श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रो. सारिका दुबे का भारत-श्रीलंका संबंधों के सामरिक एवं सांस्कृतिक आयामों पर व्याख्यान
*विशिष्ट वक्ता के रूप में आमंत्रित प्रो. दुबे ने तकनीकी सत्र की अध्यक्षता भी की; भारतीय सांस्कृतिक विरासत और अकादमिक सहयोग पर रखे विचार

लखनऊ। के.डी. कन्या गर्ल्स डिग्री कॉलेज, लखनऊ की प्राचार्य प्रो. सारिका दुबे ने श्रीलंका के बौद्ध एवं पाली विश्वविद्यालय, कोलंबो में 14 एवं 15 अक्टूबर, 2026 को आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “India and Sri Lanka: Socio-Cultural Perspectives” में विशिष्ट वक्ता के रूप में सहभागिता कर लखनऊ का गौरव बढ़ाया। इस प्रतिष्ठित अकादमिक आयोजन में उन्होंने “Reimagining India–Sri Lanka Relations: The Interface of Geostrategy, Regional Geopolitics and Cultural Diplomacy” विषय पर व्याख्यान दिया तथा एक तकनीकी सत्र की अध्यक्षता भी की।
अपने व्याख्यान में प्रो. दुबे ने भारत और श्रीलंका के ऐतिहासिक संबंधों, साझा सांस्कृतिक विरासत तथा समकालीन सामरिक, क्षेत्रीय भू-राजनीतिक और कूटनीतिक परिदृश्य के विभिन्न पहलुओं पर विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने रेखांकित किया कि शिक्षा, संस्कृति और अकादमिक संवाद दो देशों के बीच पारस्परिक समझ, मैत्री और सहयोग को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए प्रो. दुबे ने बौद्ध एवं पाली विश्वविद्यालय, श्रीलंका के कुलपति प्रो. होमागामा धम्मानंद थेरो, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति प्रो. आशु रानी, के.एम.आई. के निदेशक प्रो. श्रीधर तथा स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, कोलंबो की प्रो. अथिला कोटालावाला के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन के दौरान भारतीय उच्चायोग, कोलंबो के प्रथम सचिव श्री सौरभ सभलोक द्वारा प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाना प्रो. दुबे के लिए विशेष सम्मान का अवसर रहा। इसके अतिरिक्त, केलानिया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. लक्ष्मण सेनविरत्न से पुस्तकें प्राप्त करना तथा पद्मश्री प्रो. उषा यादव सहित देश-विदेश के विद्वानों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करना भी उनके लिए विशेष रूप से स्मरणीय रहा।
प्रो. सारिका दुबे ने इस अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहभागिता को अपने अकादमिक जीवन की अविस्मरणीय उपलब्धि बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विभिन्न देशों की साझा विरासत को समझने, नए विचारों को प्रोत्साहित करने तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग की संभावनाओं को विस्तार देने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा, सांस्कृतिक संवाद और अकादमिक सहयोग राष्ट्रों के बीच मैत्री एवं पारस्परिक सद्भाव को मजबूत करने वाले प्रभावी सेतु हैं।
प्रो. दुबे की इस सहभागिता ने अंतरराष्ट्रीय अकादमिक विमर्श में लखनऊ के शैक्षणिक जगत की उपस्थिति को रेखांकित किया और भारत-श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संबंधों को नई दृष्टि से समझने का अवसर प्रदान किया।









































