अमेरिकी सैन्य ताकत में इजाफा: मध्य पूर्व में तनावपूर्ण स्थितियों के बीच अमेरिकी सेना ने अपनी उपस्थिति काफी मजबूत कर ली है। अमेरिकी सेना के अनुसार, निमित्ज़-श्रेणी का तीसरा विमानवाहक पोत ‘USS जॉर्ज H.W. बुश’ मिडिल-ईस्ट पहुंच गया है। विश्लेषकों का मानना है कि पिछले 20 से अधिक वर्षों में इस क्षेत्र में तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोतों की यह सबसे बड़ी संख्या है।
यूरोपीय सहयोगियों पर तीखा प्रहार: सैन्य तैनाती के साथ-साथ अमेरिका ने अपने सहयोगियों पर भी नाराजगी जाहिर की है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने नाटो और यूरोपीय देशों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का गतिरोध अमेरिका से ज्यादा उनकी लड़ाई है। अमेरिका ने ईरान की पाबंदियां हटाने और आवाजाही सामान्य करने के लिए मदद मांगी थी, लेकिन नाटो ने अमेरिका का साथ नहीं दिया।
इस्लामाबाद में कूटनीतिक हलचल: सैन्य और रणनीतिक तनाव के बीच शांति के प्रयास भी जारी हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची आधिकारिक दौरे पर पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई के अनुसार, यह दौरा अमेरिका द्वारा थोपे गए आक्रामक युद्ध को समाप्त करने और क्षेत्र में पाकिस्तान के सद्भावना पहलों व मध्यस्थता प्रयासों के सिलसिले में है।
दूसरे दौर की वार्ता का एजेंडा: अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत कब और किस एजेंडे पर होगी, यह पूरी तरह से साफ नहीं है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भरोसेमंद दूत स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर इस बातचीत के लिए पाकिस्तान रवाना होने वाले हैं। इस कूटनीतिक पहल का उद्देश्य क्षेत्र में जारी अस्थिरता को खत्म कर शांति बहाल करना है।
सीधी वार्ता से ईरान का इनकार: कूटनीतिक सरगर्मियों के बावजूद दोनों देशों के बीच आमने-सामने बैठकर बात करने पर सस्पेंस बना हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ उनकी कोई सीधी बैठक तय नहीं है। ईरान का प्रतिनिधिमंडल अपनी सभी बातें और शर्तें मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के उच्च-स्तरीय अधिकारियों के सामने ही रखेगा।
हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष-विराम: इन कूटनीतिक और सैन्य घटनाक्रमों के बीच ट्रंप ने एक बड़ी राहत की खबर दी है। ट्रंप के अनुसार, उच्च-स्तरीय बातचीत के बाद इज़रायल और हिज़्बुल्लाह के बीच जारी शुरुआती 10-दिनों के संघर्ष-विराम को अब तीन हफ़्ते के लिए बढ़ा दिया गया है। इसी अनिश्तिकाल के लिए सीजफायर बढ़ाये जाने के फैसले के बाद ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता के दूसरे दौर का रास्ता निकला है।



































