मानदेय बढ़ाने का पुराना प्रस्ताव: उत्तर प्रदेश में इंस्ट्रक्टरों के मानदेय का मुद्दा सालों पुराना है। साल 2017 में इंस्ट्रक्टरों का मानदेय 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि, उस दौरान राज्य में सरकार बदल गई, जिसके कारण इस प्रस्ताव को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका और यह फैसला लागू होने से अटक गया।
हाई कोर्ट का अहम आदेश: सरकार बदलने के बाद यह मामला कानूनी लड़ाई में बदल गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सुनवाई करते हुए शुरू में राज्य सरकार को 17,000 रुपये के मानदेय के साथ 9 प्रतिशत ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया था। लेकिन राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी, जिसके बाद एक डिवीजन बेंच ने इस भुगतान की अवधि को घटाकर महज एक साल तक सीमित कर दिया।
शीर्ष अदालत से मिली बड़ी जीत: हाई कोर्ट के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गया। 5 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इंस्ट्रक्टर अपनी कॉन्ट्रैक्ट की अवधि खत्म होने के बाद भी सेवा में बने रहेंगे और लंबे समय तक सेवा करने के कारण उनकी पोस्ट असल में परमानेंट हो गई है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि 2017 से ही 17,000 रुपये का मानदेय लागू किया जाए।
सहायक शिक्षक पद से वापसी: शिक्षा मित्रों का मामला भी कोर्ट के चक्करों में उलझा रहा। इनकी नियुक्ति 2001 में शुरू हुई थी और 2013-14 में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान कई शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक बना दिया गया था। लेकिन 2015 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इन नियुक्तियों को रद्द कर दिया। 25 जुलाई, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस रद्दीकरण को सही ठहराया, जिससे लगभग 1.78 लाख सहायक शिक्षक वापस शिक्षा मित्र बन गए।
सैलरी घटने पर जोरदार प्रदर्शन: सहायक शिक्षक के पद से वापस शिक्षा मित्र बनाए जाने के बाद इन कर्मचारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उनकी सैलरी लगभग 50,000 रुपये से घटकर मात्र 3,500 रुपये प्रति माह रह गई। इस भारी कटौती के विरोध में लखनऊ सहित कई जगहों पर बड़े पैमाने पर आंदोलन हुए। इसके दबाव में सरकार ने उनका मानदेय 3,500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह कर दिया।
नई भर्तियों में मिली विशेष छूट: आंदोलन और विरोध के बाद सरकार ने शिक्षकों की नई भर्ती के लिए अभियान चलाने की घोषणा की। इसके तहत साल 2018 में 68,500 पदों और साल 2019 में 69,000 पदों पर शिक्षकों की भर्ती निकाली गई। इन भर्तियों में सरकार ने शिक्षा मित्रों को उम्र सीमा में छूट के साथ-साथ बोनस अंक भी दिए, जिसका लाभ उठाते हुए 13,000 से ज्यादा शिक्षा मित्र सहायक शिक्षक के पद पर अपनी जगह पक्की कर पाए।



































