लोकसभा में आवश्यक बहुमत के अभाव में आरक्षण विधेयक की विफलता भारतीय संसद के निचले सदन में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाले बहुप्रतीक्षित विधेयक के असफल होने के बाद से ही देश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्म हो गया है। एक संविधान संशोधन बिल होने के नाते, इसे पारित करवाने के लिए सदन में मौजूद कुल सांसदों के दो-तिहाई मतों की अनिवार्यता थी। लेकिन, दुर्भाग्य से सत्ताधारी दल और उसके सहयोगी सदन में इस आवश्यक बहुमत के जादुई आंकड़े को जुटाने में नाकाम साबित हुए। पूर्ण बहुमत सिद्ध न कर पाने के परिणामस्वरूप, महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण से जुड़ा यह अहम संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पारित होने से पहले ही औंधे मुंह गिर गया। इस भारी संसदीय झटके और बिल के नामंजूर होने के तुरंत पश्चात, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अत्यंत कड़े शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है, जिससे दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
विपक्ष के कृत्य को भारत माता के सम्मान पर गहरा आघात करार देना संसद भवन में महिला आरक्षण विधेयक के पारित न हो पाने की इस दुखद घटना पर अपनी कड़ी आपत्ति जताते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे देश के लोकतांत्रिक सफर का एक बेहद ही निराशाजनक पल करार दिया है। उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि आज का यह दिन भारत के महान और विशाल लोकतंत्र के पन्नों में एक अत्यंत काले और कलंकित अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। सीएम योगी ने समूचे विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ जैसे पवित्र और समाज को नई दिशा देने वाले विधेयक को जानबूझकर लोकसभा में रोक देना मात्र एक राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि यह देश की अस्मिता यानी ‘भारत माता’ के असीम सम्मान और उनके गौरव पर किया गया एक बहुत ही सीधा और भारी प्रहार है।
कांग्रेस नीत गठबंधन पर मातृशक्ति के साथ भारी विश्वासघात का आरोप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सियासी हमले को और धार देते हुए विपक्षी खेमे पर देश की महिलाओं के साथ सबसे बड़ा राजनीतिक छल करने का गंभीर इल्जाम लगाया। उन्होंने बहुत ही स्पष्ट लहजे में कहा कि संसद के अंदर विपक्ष द्वारा उठाया गया यह कदम भारत की पूरी मातृशक्ति के साथ किया गया एक बहुत बड़ा धोखा और उनके अधिकारों पर डाका डालने के समान है। योगी ने इसे आधी आबादी के जायज लोकतांत्रिक अधिकारों का सरेआम किया गया चीरहरण बताया। उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व में बने ‘इंडी’ (INDI) गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि इस पूरे गठबंधन ने बिल के विरोध में वोट डालकर अपनी ओछी और घोर महिला विरोधी मानसिकता का पर्दाफाश कर दिया है। सीएम योगी ने कहा कि देश की जागरूक नारी शक्ति विपक्ष के इस दोहरे चरित्र को बहुत ही भली-भांति देख और समझ रही है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महिलाओं के उत्थान की निरंतर प्रतिबद्धता विपक्षी दलों को उनके इस कृत्य के भावी राजनीतिक नुकसान के प्रति आगाह करते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बहुत ही कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की स्वाभिमानी महिलाएं अपने साथ हुए इस भारी धोखे, अन्याय और छल-कपट को कतई भूलने वाली नहीं हैं। योगी ने पूर्ण विश्वास के साथ कहा कि जब भी उचित समय आएगा और चुनाव होंगे, तब देश की नारी शक्ति अपने मताधिकार का प्रयोग करके इस विश्वासघात का करारा जवाब जरूर देगी। इसके साथ ही, उन्होंने आधी आबादी को भरोसा दिलाते हुए कहा कि भले ही विपक्ष ने आज इस बिल को रोक दिया हो, लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, उनकी गरिमा की हिफाजत और उनके पूर्ण सशक्तीकरण के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का संघर्ष और प्रयास बिना रुके लगातार चलते रहेंगे।
सदन में मत विभाजन की स्थिति और पीठासीन अधिकारी का अंतिम निर्णय इस पूरे संसदीय गतिरोध और वोटिंग के दौरान उत्पन्न हुई तकनीकी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए, लोकसभा के पीठासीन अधिकारी यानी अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को आधिकारिक जानकारी प्रदान की। स्पीकर ओम बिरला ने सदन को संबोधित करते हुए बताया कि जब इस बहुचर्चित महिला आरक्षण बिल पर विचार करने हेतु मत विभाजन (वोटिंग) की प्रक्रिया अपनाई गई, तो इसके पक्ष में कुल 298 मत प्राप्त हुए, जबकि इस विधेयक के सीधे विरोध में 230 सदस्यों ने अपना वोट डाला। ओम बिरला ने संसदीय प्रक्रिया और संविधान के नियमों का संदर्भ देते हुए सदन को यह स्पष्ट कर दिया कि चूंकि यह संशोधन बिल सदन में विचार किए जाने के शुरुआती स्तर पर ही दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहकर गिर गया है, अतः अब इस विधेयक पर आगे की कोई भी कार्यवाही या चर्चा करना संसदीय नियमों के तहत कतई संभव नहीं है।
विधेयक को राजनीतिक संरचना बदलने की साजिश बताते हुए विपक्ष का जश्न एक तरफ जहां सरकार इस बिल के गिरने से निराश है, वहीं दूसरी ओर लोकसभा में विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस विधेयक के नामंजूर होने पर अपनी प्रसन्नता और संतोष व्यक्त किया है। राहुल गांधी ने इस महिला आरक्षण विधेयक को एक बहुत बड़ी साजिश और सीधे तौर पर भारत के संविधान पर किया गया एक बड़ा प्रहार बताया। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि विपक्ष ने पूरी ताकत के साथ एकजुट होकर संविधान पर हुए इस हमले को सदन में विफल कर दिया है, जो कि देश के हित में एक बहुत ही अच्छी बात है। राहुल गांधी ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए यह बड़ा दावा किया कि सरकार का यह मसौदा असल में कोई महिला आरक्षण बिल था ही नहीं, बल्कि यह तो भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक संरचना को पूरी तरह से बदलने का एक गुप्त तरीका था, जिसे विपक्ष ने सफलतापूर्वक रोक दिया है।



































