दुखद वारदात की जानकारी कानपुर स्थित अदालत परिसर में गुरुवार का दिन एक बड़ी त्रासदी लेकर आया, जब प्रियांशु श्रीवास्तव नामक 24 वर्षीय युवा वकील ने कोर्ट की पांचवीं मंजिल से नीचे कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद लोग और वकील दंग रह गए। बताया जा रहा है कि प्रियांशु ने मरने से पहले व्हाट्सएप पर दो पन्नों का एक नोट साझा किया था, जिसमें उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों और पारिवारिक प्रताड़ना का अत्यंत मार्मिक विवरण दिया था।
प्रशासनिक एवं चिकित्सीय प्रयास घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस बल की मदद से प्रियांशु को तुरंत उर्सुला हॉर्समैन मेमोरियल (यूएचएम) अस्पताल पहुँचाया गया। डिप्टी पुलिस कमिश्नर सत्यजीत गुप्ता ने इस संबंध में पुष्टि की कि डॉक्टरों ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन ऊंचाई से गिरने के कारण लगी गंभीर चोटों की वजह से उन्हें बचाया नहीं जा सका। पुलिस की टीम ने घटना स्थल की घेराबंदी कर साक्ष्य जुटाना शुरू कर दिया है और वकीलों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
डिजिटल साक्ष्य और संदेश प्रियांशु ने सुसाइड करने से ठीक 21 मिनट पहले, यानी दोपहर 12:05 बजे अपना सुसाइड नोट व्हाट्सएप स्टेटस पर लगाया था और इसे अपने पिता व दोस्तों को भी फॉरवर्ड किया था। जब तक उनके परिचित और परिजन इस संदेश को पढ़ पाते और उन्हें रोकने का प्रयास करते, तब तक प्रियांशु यह घातक कदम उठा चुके थे। नोट में उन्होंने लिखा था कि वे अपनी पूरी चेतना में यह पत्र लिख रहे हैं ताकि दुनिया उनकी पीड़ा को समझ सके।
पेशेवर जीवन का संघर्ष कानपुर नगर से वर्ष 2025 में एलएलबी (Law) की पढ़ाई पूरी करने वाले प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में अपनी अधूरी रह गई कानूनी औपचारिकताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि हालांकि वे एक पंजीकृत अधिवक्ता थे, लेकिन व्यस्तता और समय के अभाव में वे प्रयागराज स्थित उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से अपना सर्टिफिकेट हासिल नहीं कर पाए थे। यह उनकी अधूरी रह गई इच्छाओं में से एक थी जिसे उन्होंने अपने अंतिम पत्र में स्थान दिया।
बचपन की कड़वी यादें सुसाइड नोट में प्रियांशु ने अपने पिता द्वारा किए गए व्यवहार को अपनी मौत का मुख्य कारण बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि बचपन में मामूली बातों पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता था और हाईस्कूल की परीक्षा के दौरान भी उन्हें घर से निकालने की धमकी दी गई थी। प्रियांशु ने लिखा कि एक-एक मिनट का हिसाब लिए जाने और लगातार शक किए जाने की वजह से वे मानसिक रूप से टूट चुके थे और उन्हें लगने लगा था कि “पापा जीत गए और मैं हार गया।”
अंतिम संदेश और कानूनी कार्यवाही अपनी अंतिम अपील में प्रियांशु ने समाज के माता-पिता को संदेश दिया कि बच्चों पर मानसिक दबाव की एक सीमा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके पिता उनकी लाश को हाथ न लगाएं और अंत में अपनी मां के लिए अपना स्नेह व्यक्त किया। पुलिस ने अब मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। डिजिटल सबूतों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले की जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि इस दुखद घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सके।



































