तहलका मैगजीन के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दुष्कर्म केस में बड़ा झटका लगा है। गोवा स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने तरुण तेजपाल को केस में दोषी ठहराया है। जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की बेंच ने इस अपील पर फैसला सुनाया है। अदालत ने 2021 में ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने सजा के तय बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने की बात कही।
सजा पर दलीलें हाईकोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद सजा के मुद्दे पर दलीलें शुरू की गई थीं। वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने कहा कि वे आज ही सजा के बिंदु पर अपनी दलीलें देंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सजा पर बहस दोपहर 2:30 बजे से शुरू करने का आग्रह किया। अदालत ने कहा कि चूंकि सजा पर सुनवाई होनी है अतः तेजपाल आत्मसमर्पण हेतु इंतजार करें। तेजपाल को आईपीसी की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B में दोषी माना गया है।
बचाव पक्ष की मांग तेजपाल के वकील आबाद पोंडा ने अदालत से सजा तय करते समय नरमी बरतने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि 62 वर्षीय तेजपाल का यह पहला अपराध है और वे वरिष्ठ नागरिक हैं। उन्होंने कानून के तहत निर्धारित न्यूनतम सजा देने और पुरानी हिरासत अवधि को जोड़ने को कहा। उन्होंने बताया कि आरोपी ने पहले 6 महीने की हिरासत बिताई है जहाँ उनका आचरण सही था। वकील ने यह भी कहा कि उनके पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का वैधानिक अधिकार है।
अभियोजन की आपत्ति सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बचाव पक्ष की नरमी की अपील का कड़ा विरोध दर्ज कराया। तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में आरोपी ने किसी भी प्रकार का पछतावा नहीं दिखाया है। आरोपी का रवैया बेहद निर्भीक था और उसने अगले ही दिन कथित कृत्य को फिर से दोहराया। अदालत ने तरुण तेजपाल को भी सजा के बिंदु पर अपना व्यक्तिगत वक्तव्य देने की अनुमति दी। तेजपाल ने अदालत में कहा कि उनके पास अब उच्च अदालत में अपील करने का विकल्प मौजूद है।
मामले का इतिहास यह पूरा मामला साल 2013 का है जब एक युवती ने तेजपाल पर गंभीर आरोप लगाए थे। गोवा के एक फाइव स्टार होटल की लिफ्ट में युवती ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। आरोपी तरुण तेजपाल को इस मामले में 30 नवंबर 2013 को पुलिस द्वारा अरेस्ट किया गया था। इसके बाद गोवा की सेशन कोर्ट ने साल 2021 में तेजपाल को सभी आरोपों से मुक्त किया था। राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपनी अपील दायर की थी।
अन्य अदालती टिप्पणी बता दें कि 6 महीने पहले एक अन्य अलग मामले में भी बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी आई थी। हाईकोर्ट ने उस मामले में पिता के दावे को पूरी तरह से बेहद मनगढ़ंत करार दिया था। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा था कि बेटी गुस्से में पिता पर रेप आरोप लगाए यह असंभव है। फिलहाल तरुण तेजपाल मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच सजा पर अपनी अंतिम सुनवाई कर रही है। सजा के ऐलान के बाद ही आरोपी के आत्मसमर्पण और आगे की अपील की प्रक्रिया तय होगी।










































