शांति घोषणा और युद्ध का नया मोर्चा हालाँकि अमेरिकी प्रशासन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव कम करने हेतु 21 दिनों के युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में हिंसा का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ शांति वार्ता की चर्चा हो रही थी, तो दूसरी तरफ सीमा पार से गोलाबारी का नया दौर शुरू हो गया। लेबनानी क्षेत्र से उत्तरी इजरायल के रिहायशी और सैन्य इलाकों, विशेषकर शतुला को निशाना बनाकर हमले किए गए। इसके प्रत्युत्तर में इजरायली सेना ने भी पूरी ताकत के साथ दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के गढ़ों पर बमबारी शुरू कर दी, जिससे संघर्ष का यह नया अध्याय और भी खौफनाक हो गया है।
आतंकवादी अड्डों और लॉन्चरों का खात्मा इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दुश्मन के मंसूबों को नाकाम करने के लिए अपनी आधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली का उपयोग किया। लेबनान की ओर से दागे गए रॉकेटों को सीमा पार करने से पहले ही नष्ट कर दिया गया। इसके तुरंत बाद इजरायली खुफिया जानकारी के आधार पर उन मोबाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया गया जो इजरायल पर आग उगल रहे थे। सेना की कार्रवाई इतनी सटीक थी कि हमले के लिए तैयार खड़े अन्य हथियारों को भी समय रहते नष्ट कर दिया गया। इस सैन्य ऑपरेशन के दौरान हिजबुल्लाह के तीन सक्रिय सदस्यों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जो इजरायल के खिलाफ ऑपरेशन में शामिल थे।
हवाई क्षेत्र में बढ़ती तनातनी और रक्षा प्रणाली इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच का यह संघर्ष अब केवल जमीन तक सीमित नहीं है। हिजबुल्लाह ने इजरायली वायुसेना के एक गश्ती विमान को गिराने के लिए विमान-रोधी मिसाइल का उपयोग कर तनाव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। हालांकि, इजरायली पायलट की सूझबूझ और तकनीकी सुरक्षा के कारण यह मिसाइल विमान को छू तक नहीं सकी और बीच हवा में ही बेकार हो गई। आईडीएफ ने इस घटना को अत्यंत गंभीर माना है और इसे एक बड़े उकसावे के रूप में देखा जा रहा है। यह घटना साबित करती है कि हिजबुल्लाह अपने हथियारों के जखीरे का इस्तेमाल इजरायल की रणनीतिक बढ़त को कम करने के लिए कर रहा है।
ड्रोन हमलों के जरिए सीजफायर की शर्तों का उल्लंघन इजरायली सैन्य सूत्रों के मुताबिक, हिजबुल्लाह के लड़ाकों ने समझौते की धज्जियां उड़ाते हुए दक्षिणी लेबनान में तैनात इजरायली सैनिकों पर ड्रोन से हमला किया। ये विस्फोटक ड्रोन विशेष रूप से फॉरवर्ड डिफेंस लाइन को नुकसान पहुँचाने के लिए भेजे गए थे। रॉकेट और यूएवी के इस समन्वित हमले ने इजरायली सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया है। आईडीएफ ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि इस तरह के कृत्य सीजफायर संधि का स्पष्ट उल्लंघन हैं। इन हरकतों से साफ है कि हिजबुल्लाह समझौते के बजाय संघर्ष को लंबा खींचने की रणनीति पर काम कर रहा है।
आतंकवादी ठिकानों पर इजरायल का विध्वंसक पलटवार लेबनान की तरफ से हो रही घुसपैठ और रॉकेट हमलों का जवाब देने के लिए इजरायल ने आक्रामक रुख अख्तियार किया है। जैसे ही लेबनान से हमले की कोशिश हुई, इजरायली रक्षा प्रणालियों ने उन्हें बेअसर किया और जवाबी कार्रवाई में लेबनान के भीतर स्थित हिजबुल्लाह के सैन्य बेसों पर भीषण हमला बोल दिया। इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य केंद्र वे ठिकाने थे जहाँ से आतंकवादी हमले की योजना बना रहे थे। इस ऑपरेशन में तीन और आतंकवादियों का सफाया कर दिया गया। इजरायल का कहना है कि वे अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी हमले का जवाब दोगुने वेग से दिया जाएगा।
अनिश्चित भविष्य और युद्ध के बादल इस समय इजरायल और लेबनान की सीमा एक बार फिर सुलग रही है। ट्रंप प्रशासन की शांति की पहल को दोनों पक्षों की ओर से हो रहे हमलों ने गहरी चोट पहुँचाई है। जहाँ इजरायल अपने डिफेंस मैकेनिज्म को और मजबूत कर रहा है, वहीं हिजबुल्लाह लगातार नए तरीके से हमले करने की कोशिश में है। दक्षिण लेबनान के सैन्य अड्डों की तबाही और इजरायल पर होते रॉकेट हमले इस बात का संकेत हैं कि पूर्ण शांति अभी कोसों दूर है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव इस युद्ध को रोक पाता है या फिर यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगा।



































