कक्षा में एकाग्रता है सफलता का रहस्य: यूपी बोर्ड की मेरिट लिस्ट में अपने स्कूल की छात्राओं कशिश वर्मा और शिखा वर्मा के टॉप करने के बाद, विद्यालय के प्रिंसिपल अरुण कुमार वर्मा ने अपनी खास शिक्षण शैली साझा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश स्तर पर टॉप करने के लिए कोई विशेष रहस्य नहीं है। उनके अनुसार, कक्षा में पढ़ाते समय बच्चों का एकाग्रचित होना सबसे अहम है। अगर बच्चा ध्यान से सुनकर समझ रहा है, तो उसके नाकामयाब होने की कोई गुंजाइश नहीं रहती है।
स्वाध्याय और तार्किक क्षमता पर जोर: आजकल के स्कूलों में बच्चों को भारी होमवर्क देने की जो परंपरा चल पड़ी है, विद्यालय उससे अलग राह अपनाता है। होमवर्क के बजाय विद्यालय में बच्चों में स्वाध्याय (Self-learning) और तार्किक क्षमता विकसित करने पर सबसे अधिक जोर दिया जाता है। कक्षा में ही बच्चों की शंकाओं का शत-प्रतिशत समाधान कर दिया जाता है, ताकि बच्चों को पढ़ाई के लिए ट्यूशन, कोचिंग या ऑनलाइन क्लासेस पर बिल्कुल भी निर्भर न रहना पड़े।
तनाव मुक्त माहौल से मिलता है परिणाम: बोर्ड परीक्षा के दौरान बच्चों को मानसिक दबाव से दूर रखने के लिए स्कूल प्रशासन पूरे साल खास कदम उठाता है। बच्चों को लगातार मोटिवेट किया जाता है और समय-समय पर टेस्ट लेकर उनका मूल्यांकन होता है। इससे बच्चों के अंदर का परीक्षा का डर पूरी तरह खत्म हो जाता है। छात्रों को परीक्षा का अनावश्यक दबाव न लेने की सलाह दी जाती है और इसी तनाव-मुक्त माहौल के कारण बच्चे इतना बेहतरीन परिणाम देते हैं।
पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भी रुचि: अक्सर यह माना जाता है कि टॉपर सिर्फ किताबी कीड़े होते हैं, लेकिन विद्यालय प्रशासन पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों को भी महत्व देता है। प्रिंसिपल ने बताया कि बच्चों का ध्यान सिर्फ एकेडमिक्स तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनका इंटरेस्ट एक्सट्रा करिकुलर एक्टिविटीज (Extracurricular Activities) में भी खूब रहता है। उदाहरण के तौर पर, 12वीं में यूपी टॉप करने वाली छात्रा शिखा वर्मा को डांसिंग और साहित्य के क्षेत्र में भी काफी रुचि है।
संसाधनों की कमी नहीं, प्रतिभा को निखारने का लक्ष्य: ग्रामीण और छोटे कस्बों में अक्सर स्कूलों को संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ता है, लेकिन अरुण कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया कि उनके स्कूल के स्तर पर बच्चों के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं है। असली चुनौती आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों की होती है। ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों को आर्थिक बोझ से मुक्त कर बेहतर शिक्षा देने के लिए ही सामान्य बच्चों से अलग ‘सुपर 30’ की निशुल्क कक्षाएं चलाई जाती हैं।
आगामी परीक्षार्थियों के लिए खास संदेश: यूपी बोर्ड के छात्रों के लिए प्रिंसिपल ने अपना खास संदेश भी साझा किया। इस साल पास होने वाले छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि जिनका परिणाम मनमुताबिक नहीं रहा, उन्हें निराश होने के बजाय नया लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। आगामी बोर्ड परीक्षार्थियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि छात्र चाहे जिस भी स्कूल में पढ़ें, जब शिक्षक पढ़ा रहे हों तो पूरी एकाग्रता के साथ उनकी बात सुनें और समझें, इससे उन्हें शिखर तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकेगा।



































