुआ है। हालांकि कई बार कुछ सामान्य शारीरिक इंफेक्शन भी इन पाचन संबंधी परेशानियों का एक कारण हो सकते हैं। लेकिन ज्यादातर लोगों में खराब और अनियमित आदतों के कारण ही पेट की बीमारियों का खतरा काफी तेजी से बढ़ रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि किन विशेष कारणों से युवाओं को गैस और पाचन से जुड़ी इन समस्याओं से जूझना पड़ता है।
देर रात खाना खाने के नुकसान Sharda Hospital के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर Dr. Bhumesh Tyagi ने बताया कि देर रात खाना आंतों के स्वास्थ्य को बहुत खराब करता है। सोने से ठीक पहले भोजन करने की आदत शरीर की प्राकृतिक पाचन क्रिया को पूरी तरह से बाधित कर देती है। इस गलत आदत के कारण शरीर में एसिड रिफ्लक्स का खतरा बढ़ जाता है और नींद की क्वालिटी भी खराब होती है। विशेषज्ञों के अनुसार हमारी आंतों में एक विशेष प्रकार की सर्कैडियन क्लॉक होती है जो समय के अनुसार काम करती है। अनियमित खान-पान की वजह से हमारा पाचन तंत्र, चयापचय और पेट के स्वस्थ बैक्टीरिया का संतुलन बुरी तरह बिगड़ जाता है।
कैफीन और एनर्जी ड्रिंक का बुरा असर शरीर में कैफीन का बहुत अधिक मात्रा में सेवन करना भी पाचन तंत्र के लिए बेहद हानिकारक साबित होता है। लंबे समय तक काम करने, पढ़ाई का दबाव झेलने और नींद की कमी से निपटने के लिए युवा ज्यादा कॉफी या एनर्जी ड्रिंक पीते हैं। जरूरत से अधिक कैफीन का सेवन करने से पेट में ज्यादा मात्रा में एसिड बनने लगता है जिससे एसिडिटी तेजी से बढ़ती है। इसके लगातार उपयोग से आंतों में भयंकर जलन हो सकती है और कई बार दस्त की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। एनर्जी ड्रिंक में मौजूद भारी मात्रा में चीनी और आर्टिफिशियल कम्पाउंड आंतों के माइक्रोबायोम को और भी अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।
तनाव और खराब नींद का आंतों पर प्रभाव आंतों के स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाली एक और बड़ी आदत ज्यादा तनाव लेना और कम नींद आना है। मेडिकल विज्ञान के अनुसार इंसान का दिमाग सीधे तौर पर आंत-मस्तिष्क अक्ष के माध्यम से पेट से जुड़ा होता है। लंबे समय तक अत्यधिक तनाव में रहने से आंत की सामान्य गति और कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। यह मानसिक तनाव पेट की संवेदनशीलता को बढ़ाकर चिड़चिड़ा आईबीएस जैसे गंभीर और कष्टदायक लक्षण भी पैदा कर सकता है। इसके साथ ही नींद कम आने से व्यक्ति का पाचन तंत्र, इम्यूनिटी और प्राकृतिक हार्मोनल संतुलन भी पूरी तरह बिगड़ जाता है।
बाहर का खाना और दवाइयों का सेवन आपका दैनिक भोजन और खान-पान आपकी गट हेल्थ पर सीधा और गहरा असर डालने का काम करता है। फास्ट फूड, पैकेटबंद स्नैक्स और मीठे ड्रिंक पीने से शरीर में फाइबर की भारी कमी हो जाती है जो पेट के लिए हानिकारक है। शरीर में पर्याप्त फाइबर की कमी होने से कब्ज, पेट में सूजन और मेटाबॉलिज्म से संबंधी कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा जो लोग बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार एंटीबायोटिक दवाएं खाते हैं उनकी गट हेल्थ भी बहुत प्रभावित होती है। धूम्रपान, वेपिंग और शराब का अधिक सेवन करने से भी आंतों के फ्लोरा और पाचन स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचता है।
आंतों को स्वस्थ रखने के आवश्यक उपाय अपनी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल में कुछ सकारात्मक बदलाव करके आंतों को पूरी तरह से स्वस्थ और मजबूत बनाया जा सकता है। इसके लिए बैलेंस डाइट अपनाना, समय पर भोजन करना और समय पर सोने की आदत डालना सबसे ज्यादा जरूरी है। भोजन में ज्यादा से ज्यादा फाइबर लेना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना हमारी पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को सुधारने में मदद करता है। युवाओं को बाहरी और प्रोसेस्ड फूड से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए और अपनी दिनचर्या में नियमित व्यायाम को जरूर शामिल करना चाहिए। अच्छी गुणवत्ता वाली नींद लेने और स्ट्रेस मैनेजमेंट को अपनाने से आंतों का संतुलन बहुत ही आसानी से ठीक किया जा सकता है।





































