यूक्रेन युद्ध को लेकर जारी कूटनीतिक तनाव के बीच FBI डायरेक्टर Kash Patel के रूस दौरे की खबरें सामने आ रही हैं। ‘पोलिटिको’ की रिपोर्ट के अनुसार Kash Patel 14-15 अक्टूबर को रूस की यात्रा पर जाने का मन बना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक इस संभावित दौरे को सुरक्षा और कूटनीति के लिहाज से बेहद असाधारण मान रहे हैं। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा एजेंसियों के स्तर पर बातचीत के नए रास्ते खुल सकते हैं। यह कदम वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच संवाद बहाल करने का एक जरिया हो सकता है।
पुरानी जांचों और दौरों पर नजर: Kash Patel का नाम पहले भी रूस से जुड़ी कई राजनीतिक जांचों और विवादों में प्रमुखता से आता रहा है। राष्ट्रपति Donald Trump के पहले कार्यकाल के दौरान 2016 चुनाव से जुड़ी जांचों पर सवाल खड़े करने में वे सक्रिय रहे हैं। वर्तमान में ब्यूरो प्रमुख के तौर पर उनके द्वारा किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय दौरों पर अमेरिकी संसद की सख्त निगरानी है। इन यात्राओं के रणनीतिक फायदों को लेकर वाशिंगटन के राजनीतिक हलकों में लगातार सवाल भी उठाए जाते रहे हैं। इसके बावजूद Kash Patel की इस आगामी यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रूसी विशेषज्ञों के बयान: रूस के सरकारी समाचार पत्रों और शोध संस्थानों ने इस संभावित दौरे पर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी हैं। अर्बातोव इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ व्लादिमीर वासिलिएव ने कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत में लेनदेन का सिद्धांत लागू होगा। उन्होंने बताया कि रूस के पास अमेरिकी राजनीति से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारियां हो सकती हैं जो डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए नुकसानदेह हों। वासिलिएव का मानना है कि इस यात्रा में दोनों पक्ष एक-दूसरे से महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल-जवाब कर सकते हैं। इस बातचीत का नतीजा दोनों देशों के बीच भावी संबंधों की दिशा तय कर सकता है।
क्रेमलिन से जुड़ी संस्थाओं का रुख: वासिलिएव के संबंध रशियन इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल से हैं, जिसके बोर्ड चेयरमैन रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव हैं। उनके बयानों से संकेत मिलता है कि रूसी सुरक्षा तंत्र इस बातचीत को केवल एकतरफा नहीं रहने देना चाहता है। रूसी पक्ष का कहना है कि अगर अमेरिकी अधिकारी उनसे कोई सहयोग मांगते हैं तो बदले में उन्हें भी कुछ देना होगा। इस तरह की शर्तों के कारण यह बैठक काफी जटिल और मोलभाव वाली साबित हो सकती है। दोनों पक्षों की ओर से मेज पर रखे जाने वाले प्रस्ताव ही इस वार्ता की सफलता तय करेंगे।
सुरक्षा एजेंसी करेगी मेजबानी: तय कार्यक्रम के अनुसार Kash Patel का दल सबसे पहले Moscow पहुंचेगा और उसके बाद Saint Petersburg के लिए रवाना होगा। इस पूरे दौरे के दौरान रूस की सबसे शक्तिशाली सुरक्षा एजेंसी FSB उनकी आधिकारिक मेजबान के रूप में मौजूद रहेगी। FSB सोवियत दौर की मशहूर एजेंसी KGB की उत्तराधिकारी संस्था मानी जाती है जो देश की आंतरिक सुरक्षा देखती है। इतनी बड़ी सुरक्षा एजेंसी द्वारा मेजबानी किए जाने से इस यात्रा के गंभीर कूटनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। सुरक्षा के इस घेरे में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
उच्चस्तरीय बैठकों पर सस्पेंस: हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि Kash Patel रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin से व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे या नहीं। इसके अलावा क्रेमलिन के शीर्ष अधिकारियों के साथ उनकी संभावित मुलाकातों का कोई विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किया गया है। आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक न होने के कारण इस यात्रा को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। फिर भी, वैश्विक मामलों के जानकार मान रहे हैं कि यह दौरा दोनों देशों के बीच जारी गतिरोध को तोड़ने में मददगार हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस गोपनीय वार्ता से क्या नतीजे निकलकर सामने आते हैं।


























































