ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump अब परमाणु समझौते के बजाय Straight of Hormuz को दोबारा खोलने को प्राथमिकता दे सकते हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, Donald Trump अपने करीबी अधिकारियों से यह संकेत दे चुके हैं कि अगर ईरान Straight of Hormuz में समुद्री यातायात पूरी तरह बहाल कर देता है, तो अमेरिका परमाणु समझौते के बिना भी संघर्ष को समाप्त करने का रास्ता तलाश सकता है। हालांकि, ईरान ने होर्मुज को फिर से खोलने के लिए ऐसी शर्तें रख दी हैं, जिनसे किसी समझौते तक पहुंचना मुश्किल नजर आ रहा है। तेहरान ने अमेरिका से अरबों डॉलर के भुगतान, नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने और अमेरिकी सैनिकों को क्षेत्र से वापस बुलाने की मांग की है।
समुद्री यातायात और तेल बाजार: Straight of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है जहाँ ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump कई बार दावा कर चुके हैं कि होर्मुज खुला है, लेकिन तेहरान ने व्यावसायिक जहाजों से इस मार्ग के इस्तेमाल के बदले शुल्क लेने की बात कही है, जिसे अमेरिका ने खारिज कर दिया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर ज़ोलघद्र ने युद्ध समाप्त करने, नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और प्रतिबंधों को हटाने जैसी शर्तें रखी हैं। इसके अलावा ईरान की जब्त संपत्तियों को जारी करना भी उनकी मांगों का प्रमुख हिस्सा है।
युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग: इसके अतिरिक्त, ईरान ने युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग भी की है और चाहता है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ धमकियां और बयानबाजी बंद करे तथा क्षेत्र में मिलिशिया समूहों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोके। रिपोर्ट के अनुसार, Donald Trump पर संघर्ष को जल्द खत्म करने का घरेलू दबाव भी लगातार बढ़ रहा है क्योंकि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में तीन महीने से भी कम समय बचा है और पेट्रोल की कीमतें काफी ऊंची बनी हुई हैं। ऐसे में Donald Trump के सामने चुनौती है कि वह संघर्ष को इस तरह खत्म करें कि अमेरिका में इसे अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकें। Straight of Hormuz में जहाजों की आवाजाही बहाल होना उनके लिए एक बड़ा राजनीतिक आधार बन सकता है।
परमाणु कार्यक्रम और खुफिया तंत्र: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का सबसे बड़ा मुद्दा लंबे समय से ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा है, लेकिन WSJ के मुताबिक Donald Trump ने हाल की बैठकों में अधिकारियों से कहा है कि ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुंचाए जाने के बाद तेहरान के लिए इसे दोबारा शुरू करना मुश्किल होगा। Donald Trump का मानना है कि अमेरिकी खुफिया तंत्र किसी भी नई परमाणु गतिविधि का पता लगा सकता है और सैन्य कार्रवाई की धमकी ईरान को रोक सकती है। इसी सोच के चलते Donald Trump प्रशासन परमाणु समझौते के बजाय Straight of Hormuz में समुद्री यातायात बहाल कराने को प्राथमिकता दे सकता है। इससे परमाणु मुद्दा फिलहाल बातचीत की मेज पर पीछे छूटता हुआ दिखाई दे रहा है।
आर्थिक मांगें और प्रतिबंधों में छूट: संभावित समझौते में सबसे मुश्किल मुद्दों में से एक ईरान की आर्थिक मांगें हो सकती हैं जहाँ तेहरान अरबों डॉलर की क्षतिपूर्ति और विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों को जारी करने की मांग कर रहा है। Donald Trump पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिकी करदाताओं का पैसा ईरान को नहीं दिया जाएगा, हालांकि अधिकारियों के मुताबिक कुछ संपत्तियों को शर्तों के साथ जारी करने पर विचार हो सकता है। इसके अलावा, ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की अनुमति देने और प्रतिबंधों में छूट देने का मुद्दा भी अहम होगा। अमेरिका और ईरान के बीच इन आर्थिक मुद्दों पर किसी आम सहमति तक पहुँचना काफी जटिल साबित हो रहा है।
भविष्य की बातचीत का केंद्र: अगर ईरान Straight of Hormuz जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक और सैन्य जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह बहाल करने पर सहमत होता है, तो Donald Trump के पास परमाणु समझौते के बिना भी संघर्ष समाप्त करने का रास्ता खुल सकता है। लेकिन ईरान की मौजूदा मांगें बताती हैं कि तेहरान केवल जलडमरूमध्य खोलने के बदले अमेरिकी रियायतें हासिल करना चाहता है। ऐसे में आने वाले दिनों में बातचीत का केंद्र परमाणु कार्यक्रम से हटकर Straight of Hormuz, प्रतिबंधों, अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और आर्थिक मुआवजे पर आ सकता है। दोनों देशों के रुख से साफ है कि आने वाले समय में कूटनीतिक हल की दिशा तय होगी।











































